चीन नेपाल मित्रता का नया प्रतीक--अरानिको की मूर्ति का अनावरण

2018-10-26 10:00:00
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22 सितंबर को नेपाल के मशहूर वास्तु कलाकार और चीन नेपाल परंपरागत मित्रता बढ़ाने वाले अरानिको की मूर्ति का अनावरण समारोह लालितपुर शहर के म्युनिसिपल हॉल में आयोजित हुआ । नेपाली राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी इसमें मौजूद रहे।

 

वर्ष 1244 में जन्में अरानिको नेपाल में महान वास्तुविद थे। अरानिको का जन्म स्थान तो नेपाल का पटान यानी आज का ललितपुर है । वर्ष 1260 में तत्कालीन चीन के युएं राजवंश के बादशाह कुबलई खान के निमंत्रण पर वे चीन आये और चीन में चालीस से अधिक साल बिताए। इस दौरान उनके नेतृत्व में बनीं दसेक महान इमारतें अब मूल्यवान ऐतिहासिक धरोहर बन चुकी हैं, जिनमें से सफेद पगोडा मंदिर पेइचिंग का एक मशहूर पर्यटन स्थल है। अरानिको का जन्मस्थान नेपाल के फाथाई शहर में स्थित है, यानी आज का ललितपुर शहर। 22 सितंबर को आयोजित अरानिको की मूर्ति के अनावरण समारोह पर ललितपुर शहर के उपमेयर गिदा ने घटनास्थल पर एक नेपाली कवि गायी।


गीत के बोल इस तरह है। अरानिको महान कलाकार हैं। नेपाली जनता को गौरव लगता है। नेपाल के पर्यटन, संस्कृति और नागरिक विमानन के मंत्री रबिनद्र प्रसाद अथिकरी ने समारोह में अरानिको की उल्लेखनीय उपलब्धियों की याद करते समय कहा,

आज चीन की राजधानी पेइचिंग शहर के केंद्र में स्थित मशहूर पर्यटन स्थल---पाईथा मठ में अरानिको द्वारा निर्मित उस सफेद पगोडा खड़ा है। वह न सिर्फ अरानिको की उच्चतम कला का प्रतीक है, बल्कि नेपाल-चीन मैत्री और पीढ़ी दर पीढ़ी मैत्री का प्रतीक भी है।

मंत्री अथिकरी की चर्चा में इस सफेद मठ का दूसरा नाम है म्याओयिंग मठ है। वास्तु कला में इस सफेद पगोडा की खास विशेषता है। चाहे चाँदनी या सूर्य की रोशनी में सफेद पगोडा की कोई छाया नहीं है। 22 सितंबर के अनावरण समारोह में नेपाल स्थित चीनी राजदूत यू होंग ने नेपाली मित्रों को पाईथा मठ का परिचय किया। मेरा जन्म पेइचिंग में हुआ, इसलिए पाईथा मठ से बहुत परिचित हूं। मठ में सफेद पगोडा अरानिको का वर्क है, जो चीन-नेपाल मैत्री का प्रतिबिंब है। अभी तक वह भी देश विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करती है। हरे पेड़, नीले आसमान, हवा में घंटा बजने की आवाज --- ये सब पाईथा मठ के प्रति मेरी सुन्दर स्मृति है।

पाईथा मठ चीन-नेपाल मैत्री का प्रतीक है। अरानिको चीन-नेपाल मैत्री के योगदानकर्ता हैं। इस मैत्री का प्रसार व विकास करना अरानिको के प्रति सब से अच्छी याद है। नेपाल के मशहूर कलाकार और मशहूर साहित्यकार डॉक्टर सथिया मोहन चोशी ने पिछली शताब्दी के 70 के दशक में चीन में छह सालों के लिए काम किया था। वे रेडियो पेइचिंग के भूतपूर्व नेपाली विशेषज्ञ थे। नेपाल-चीन मैत्री की चर्चा में उन्होंने कहा, हालांकि नेपाल और चीन के बीच हिमालय पर्वत खड़े हैं। दोनों देशों के बीच आवाजाही के लिए अनेक कठिनाइयों को दूर करने की जरूरत है। फिर भी दोनों देशों की जनता के बीच अतूल्य सांस्कृतिक आदान प्रदान बरकरार है। दोनों के मैत्रीपूर्ण संबंधों का निरंतर विकास किया जाता रहा है।

अरानिको जैसे चीन-नेपाल मैत्री दूत दोनों देशों की जनता का समान गर्व है। अरानिको की मूर्ति के अनावरण समारोह पर राष्ट्रपति भंडारी ने अरानिको की ऐतिहासिक उपलब्धियों की भूरि भूरि प्रशंसा की। मुझे विश्वास है कि इस तरह की गतिविधियां नेपाल की कला की रोशनी को दिखा सकती है, साथ ही नेपाल-चीन परम्परागत मैत्रीपूर्ण आवाजाही को भी आगे बढ़ा सकती है। अरानिको ने नेपाल और चीन के बीच घनिष्ठ संबंध बढ़ाने के लिए अविस्मर्णीय योगदान दिया। हमारे देश को उन पर बड़ा गर्व है।

अरानिको नेपाल में मशहूर जातीय वीर है। नये युग में चीन-नेपाल मैत्री को आगे विकसित करने वाले चीनियों और नेपाली लोगों की संख्या भी ज्यादा से ज्यादा हो गयी हैं। उन लोगों को राजदूत यू होंग ने नये युग के अरानिको पुकारे हैं। अधिकाधिक चीन और नेपाल के लोग अरानिको और दोनों देशों की मनत्रवत आवाजाही का इतिहास जानेंगे। उन्होंने कहा कि वर्तमान में बहुत से चीनी या नेपाली लोग दोनों देशों की मित्रता के नये विकास के लिए प्रयास कर रहे हैं ।वे नये युग के अरानिको हैं। आज के अरानिको मूर्ति के अनावरण समारोह पर हम एक साथ यह शुभकामना दें कि चीन-नेपाल अपने विकास के रास्ते में और बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकेंगे। दोनों देशों की मैत्री लम्बे अरसे के लिए रहेगी।

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