विश्व में सब से युवा बोइंग 777 महिला कप्तान

2018-08-01 09:09:58
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“तुम्हारी विजय तुम अकेले की बात नहीं है, बल्कि सभी आजीवन घर में फंसने वाली लड़कियों का मिसाल होगी”

 भारतीय फ़िल्म《दंगल》ने हमें यह दिखाया कि भारत में महिलाएं परम्परा के बंधन से मुक्त कर सपना को साकार करने के लिए कितना मुश्किल होता है। जन्म होने के बाद ही लड़कियों के शादी करके बच्चों को जन्म देने का भाग्य तय हो चुका है। करोड़ों भारतीय लड़कियों को आदत हो चुकी हैं। इस से पहले उन्होंने अपने भाग्य को बदलने पर कभी नहीं सोचा। जबकि एनी दिव्या उन में से एक अपवाद है। कुछ समय पहले वे दुनिया की सब से युवा बोइंग 777 महिला कप्तान बनी। कौन विश्वास करता है कि इस लड़की ने पायलट बनने से पहले विमान से यात्रा भी नहीं की थी। कारण बहुत सरल है कि एनी एक गरीब परिवार की लड़की है। उस का जन्म दक्षिण पूर्वी भारत के आंध्रप्रदेश में हुआ था। उन के पिता जी द्लित हैं।

भारत में सैनिक बनना गरीब लोगों के लिए लोहे का चावल कटोरा माना जाता है। एनी के पिता जी ने गरीबी से सेना में भरती की। किसी ने यह नहीं सोचा कि छोटी लड़की का सपना इस भूमि में शुरू हुआ।

बचपन से अपने पिता जी के साथ वायु सेना के अड्डे के पास रहने वाली यह लड़की अकसर दूर के विमान देखती थी। उसे विमान के उड़ने की आवाज़ से आदत था। उड़ान करने की बीज उस के दिल में दबायी गयी। प्राइमरी स्कूल में जब क्लास में छात्र अपने सपनों की चर्चा करते, करीब सब बच्चे इंजीनियर बनना चाहते थे, जबकि लड़कियां डॉक्टर बनना चाहती थीं। लेकिन वे सिर्फ सोच सकते थे। गरीब परिवारों में रहने के वजह से वे लोग सिर्फ़ टैक्सी ड्राइवर या रेस्तरां की वेट्रिस बन सकते हैं। संघर्ष उन के लिए कोई मतलब नहीं है। उस समय सिर्फ़ एनी ने कहा कि वह एक पायलट बनना चाहती थी। सब लोग उस पर हंसते थे। भारत में महिलाओं के नीचे स्थान को देखकर एक महिला पायलट बनना बहुत मुश्किल बात होगी। चूंकि भारत में अधिकांश महिलाओं का भाग्य है कि बड़ा होने के बाद शादी के बाद बच्चों को जन्म देती हैं और एक हाउसवाइफ़ बनती हैं। लेकिन एनी इसे मानने को तैयार नहीं थी। वह विमान से संबंधित कुछ काम करना चाहती थी। मिडिल स्कूल से स्नातक होने के बाद उसे ईईई परीक्षा में भाग लिया और पास किया। उसे स्थानीय एक इंजीनियरिंग अकादमी में पढ़ने का मौका मिला। यह उस के लिए बहुत अच्छा मौका है। यहां पढ़ने के बाद वह संभवतः एक इंजीनियर बन सकेंगी। लेकिन एनी के इस अकादमी में भरती से पहले उस की एक सहपाठी ने अचानक दौड़कर उसे एक कागज़ दिया। यह हज़ारों किलोमीटर दूर आईजीआरयूए एविएशन स्कूल की एक सूचना थी। अब समस्या आयी है। आईजीआरयूए एविएशन स्कूल की प्रवेश परीक्षा का समय और इंजीनियरिंग अकादमी में भरती का समय एक ही है। यदि आईजीआरयूए एविएशन स्कूल की परीक्षा में भाग लेना चाहती, तो उसे इंजीनियरिंग अकादमी में पढ़ने के मौके को त्यागना पड़ेगा। और मुश्किल की बात यह है कि आईजीआरयूए एविएशन स्कूल भारत में सिर्फ़ 30 विद्यार्थियों को भरती करेगा। इसलिए इस स्कूल में पढ़ सकती या नहीं निश्चित बात नहीं है। सौभाग्य की बात यह है कि एनी की एक ऐसी मां हैं, जो उस का समर्थन करती रहती है। हालांकि एनी की मां हाउसवाइफ़ हैं और उन्होंने प्राइमरी स्कूल की पढ़ाई भी पूरा नहीं की थी। फिर भी इस संदर्भ में मां ऐनी के साथ खड़ी होती हैं।

जब अन्य लोग छुट्टियों में बाहर खेलते और घूमते थे, तब एनी घर में मेहनत से पढ़ती थी और प्रवेश परीक्षा की तैयारी करती थी। वह दिन आ गया। परीक्षा लेने के लिए स्कूल जाने की रेल गाड़ी पर एनी बहुत उत्साहित हुई और चिंतित भी। पर्याप्त पैसे न होने की वजह से वह मां के साथ विमान पर नहीं सवार पायी और दो दिनों के लिए रेल गाड़ी पर गुजरा। भगवान हमेशा के लिए मेहनत व साहस लोगों पर ज्यादा ध्यान देते हैं। निसंदेह एनी आईजीआरयूए एविएशन स्कूल की एक छात्रा बन गयी। पूरे भारत में केवल 24 लोग इस स्कूल द्वारा दाखिला किये गये थे।

अब नयी समस्या आ गयी। इस स्कूल में पढ़ने के लिए बहुत महंगा फीस देने की आवश्यक्ता है। हर साल करीब 10 लाख रुपये का ट्यूशन फीस और हर महीने 2500 रूपये का आवास शुल्क देने की आवश्यक्ता है। इन के अलावा यूनिफ़ॉर्म का खर्चा 6000 रूपये भी है। एनी का परिवार समृद्ध नहीं है। घर के पाँच लोग सिर्फ़ पिता जी के सेवानिवृत्ति वेतन पर आधारित है। स्कूल का उपरोक्त फ़ीस एनी के परिवार के लिए बिलकुल अकल्पनीय है। चारों रिश्तेदारों व मित्रों से पैसे उधार लेने के बाद ही स्कूल के फ़ीस के लिए पर्याप्त पैसे नहीं जमाये गये थे। अंततः विवश होकर एनी को ऋण लेने का निर्णय लिया गया। एनी के पिता जी ने अपनी सेवानिवृत्त सैनिक की हैसियत से चारों ओर जाकर ऋण लेने की कोशिश की और अंततः ये पैसे मिल गये।

स्कूल जाने के बाद लड़की को पता चला कि आसपास के करीब सभी छात्र पुरुष हैं। वे या तो पायलट परिवार से आये हैं, या तो भारत के बड़े शहरों के अमीर वर्ग के बेटे हैं। जबकि सिर्फ़ वह ग्रामीण पृष्ठभूमि से है। यहां तक कि बोलना भी मुश्किल की बात बन गयी है। कारण यह है कि यहां के सभी लोग अच्छी अंग्रेज़ी बोलते हैं। जबकि एनी की जन्मभूमि में बहुत कम लोग अंग्रेज़ी बोलते हैं। उसे बहुत कम अंग्रेज़ी आती है और अंग्रेज़ी बोलते समय उस के उच्चारण में स्थानीय बोली का उच्चारण-चिह्न भी है। उस के सहपाठी अकसर उस की अंग्रेज़ी पर हंसी मज़ाक करते थे। इतना ही नहीं जब पहली बार वह विमान पर आयी, तो बिलकुल एक बच्ची की तरह विमान के बारे में कुछ भी जानकारी नहीं थी। उन के सहपाठियों की नजर में यह बड़ी अजीब की बात है कि वह कैसे इस स्कूल में भर्ती हो गयी। एनी को बहुत दुःख हुआ यहां तक कि घर वापस लौटने पर भी सोचा था। लेकिन उन्होंने घर के मां-बाप की उम्मीद और लोन की याद आयी, तो हंसी को अपना दबाव मानने का निर्णय लिया।

अंग्रेज़ी सीखने के लिए वह रोज तड़के उठाकर अंग्रेज़ी का अभ्यास करती थी और स्वेच्छा से अंग्रेज़ी से दोस्तों से बातचीत करती थी। विमान संरचना जानने के लिए क्लास में वह बहुत मेहनत से पढ़ती थी। जो समझने में नहीं आता, तो ज़रूर शिक्षकों से पूछती थी। क्लास के बाद जब अन्य लोग खेलते थे, वह उड़ान की वीडियो देखती थी।एक साल के बाद एनी ने फर्राटे से अंग्रेज़ी बोलने लगी। इतना ही नहीं सभी कॉर्सों में उसे श्रेष्ठ अंक भी मिला और स्कूल की छात्रवृत्ति भी हासिल की।

2006 में 19 वर्षीय एनी आईजीआरयूए एविएशन स्कूल से स्नातक हुई। उस ने भारत की सबसे श्रेष्ठ एयरलाइंस कंपनी में प्रवेश किया। वह भी पहली बार बड़े शहर मुम्बई आयी। केवल कई महीनों के बाद गुड पेशेवर ज्ञान और श्रेष्ठ ड्राइविंग तकनीक से उसे एयरलाइंस द्वारा स्पेन में प्रशिक्षण के लिए भेजा गया। वहां उस ने बोइंग 737 चलाना सीखा। बोइंग 737 चलाने के लिए कम से कम 2700 घंटों की उड़ान होने की आवश्यक्ता है और प्रशिक्षण का समय दो साल होता है। बड़ी मेहनत के बाद एनी अंततः विभिन्न स्तरीय जांच व परीक्षा पास की और स्वतंत्र रूप से बोइंग 737 चला सकती है। लेकिन यह लड़की और बड़े विमान यानी बोइंग 777 चलाना चाहती है।

एयरलाइंस कंपनी उस के निर्णय को नहीं समझ सकती। लोगों के विचार में यदि एनी बोइंग 737 चुनती, तो तीन चार सालों में कप्तान बन सकेगी। जबकि बोइंग 777 चलाने के लिए कम से कम दस साल की तैयारी होने की जरूरत है। लेकिन एक कहावत है सपना जितना बड़ा हो तो दुनिया उतना बड़ी होगी। 21 की उम्र में एनी ने लंदन में उच्च स्तरीय उड़ान प्रशिक्षण कक्षा को पूरा करने के बाद उस ने पहली बार बोइंग 777 की फ़्लाइंग की। एयरलाइंस कंपनी ने एनी से घरेलू फ़्राइड की फ्राइंग करने का सुझाव पेश किया। घरवासियों ने भी उसे यह समझाया। आम तौर पर घरेलू फ़्राइड और आरामदेह है। लेकिन एनी ने और मुश्किल वाली अंतर्राष्ट्रीय फ्लाइट की  उड़ान करने का विकल्प लिया।

अब एनी मुख्यतः अमेरिका जाने वाली फ्लाइट उड़ाती हैं। हर बार करीब दसों घंटों की ज़रूरत है। एनी को विश्वास है कि वह और बेहतर कर सकती है।“आई फ़्लाई” यह फ़ेसबुक पर एनी का अपना परिचय है। एनी ने सामान्य भारतीय लड़कियों से अलग जीवन चुना। उसका सपना है कि नीले आसमान से और नज़दीक हो सके। सीएनएन की न्यूज में उसे देखने तक किसी को भी यह विश्वास नहीं था कि वह सफल हो सकती है।

सीएनएन के साथ साक्षात्कार में एनी ने कहा कि चाहे तुम जो भी हो, जब तुम्हारे पास सपना है, तो जरूर मेहनत करो। हर एक व्यक्ति के जीवन में सफलता के साथ विफलताएं भी आती हैं। लेकिन हमें इन सफलताओं व विफलताओं से सीखकर अपने लक्ष्य की ओर दृढ़ता से कदम बढ़ाना चाहिए। पंखा पहले की अस्तित्व रहे हैं, तुम्हें सिर्फ़ पंख लहराने की आवश्यकता है।

आश्चर्य की बात यह है कि उड़ान के सिवाये एनी के पास बैचलर ऑफ एविएशन मैनेजमेंट और मास्टर ऑफ़ लॉ की डिग्री भी है। साथ ही वह एक श्रेष्ठ नृतक और कीबोर्ड प्लेयर भी है। एनी एक विमान कप्तान ही नहीं, उस का जीवन बहुत रंगीन है।

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