भारत का "स्वच्छतम शहर" है इंदौर

2018-07-04 11:22:45
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भारतीय फाइनेंशियल एक्सप्रेस से मिली खबर के मुताबिक, 16 मई को भारत सरकार ने 2018 स्वच्छता परिणाम जारी किया। भारत के कुल 4200 शहरों में इंदौर फिर एक बार पहले स्थान पर रहा, जो क्रमशः दो सालों में "स्वच्छतम शहर" का खिताब जीता।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में“सालाना स्वच्छता जांच”भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के“स्वच्छता अभियान”के आह्वान पर की गयी है, जिसका मकसद निगरानी प्रणाली और कचरे का पुनःइस्तेमाल करने का सुधार करना है, निजी मकानों और सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण करना, स्वास्थ्य स्थितियों का सुधार करना और नागरिकों की आदतों को बदलना है।

लेकिन इंदौर के नगरपालिका ने इस आधार पर और ऊंचा मापदंड बनाया। इस शहर ने ख़ास तौर पर पर्यावरण संरक्षण और सफ़ाई गतिविधि के लिए सिलसिलेवार गीतों की रचना की। जिन में एक《 स्वच्छता आदत है, स्वच्छता उत्सव है(Swachhta aadat hai, swachhta utsav hai)》नामक गीत कचरा गाड़ी से रोज़ प्रसारित किया जाता है। इस के अलावा इंदौर नगरपालिका की दफ्तर और स्थानीय सांसदों के हॉटलाइन रिंग टोन्स भी यह गीत है।

कचरा संग्रह के बारे में इंदौर सरकार ने स्थानीय 1000 स्ट्रीट स्वीपरों के साथ अनुबंध पर साक्षात्कार किया। अनुबंध के मुताबिक स्ट्रीट स्वीपरों को चौक, होटल और शॉपिंग मॉल के आसपास के कचरों का प्रारंभिक वर्गीकरण करने की जिम्मेदारी उठानी है। उनकी मदद से इंदौर सरकार ने कहा कि इस शहर में 100 प्रतिशत कचरे का वर्गीकरण किया गया है। साथ ही पिछले एक साल में इंदौर सरकार ने निजी वाहन चलाने वाले लोगों को मुफ्त रूप से 1000 कार एशबिन दिये और उन्हें मनमाने ढंग से गाड़ी से बाहर कचरा न फेंकने को प्रोत्साहित किया। फिर बाज़ार में इस तरह के कार एशबिन भी बेचे जाते हैं, जो हरेक एशबिन का दाम है 35 रूपये हैं।

सड़कों की साफ़ करने के लिए इंदौर शहर ने 60 जीप भेजी। ये जीप अपने प्रबंध के दायरे में गश्त लगाती हैं और इधर-उधर कूड़ा फेंकने और थूकने वाले लोगों की सज़ा देते हैं। इंदौर सरकार के अधिकारी भी खुद सड़कें जाकर यह काम भी करते हैं। मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक इंदौर की मेयर मलिनी गौड़(Malini Gaud)भी सड़क पर गाड़ी चलाते समय कभी कभार गाड़ी से उतर कर नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों पर जुर्माना लगाती हैं।

जबकि इंदौर शहर की सड़कों पर मनमानी से थूकने, कूड़ा-करकट फेंकने और कहीं भी पेशाब करने वाले लोगों पर न सिर्फ़ 250 से 500 रूपये का जुर्माना लगाया जाता है, उन के नाम भी स्थानीय अखबारों में छापे जाते हैं और रेडियो के जरिए प्रसारित किये जाते हैं। पिछले साल के दिसम्बर माह से इस नीति लागू की जाने लगी थी। इसकी चर्चा में मेयर ने कहा कि वे आशा करती हैं कि इस तरह के हथकंडे से अपभायी शक्ति पैदा होगी।

"स्वच्छतम शहर" बनने से पहले इंदौर में रात का बाजार बहुत लोकप्रिय था। रात्रि बाज़ार के कचरे से निपटना स्थानीय नगरपालिका की एक बड़ी समस्या है। पहले स्वच्छता कार्यकर्ता रात में काम नहीं करना चाहते थे। इसलिए इंदौर सरकार ने 2016 से 2017 के बीच 600 ऐसे स्वच्छता कार्यकर्ताओं को नौकरी से निकाला।

लेकिन इस कार्यवाई की कुछ भारतीय मीडिया ने आलोचना की। उनके मुताबिक इंदौर सरकार ने स्वच्छ भारत के लिए नीचे स्वच्छता कार्यकर्ताओं के अधिकारों को त्यागा है। लेकिन इंदौर के क्रमशः दो साल में "स्वच्छतम शहर" बनने के बाद भारतीय मीडिया में विरोध की आवाज़ ज्यादा से ज्यादा कम होने लगी है। भारत के मुम्बई स्थित प्रसिद्ध वेबसाइट रेडिफ़ वेबसाइट ने 2017 में “भारत को इंदौर से सीखना चाहिए”नामक एक लेख जारी कर इस शहर की सफलता का प्रसार किया।

गौरतलब है कि भारत में कुल 5 बार 2018 स्वच्छ जांच की गतिविधि आयोजित की गयी है। 2015 और 2016 में "स्वच्छतम शहर" का विजेता कर्नातक प्रदेश का मैसूर था। पिछले साल नयी दिल्ली सातवें स्थान पर था। जबकि अन्य एक बड़ा शहर मुम्बई 29वें स्थान पर रहा। इस साल "स्वच्छतम शहर" की रैकिंग जारी नहीं की गयी, लेकिन मुम्बई का उपनगर नवी मुम्बई ने ठोस कचरे के निपटारा में भारत में पहला स्थान जीता।

 

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