नये युग में चीन-भारत संबंध पर संगोष्ठी पेइचिंग में आयोजित

नये युग में चीन-भारत संबंध पर संगोष्ठी पेइचिंग में आयोजित
फान गू थिंक टैंक की शास्त्री केटी के उपप्रधान सदस्य, मुम्बई स्थित पूर्व चीनी जनरल काउंसिलर ल्यू योफा ने बताया कि चीन और भारत का पुनरुत्थान इतिहास में एकमात्र दो बड़े देशों का साथ साथ पुनरुत्थान है। दोनों देश विभिन्न विकास के दौर में रहे हैं। दोनों की रणनीति में समानता भी है। इसलिए दोनों को सामरिक प्रतिस्पर्द्धा पर नियंत्रण रखकर बचने की कोशिश करनी चाहिए। युन्नान वित्त और अर्थशास्त्र विश्वविद्यालय के हिन्द महासागर क्षेत्र के अनुसंधान केंद्र की उपप्रधान चू छ्वेईफिंग ने हिन्द महासागर के अध्ययन पर उसके केंद्र द्वारा मिली उपलब्धियों का परिचय दिया। फानगू थिंक टैंक के इंडियन अनुसंधान केंद्र के वरिष्ठ परामर्शक, चीनी सुधार, खुलेपन मंच के सामरिक अनुसंधान केंद्र के स्थायी उपप्रधान मा चाली ने कहा कि चीन-भारत संबंधों को आगे बढ़ाने में उच्च स्तरीय नेतृत्व बहुत महत्वपूर्ण है। भारत की छवि की रचना के लिए मीडिया को और सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। चीनी आधुनिक अंतर्राष्ट्रीय संबंध अनुसंधान संस्था के दक्षिण एशिया दक्षिण पूर्वी एशिया और ओशेनिया अनुसंधान संस्था के उपप्रधान वांग शीता ने भविष्य में एससीओ में भारत की भूमिका पर अपने विचार रखे। युन्नान समाज और विज्ञान अकादमी की भारतीय अनुसंधान संस्था के उप अनुसंधानकर्ता एन काओले ने माना कि दोनों देशों की मीडिया को परिवर्तन के अनुकूल में चीन-भारत संबंध के विकास में और महत्वपूर्ण रोल निभाना चाहिए। चीन-भारत सांस्कृतिक आदान प्रदान को मज़बूत करने के लिए यथार्थ से आगे बढ़कर आवाजाही को कारगर रूप से मज़बूत करना चाहिए।
2018 के 27 से 28 अप्रैल को चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वू हान में अनौपचारिक भेंटवार्ता की। यह वार्ता चीन-भारत संबंध के इतिहास में मील का पत्थर है। 9 जून को एससीओ शिखर सम्मेलन चीन के छिंगताओ में आयोजित होगा। मौके पर भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी फिर एक बार चीन की यात्रा करेंगे। यह इस बात का द्योतक है कि चीन-भारत संबंधों का विकास एक नये चार्टर में प्रवेश करेगा।