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नये युग में चीन-भारत संबंध पर संगोष्ठी पेइचिंग में आयोजित

2018-06-27 10:00:00
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नये युग में चीन-भारत संबंध पर संगोष्ठी पेइचिंग में आयोजित

नये युग में चीन-भारत संबंध पर संगोष्ठी पेइचिंग में आयोजित

वू हान में अनौपचारिक भेंटवार्ता की चर्चा में ल्वो ने कहा कि यह चीन और भारत के द्विपक्षीय संबंध इतिहास में मील का पत्थर वाली बात है। भेंटवार्ता की उपलब्धियों का सारांश पाँच शब्दों में किया जा सकता है, यानी“मित्रता、सहयोग、विकास、समन्वय、नियंत्रण”। उन्होंने कहा कि चीनी स्टेट काउंसिलर और विदेश मंत्री वांग यी ने चीन-भारत सीमांत समस्या के चीनी विशेष प्रतिनिधि का पद सँभाला है। दोनों पक्ष विशेष प्रतिनिधियों की भेंटवार्ता की प्रणाली के ज़रिये सीमांत समस्या का हल करने, आपसी विश्वास की स्थापना के लिए कदम उठाकर सीमांत क्षेत्र की शांति की रक्षा करने पर सहमत हैं। ल्वो ने कहा कि वू हान अनौपचारिक भेंटवार्ता के बाद दोनों देशों के नेताओं के बीच दोस्ती दोनों देशों की जनता की दोस्ती में बढ़ाई जाएगी। दोनों देशों के नेताओं की सहमति का कार्यान्वयन करना बहुत ज़रूरी है।

 संगोष्ठी में भाग लेने वाले विद्वानों ने राजदूत ल्वो च्याओह्वेई के भाषण पर अपने विचार भी प्रकट किये। फानगू थिंक टैंक के भारतीय अध्ययन केंद्र के वरिष्ठ सलाहकार, सछ्वान विश्वविद्यालय के चीनी दक्षिण एशियाई अनुसंधान केंद्र के प्रधान स्वन शीहाई ने कहा कि मानव साझे भाग्य वाले समुदाय की रचना करने के लिए पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंधों का विकास करना भी ज़रूरी है। उन्हें चीन-भारत संबंध के भविष्य के विकास पर पक्का विश्वास है। चीनी राज्य परिषद के विकास अध्ययन केंद्र की जातीय विकास अनुसंधान संस्था के प्रधान छांग पो ने कहा कि वू हाई अनौपचारिक भेंटवार्ता के बाद चीन और भारत ने सक्रिय रूप से विभिन्न उपलब्धियों को आगे बढ़ाया है। यह बहुत अच्छी परिस्थिति है। हमें इस अच्छी परिस्थिति को मूल्यवान समझना चाहिए। चीनी दक्षिण एशियाई संघ के अध्यक्ष, चीनी समाज, विज्ञान अकादमी की एशिया-प्रशांत और वैश्विक रणनीति अनुसंधान संस्था के प्रधान ली श्यांगयांग ने कहा कि चीन और भारत को द्विपक्षीय संबंधों का अच्छी तरह निपटारा करना चाहिए। युन्नान प्रांत के समाज और विज्ञान अकादमी के उपप्रधान छन लीच्वन ने नयी परिस्थिति में युन्नान प्रांत किस तरह चीन-भारत मित्रता, सहयोग को आगे बढ़ाने पर विचार विमर्श किया।

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