भारत की“सिलिकॉन वैली”बाढ़ का सामना

2018-06-13 08:00:00
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अनेक सालों से सूखी होने, नदियों के प्रदूषित होने और कारगर पानी भंडार न होने की वजह से भारत की “सिलिकॉन वैली”के नाम से मशहूर बैंगलोर शहर आजकल गंभीर बाढ़ का सामना कर रहा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि बैंगलोर कारगर कदम नहीं उठाता, तो यह विज्ञान और तकनीक का शहर 2025 में मानव जाति के रहने लायक नहीं रहेगा।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत के कर्नाटक की राजधानी बैंगलोर में पेय जल के अभाव में 1 करोड़ नागरिकों में आधे से ज्यादा लोगों को कुंए और पानावाले ट्रकों पर निर्भर रहना पड़ता है। कई वर्षों के सूखे से बैंगलोर के भूजल स्तर में निरंतर गिरावट आती रही। कुंए खोदने के लिए और मुश्किल हो रही है। 30 वर्षीय स्थानीय नागरिक नागराज ने पत्रकार से कहा कि उसके स्थल में पानी का गंभीर अभाव है। उसकी कल्पना नहीं है कि भविष्य में कहां जाकर पानी ढूंढेगा। चाहे हम 457.2 मीटर की गहराई तक खोदते रहें, तो फिर भी पानी की खोज नहीं की जा सकती।

नाग राज बैंगलोर शहर के सब से बड़े तालाब बेलेटोर तालाब के पास रहते हैं। अनेक नागरिकों की नज़र में इस शहर में कई तालाब होते थे, लेकिन भारत में आउट सोर्सिंग उद्योग के विकसित होने से ऊंची इमारतों और उद्योग उद्यानों की संख्या दिनों दिन बढ़ती गई। कई तालाबों को मिट्टी से भरा गया है, अन्य कुछ तालाब गंभीर रूप से प्रदूषित हो चुके हैं, जिनमें बेलेटोर तालाब शामिल है।

 इस साल 19 जनवरी को बैंगलोर शहर में एक अजीब अग्नि दुर्घटना हुई। बेलेटोर तालाब क्षेत्र में अचानक आग लगी और पूरे एक दिन तक लगातार जलती रही। प्रारंभिक जांच के मुताबिक आसपास के कारखानों और नागरिकों द्वारा अकसर तालाब में प्रदूषित पानी डालने से तालाब के पानी आसानी से आग लग सकती है।

भारतीय पारिस्थितिकी विशेषज्ञ राम चंद्र ने यह माना कि अनुचित निपटारा फार्मूला बैंगलोर शहर में पानी के अभाव का मुख्य कारण है। यदि स्थानीय लोग कारगर रूप से वर्षा के पानी को जमा कर सकते, तो बैंगलोर की वार्षिक वर्षा मात्रा बिलकुल स्थानीय नागरिकों की मांग को पूरा कर सकती है।

 कई भारतीय विशेषज्ञों ने संदेह जताया कि भारत सरकार के पेय जल की उच्च भत्ते वाली परियोजना से अनेक नागरिक पानी की किफ़ायत करने की विचारधारा को खोते हैं। कर्नाटक विज्ञान और तकनीक कमेटी के सदस्य ए आर शिवकुमार ने ध्यान दिया कि बैंगलोर में 1000 बोतलों के साफ पानी के लिए लोगों को सिर्फ़ 6 रूपये देने की आवश्यक्ता है। वहां पानी की किफायत की प्रेरणा प्रणाली का अभाव है।

शिवकुमार ने अपने घर में वर्षा के पानी को रखने के एक यंत्र की डिज़ाइन और यंत्र को अपने घर में बनाया। उनके मुताबिक इकट्ठे हुए वर्षा का पानी पूरे परिवार के प्रयोग के लिए पर्याप्त है। पिछले 23 वर्षों में उन्होंने पेय जल कभी नहीं खरीदा था।

बैंगलोर नगर पालिका ने उनके यंत्र के प्रति रुचि दिखायी और नयी बनी इमारतों में वर्षा के पानी को रखने के यंत्र का निर्माण करने की मांग की।


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