आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नौकरी छीनता है या रोजगार के मौका देता है

2018-04-06 18:56:39
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नौकरी छीनता है या रोजगार के मौका देता है

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नौकरी छीनता है या रोजगार के मौका देता है

बीते हुए 2017 को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विकास का अहम साल माना जाता है। अलफ़ागो  मानव जाति को पराजित कर गो का विश्व चैम्पियन बना, मानवरहित सुपरमार्केट खुला, मानवरहित कार सड़कों पर चलने लगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस दैनिक जीवन में न्यूज का मुख्य विषय बन चुका है। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सचमुच रूप से लोगों के दैनिक जीवन में प्रवेश आने के लिए लम्बे रास्ते की जरूरत है।

क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मानव जाति की जगह ले सकता है। इस पर बहस कुछ समय तक चल चुकी है। चीन के क्वांग चो शहर के तोंग ग्वान में स्थित सोंगशानहू छांगयिंग प्रेसिजन प्रौद्योगिकी कंपनी लिमिटेड मोबाइल फोन बेचने वाली एक उद्यमी है। पहले इस कंपनी के सामान्य प्रचलन के लिए 650 कर्मचारियों की आवश्यक्ता थी। लेकिन अब 60 रोबोट दिन रात 10 उत्पादन लाईनों पर मेहनत से काम करते हैं। अब इस कंपनी में सिर्फ़ 60 कर्मचारी हैं, जिन में 3 लोग उत्पादन लाईन की जांच और निगरानी करते हैं, बाकी लोग कंप्यूटर नियंत्रण सिस्टम की देखभाल करते हैं। कुछ समय से पहले इस कंपनी ने मशीन से 90 प्रतिशत के मज़दूरों की जगह ली, जिससे उत्पादन क्षमता 250 प्रतिशत बढ़ गयी है। 

कंपनी के जनरल मैनेजर रो वेईछांग ने कहा कि भविष्य में मज़दूरों की संख्या में और कटौती आ सकेगी, जो 20 तक कम दी जाएगी। कार्य कुशलता में सुधार करने का परिणाम है मानव जाति नौकरी खोती है। मैकिन्से परामर्श कंपनी ने अनुमान लगाया कि 2030 तक विश्व में 80 करोड़ नौकरी स्वच्छा से गायब हो सकेंगे। 10 साल के बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमारे हरेक व्यवसाय व काम में शामिल हो जाएगी और हमारे काम करने के तरीकों को बदलेगी। वॉल स्ट्रीट के कर्मचारी, सुरक्षा रक्षक, ड्राइवर और अनुवादक संभवतः गायब हो सकेंगे। प्रसिद्ध साइटिस्ट स्टीफ़न हॉकिंग ने कहा कि मनुष्य यह नहीं जानता है कि हम हमेशा के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से मदद पा सकेगा या आर्टिफिशियल मानव जाति को नष्ट कर सकता है। हमें  चिंता है कि मशीन मनुष्य की जगह ले लेंगे और करोड़ों नौकरियां खा जाएंगे। हॉकिंग ने कहा कि मनुष्य को हमारे भविष्य और हमारे वातावरण के हित में हरसंभव प्रयास करना चाहिए।

 27 वर्षीय देवित वेई पेइचिंग की एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी में कार्यरत है, जो एक प्रोग्रामर है। उन्हें आकर्षित करने के लिए कंपनी ने उन्हें 4 लाख चीनी युआन का वार्षिक सेलरी दी। लेकिन इस कंपनी में 8 महीनों के बाद कंपनी को छोड़ने का निर्णय लिया। उन के मुताबिक, उन के मित्र ने उन्हें वहां एक साल के लिए काम करने की सलाह दी। इस से उन का बायोडाटा और प्रचुर होगा। देवित वेई हार्पिन औद्योगिक विश्वविद्यालय के अनुप्रयुक्त गणित विभाग से स्नातक थे, जिन के पास स्नातक उपाधि है। 2017 से अभी तक कम से कम 10 कंपनियों ने उन्हें आमंत्रित करने की बात कही और हरेक कंपनी ने अच्छा सेलरी देने का वायदा दिया है।

हांगकांग की अख़बार नानह्वा जाओपाओ की रिपोर्ट के अनुसार हाल में दुनिया में सिर्फ़ करीब 3 लाख लोगों के पास ड्राइवरहीन कार से पारिवारिक रोबोट की आवश्यक्ता में समुन्नत कंप्यूटर विज्ञान तकनीक उपलब्ध है। वेई उन में से एक है। प्रतिभा बाजार में उन की बड़ी आवश्यक्ता से यह साबित हुआ है कि आजकल समाज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सुयोग्य व्यक्तियों का बड़ा अभाव है।

तेनसंत अनुसंधान संस्था की एक रिपोर्ट में कहा गया कि विश्व में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रतिभाओं की मांग बहुत बड़ी है। लोग चिंतित हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भविष्य में मानव जाति के काम को छीनेगा, जिस से ज्यादा से ज्यादा लोग बेरोजगार हो सकेंगे। लेकिन यह विडंबना की बात यह है कि सभी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साकार करने के लिए अनेक मानव संसाधन की जरूरत है।

ब्रिटिश रायटर की रिपोर्ट के अनुसार हाल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बुनियादी विकास और कारोबारों के प्रारंभिक लेआउड के तौर में रहा है। तकनीक के विकास के साथ साथ चीन में ज्यादा से ज्यादा कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संबंधित व्यवसाय में शामिल करने लगी हैं, जिस से बड़े पैमाने वाले प्रतिभाओं की आवश्यक्ता है।

वैश्विक सोशल मंच लिंक्डइन के आंकड़े बताते हैं कि 2017 के मार्च तक विश्व में 19 लाख से ज्यादा तकनीक विद्वान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में काम करते हैं। इस क्षेत्र में अमेरिका में प्रतिभाओं की संख्या पहले स्थान पर रही, जबकि चीन, औस्ट्रेलिया और फ़्रांस में प्रतिभाओं की संख्या बराबर है, जो सातवें स्थान पर रही।

लिंक्डइन रिख्रूतमेंत वेबसाइट पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस संबंधी 10 पदों में 9 पद खाली है। लिंक्डइन के चीनी उप निदेशक वांग ती ने कहा कि स्मार्ट चिप और प्रोग्राम लेखन संबंधी प्रतिभाओं का गर्मागर्म स्वागत है। ऐसी स्थिति बहुत लम्बे समय के लिए चलेगी।  चीनी उद्योग व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के शिक्षा परीक्षा केंद्र के उप प्रधान चो मिंगजंग ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में प्रतिभाओं की मांग आगामी कई सालों में 50 लाख तक बढ़ने की संभावना है।

प्रतिभाओं का अभाव चीन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सपने को साकार करने का सब से बड़ी बाधा होगी। संबंधित तकनीक व्यक्तियों को प्रशिक्षित करना एक धीमी प्रक्रिया है। अब चीन विदेशों में प्रयोगशालाओं की स्थापना कर संबंधित अनुसंधानकर्ताओं को आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है। तेंसंत कंपनी ने पिछले साल के मई माह में अमेरिका के वाशिन्टन स्टेट के सिएटल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रयोगशाला खोली। अलीबाबा ने गत वर्ष के अक्तूबर माह में यह वचन दिया कि आगामी तीन सालों में वह 15 अरब अमेरिकी डॉलर की पूंजी देकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का अनुसंधान व विकास करेगी और दुनिया में 7 प्रयोगशाला खोलेगी।

हाल में चीनी उद्यमियां अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी से अनेक प्रतिभाओं को आकर्षित करने की कोशिश कर रही हैं। श्रेष्ठ वैज्ञानिकों ने चीन जाकर काम करने का विकल्प लिया, चूंकि चीन में उन्हें अपेक्षाकृत ऊंचे सेलरी हासिल कर सकेंगे।

आंकड़े बताते हैं कि 2017 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में स्नातकों का बड़ा स्वागत किया जाता था। उद्यमी उन्हें करीब 3 से 5 लाख चीनी युआन का वार्षिक सेलरी दे सकती हैं, जो स्नातकों के औसत वार्षिक सैलरी की तुलना में 110 प्रतिशत ज्यादा होती है।

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