चीनी गांठ

2018-02-21 10:00:00
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चीनी गांठ चीन में विशिष्ट लोक हस्त बुनाई का आभूषण है। चीन के पांच हज़ार सालों के लम्बे इतिहास में चीनी गांठ कभी अक्षर की भूमिका भी निभाती थी। और कला व सौंदर्य बोध के क्षेत्र में इस का महत्वपूर्ण स्थान भी है।

चीनी गांठ की बुनाई आदि काल से शुरू हुई थी। उस काल में लिपि का आविष्कार नहीं हुआ था। कुछ घटनाओं की याद रखने के लिए लोग एक रस्सी पर विभिन्न गांठ बांधते थे। बड़े कांडों के लिए बड़ी गांठ, छोटी बातों के लिए छोटी गांठ बांधी जाती थी। यह“रस्सी की गांठ बांधने से घटनाओं की याद रखने”की प्रथा थी।

चीनी गांठ शुरू से अब तक मानव के लम्बे इतिहास के साथ साथ विकसित होती जा रही है, जिसके दौरान सांस्कृतिक विकास के चलते चीनी गांठ में चीनी राष्ट्र का विशिष्ट व समृद्ध सांस्कृतिक सारतत्व गर्भित हुआ है। चीनी भाषा में अक्षर“शङ (रस्सी)”व“शन (देवता)”के उच्चारण मिलते जुलते है। चूंकि रस्सी की आकृति कुंडली मार कर बैठे ड्रैगन की तरह है, इसलिए चीनी संस्कृति के विकास के आरंभिक काल में लोग रस्सी की पूजा करते थे। और चीनी लोग अपने को ड्रैगन के संतान मानते हैं। प्रागेतिहासिक काल में ड्रैगन देवता की छवि रस्सी पर बंधी गांठों के परिवर्तित रूप में प्रतिबिंबित होती थी। चीनी भाषा में“च्येई(गांठ)”भी शक्ति एवं सामंजस्य का प्रतीक करने वाला एक भावोद्रेक अक्षर है, जिससे लोगों को मेलमिलाप, आत्मीयता व स्नेह-स्निग्ध का एहसास मिलता है। चीनी भाषा में शब्द“च्येई (गांठ)”व“जी (शुभ)”के उच्चारण भी मिलते जुलते हैं।“जी”में विविध अर्थ निहित है। मंगल, यश, दीर्घआयु, खुशहाली, संपत्ति, शांति व स्वास्थ्य सभी“जी” के दायरे में आते हैं। चीनी गांठ में सुन्दर आकृति व आकर्षक रंग होने के साथ चीनी प्राचीन सांस्कृतिक विश्वास और लोगों द्वारा सच्चाई, करूणा व सौंदर्य खोजने की अभिलाषा भी प्रतिबिंबित होती है। इसलिए इस लोक शिल्प कला की लम्बी जीवन शक्ति भी बनी रहती है।

बाद में चीनी गांठ ज्यादातर कपड़ों व आभूषणों में इस्तेमाल की जाती थी, फिर धीरे धीरे व्यवहारिक उपयोग से सजावटी काम में बदल गयी और अंततः मुहुर्त, खुशहाली व सौभाग्य का प्रतीक बन गयी। छिंग राजवंश में चीनी गांठ की विविध शैलियां संपन्न हुई थीं। गांठ के स्वरूप में सजावट की क्षमता की जगह कलात्मक क्षमता ने ले ली थी। चीनी गांठ का विकास अत्यन्त ऊंचे स्तर पर पहुंचा था।

चीनी गांठ की मुख्य सामग्री धागे हैं। धागों की किस्में नाना प्रकार की हैं, रेशमी धागे, सूती तंतु, सन के धागे, नाइलोन के धागे और संश्लिष्ट धागे आदि बुनाई के काम में इस्तेमाल किए जा सकते हैं। बुनाई की सब से बड़ी विशेषता है कि हरेक गांठ शुरू से अंत तक मात्र एक रस्सी से बुनी जाती है। हरेक गांठ बुनने का अपना अपना नियम भी होता है। हरेक गांठ का नामकरण उस की आकृति व उद्देश्य से किया जाता है।

धागे चुनने में रंगों के संयोजन पर बड़ा ध्यान दिया जाता है। प्राचीन जेड वस्तुओं के लिए आभूषण की गांठ बुनने के लिए कॉफ़ी व गहन हरा जैसे रंग के धागे चुने जाने चाहिए जिससे प्राचीन जेड की कुलीनता बढ़ जाएगी। जबकि कुछ सरल या गहरे रंग वाली वस्तुओं के लिए आभूषण की गांठ बुनने में थोड़े से सुनहरे, रुपहले या चटक लाल रंग वाले पतले धागों का इस्तेमाल करने से समूची वस्तु की सुन्दरता बढ़ जाएगी और चमकीली होगी।

धागे के अलावा आम तौर पर एक गांठ में कुछ गोलाकार या लम्बोतरी मोतियां या पत्थर जड़ित होते हैं। लटकाव के लिए विभिन्न जेड के पत्थर, सोने, चांदी, चीनी मिट्टी व एनैमल आदि के आभूषणों का प्रयोग किया जाता है। तरह तरह के धागों से विविध रूपों की चीनी गांठ बुनी जा सकती है।

संक्षेप में कहिए, तो चीनी गांठ में प्रगाढ़ राष्ट्रीय व स्थानीय विशेषता संजोए हुई है। इस का बाहरी आकार अत्यन्त खूबसूरत और सौम्यता से भरा है, जिससे आदि काल का रहस्य प्रतिबिंबित होने के साथ चीनी लोगों की बुद्धिमता भी अभिव्यक्त हुई है। इसी वजह से त्योहार व मुहुर्त के समय चीनी गांठ अक्सर सजावट के रूप में घर में टांगी जाती है, या उपहार के रूप में रिश्तेदारों या मित्रों को भेंट की जाती है। चीनी गांठ की सुन्दर आकृति व प्राचीनतत्व अमनचैन व शुभ माहौल बना सकती है। 

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