चीन-भारत के इंटरनेट क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग

2018-01-03 09:00:00
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चीन-भारत के इंटरनेट क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग

चीन-भारत के इंटरनेट क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग

भारतीय इंटरनेट डेटा ट्रैक्सन के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2016 से नवंबर 2017 तक चीनी कंपनियों ने कुल 2 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का निवेश किया। यह मात्रा पिछले दस साल में भारत में कुल चीनी पूंजी निवेश से भी अधिक है। जबकि इसमें भारत में चीनी इंटरनेट कंपनियों ने सबसे अधिक निवेश किया है। पूंजी निवेश मुख्यतः मोबाइल व्यवसाय, ई-कॉमर्स, मोबाइल भुगतान और शेयरिंग कार आदि क्षेत्रों में केंद्रित है।

2017 की तीसरी तिमाही में चीन का मी फ़ोन पहली बार सैमसंग और एप्पल आदि परम्परागत तकनीक दिग्गजों को पछाड़कर भारत में पहले स्थान पर आ गया। मी फ़ोन ने अपनी सस्ती कीमत, अच्छी गुणवत्ता की श्रेष्ठता से परिपक्व सप्लाई चेन सिस्टम और स्थानीय बिक्री के सहारे भारी उपलब्धियां हासिल कीं। मी फ़ोन के अलावा चीन का विवो, ओपो, ह्वावेई और लेनोवो फ़ोन भी भारतीयों के पसंदीदा मोबाइल फ़ोन ब्रांड हैं। 2016 की चौथी तिमाही में भारतीय स्मार्ट फ़ोन की बिक्री के मामले में पहले पांच सेलफ़ोन ब्रांडों में चार ब्रांड चीनी कंपनियों के फ़ोन हैं, जो एक रिकॉर्ड है।

भारतीय ई-कॉमर्स के क्षेत्र में चीनी कारोबारों ने भी बड़ी मेहनत की। भारत के चार बड़े ई-कॉमर्स दिग्गजों में तीन को चीनी निवेशकों का समर्थन हासिल है। इनमें पहले स्थान पर रहा फ़्लिपकार्ट, जिसे भारत का जिंगडोंग माना जाता है, जिसमें टेनसंट कंपनी ने निवेश किया है। तीसरे स्थान पर पेटीएम मॉल, जो अलीबाबा का सहायक भारतीय टी-मॉल है। जबकि चौथे स्थान पर रहे स्नेपडील को भी अलीबाबा का निवेश मिला है। इन ई-कॉमर्स कंपनियों को न केवल चीन से पूंजी मिली है, बल्कि चीनी ई-कॉमर्स व्यवसाय का प्रचालन व विकास के अनुभव और तकनीकी सहयोग भी हासिल हुआ है।

मोबाइल भुगतान के क्षेत्र में अलीबाबा और एंट फ़ाइनेंशलके संयुक्त पूंजी निवेश वाला पेटीएम भारतीयों के मन में“अलीपेई”बन चुका है। हाल में वह भारतीय बाजार में पहले स्थान पर रहा। भारत में पेटीएम का प्रसार करते समय भारत सरकार ने कैशलैस समाज का निर्माण करने का लक्ष्य पेश किया, इसलिए इसका तेज़ी से विस्तार हुआ। भारत में रहने वाले चीनियों को अहसास हुआ कि पेटीएम का प्रतिनिधित्व करने वाले मोबाइल भुगतान के बढ़ने से भारत मोबाइल भुगतान के क्षेत्र में अन्य विकासशील देशों से आगे निकल चुका है। यहां तक कि परंपरागत विकसित यूरोप से भी आगे। आंकड़ों के मुताबिक 2017 में भारत में मोबाइल भुगतान का फैलाव 8 प्रतिशत से अधिक रहा।


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