चीन व भारत के इंटरनेट उद्यमियों के सहयोग में साझी जीत

2017-12-28 09:20:00
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चीन व भारत के इंटरनेट उद्यमियों के सहयोग में साझी जीत

चीन व भारत के इंटरनेट उद्यमियों के सहयोग में साझी जीत

इस साल के अगस्त माह में चीनी विद्वान वंग शछ्याओ भारत के एक व्यापारी अकादमी में पढ़ने के लिए गये। उन्होंने चीन व भारत के इंटरनेट उद्यमियों के सहयोग पर अध्ययन करके एक लेख लिखा। लेख में यह लिखा हैः

हर एक बार मैं सहपाठियों के साथ व्यापार सपने की चर्चा करता, तो भारतीय सहपाठी उनका मज़ाक कर प्रोत्साहित करते थेः तुम अवश्य ही दूसरे मा युन बन सकोगे।

यह सचमुच एक बड़ा मज़ाक था लेकिन इसने एक निर्विवाद तथ्य भी बताया है। अलीबाबा के संस्थापक मा युन और मी फ़ोन के संस्थापक लेई च्वन भारतीय युवाओं के आदर्श बन चुके हैं। कई भारतीय युवाओं ने मा युन की  स्टीव जॉब्स और बेजोस के साथ तुलना की है।

भारतीय इंटरनेट डेटा ट्रैक्सन  के आंकड़े बताते हैं कि 2016 के जनवरी से 2017 के नवम्बर माह तक भारत में चीनी उद्यमियों के पूंजी निवेश की कुल रकम 2 अरब अमेरिकी डॉलर को पार कर गयी। यह मात्रा पिछले10 साल में भारत में कुल चीनी पूंजी निवेश से भी ज़्यादा है। जबकि इसमें भारत में चीनी इंटरनेट उद्यमियों का निवेश सबसे ज़्यादा है। पूंजी निवेश मुख्यतः मोबाइल व्यवसाय, ई-कॉमर्स, मोबाइल भुगतान और शेयर यात्री आदि क्षेत्रों में केंद्रित हैं।

2017 की तीसरी तिमाही में चीन के मी फ़ोन पहली बार सैमसंग और एपल आदि परम्परागत वैज्ञानिक व तकनीक दिग्गजों को पछाड़कर भारत में बिक्री के पहले स्थान पर आया। मी फ़ोन ने अपनी सस्ते दाम, अच्छी गुणवत्ता की श्रेष्ठता से परिपक्व सप्लाई चेन सिस्टम और स्थानीय बिक्री के सहारे भारी उपलब्धियां हासिल कीं। मी फ़ोन के अलावा चीन का विवो, ओपो, ह्वावेई और लेनोवो फ़ोन भी भारतीयों के पसंदीदा मोबाइल फ़ोन ब्रांड हैं। 2016 की चौथी तिमाही में भारतीय स्मार्ट फ़ोन की बाजार बिक्री के पहले पांच सेलफ़ोन ब्रांडों में चार ब्रांड चीनी कंपनियों के फ़ोन हैं, जो इतिहास में एक रिकॉर्ड है।

भारतीय ई-कॉर्मस के क्षेत्र में चीनी कारोबारों ने भी बड़ी मेहनत की। भारत के पहले चार ई-कॉर्मस दिग्गजों में तीन के पीछे चीनी निवेशकों का समर्थन है। जिनमें पहले स्थान पर रहा फ़्लिपकार्ट जिसे भारतीय जिंगडोंग माना जाता है, जिसमें टेनसंट कंपनी ने निवेश किया है। तीसरे स्थान पर पेइटीएम मॉल अलीबाबा की सहायक भारतीय टी-मॉल है। जबकि चौथे स्थान पर रहे स्नेपडील  को भी अलीबाबा का निवेश मिला है। इन ई-कॉमर्स कंपनियों को न केवल चीन से पूंजी मिली है, बल्कि चीनी ई-कॉमर्स व्यवसाय का प्रचालन व विकास के अनुभव और तकनीक समर्थन भी मिला है।

मोबाइल भुगतान के क्षेत्र में अलीबाबा और एंट फ़ाइनेशल द्वारा संयुक्त रूप से पूंजी देने वाला पेटीएम पहले ही भारतीय उपभोक्ताओं के मन में“अलीपेई”बन चुका है। हाल में भारतीय बाजार में उसका वह पहले स्थान पर रहा है। भारत में पेटीएम का प्रसार करते समय भारत सरकार ने कैशलैस समाज का निर्माण करने का लक्ष्य पेश किया, इसलिए इसका तेज़ी से विस्तार हुआ। भारत में रहने वाले चीनियों को एहसास हुआ कि पेटीएम का प्रतिनिधित्व करने वाले मोबाइल भुगतान के बढ़ने से भारत मोबाइल भुगतान के क्षेत्र में अन्य विकासशील देशों के आगे चला है और परम्परागत विकसित यूरोप के आगे भी चला है। आंकड़ों के मुताबिक 2017 में भारत में मोबाइल भुगतान का फैलाव 8 प्रतिशत के क्षेत्र को पार कर चुका है।

उपरोक्त गर्म क्षेत्रों के सिवाए, दीदी टैक्सी ने भारत की शेयरिंग कार की दिग्गज कंपनी ओला में निवेश किया और सीट्रिप ने भारतीय ऑनलाइन दिग्गज मेक माई ट्रिप में पूंजी निवेश किया। साथ ही चीनी इंटरनेट दिग्गजों ने भारत के ऑनलाइन शिक्षा, इंटरनेट वित्त और नयी मीडिया आदि क्षेत्रों में भी प्रवेश किया। कई पूंजी निवेश हासिल करने वाले भारतीय कारोबार जल्द ही व्यवसाय में नंबर वन बन चुके हैं।

चीन के पूंजी निवेश से साझी जीत मिली

भारतीय इंटरनेट उद्योग के सबसे बड़े पूंजी निवेशक देशों में से एक होने के नाते, भारत में चीनी इंटरनेट उद्यमियों का पूंजी निवेश न सिर्फ़ आर्थिक क्षेत्र में प्रतिबिंब है, बल्कि भारतीय कानून सिस्टम के परिपूर्ण ढांचे को भी आगे बढ़ाया है। अलीबाबा के निवेश वाले पेटीएम के ओतप्रोत विकास ने 2017 में प्रबल रूप से भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काले धन पर प्रहार करने और कैशलैस समाज के निर्माण की गतिविधि का समर्थन किया है। और ज़्यादा विदेशी पूंजी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए भारत सरकार ने 2017 के अगस्त माह में नयी नीति जारी की और विदेशी कारोबारों को शत प्रतिशत भारतीय सृजन कंपनियों का शेयर होल्डर बनने को अनुमति दी। जिससे विज्ञान व तकनीक के पूंजी निवेश की सख़्त शर्तों में शैथिल्य आया और चीनी इंटरनेट उद्यमियों के भारत में निवेश के लिए और ज़्यादा मौके मिले हैं।

सिलिकॉन वैली के अमेरिकी दिग्गज अपने फ़ार्मूले से शाखा कंपनियां स्थापित कर भारतीय बाजार में प्रवेश करते हैं। इसके विपरीत भारत में पूंजी करते समय चीनी इंटरनेट उद्यमी आम तौर पर शेयरों पर नियंत्रित करने के बजाए शेयरों में करने के तरीके का उपयोग करती हैं और सहयोग से साझी जीत पाती हैं।

चीन का यह निवेश देने का फ़ार्मूला अमेरिकी उद्यमों से बिलकुल अलग है। अब भारतीय इंटरनेट बाज़ार में चीनी इंटरनेट उद्यमियों के निवेश देने वाले भारतीय जातीय कारोबारों और भारत जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय दिग्गजों के बीच घमासान प्रतिस्पर्द्धा होने की स्थिति नज़र आती है,जो विश्व में अभूतपूर्व है।

टैक्सी में ऊबर दीदी टैक्सी और टेनसेंट कंपनी के संयुक्त निवेश वाले ओला से कड़ी प्रतिस्पर्धा कर रहा है। ई-कॉमर्स क्षेत्र में अमेजन और अलीबाबा के निवेश पेटीएम मॉल व स्नेपडील और टेनसेंट के निवेश वाले फ़्लिपकार्ट ने 11 नवम्बर को भारतीय शॉपिंग उत्सव में भी लड़ाई की। कई साल पहले भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि भारत में गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसे इंटरनेट दिग्गज नहीं उभरे। जबकि आज चीनी साझेदारी की मदद में कई भारतीय स्थानीय इंटरनेट दिग्गज धीरे धीरे उभर रहे हैं।

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