चोंग साम और पारंपरिक चीनी वेश-भूषण

2017-10-12 10:22:22
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चोंग साम और पारंपरिक चीनी वेश-भूषण

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चोंग साम की उत्पत्ति छिंग राजवंश में मानचू जाति के महिला वस्त्रों से हुई और चीनी पारंपरिक परिधान संस्कृति का आदर्श मॉडल माना जाता रहा है। वह समग्र स्टाइल में चीनी संस्कृति की मेल एकता की विशेषता के अनुरूप ही नहीं, साथ ही उस की आभूषण तकनीक में भी पूर्व की खास विशिष्टता की झलक मिलती है। इस के अलावा चोंग साम नारी को सुडौल व छरहरा दिखाने में सहायक भी होता है, ऊंची एड़ी वाले जूते के साथ नारी के दैहिक भार का केन्द्र ऊंचा उठा सकता है जिस से पूर्व की स्त्रियों की सुशीलता, भद्रता और शिष्टता की छवि दृष्टिगोचर होती है। अतएव चोंग साम चीनी परिधान में अतूल्य पहचान बनाकर लम्बे अरसे से लोकप्रिय रहा है।

चोंग साम और पारंपरिक चीनी वेश-भूषण

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चीन के परंपरागत पुरूष पोशाकों में लम्बा चोगा और मानचुरिन जाकेट प्रतीकात्मक है, दोनों मानचु जाति के पोशाक है। उन का कालर गोलाकार और बांह संकरी है। मानचुरिन जाकेट के बटन वस्त्र के अग्र आंचल पर ऊपर से नीचे तक बीचोंबीच टंकते है और अधिकांश जाकेटों की बांहें अश्वखुर नुमा हैं, जबकि लम्बा चोगा बगल के दाईं पक्ष में टांके बटन से खोला जाता है। मानचुरिन जाकेट और चोगा को बीच में जोड़ कर पहनने का तरीका भी मिलता है, इस प्रकार के पहनाव में चोगे का सिर्फ निचला आधा भाग होता है और उसे कमर में जाकेट के निचले आंचल के साथ जोड़ा जाता है। लम्बा चोगा और मानचुरिन जाकेट पहनने में सभ्यता और सादगी और सहजता का अहसास देता है और सुविधापूर्ण भी होता है।

चोंग साम और पारंपरिक चीनी वेश-भूषण

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सन् 2001 में एपेक शिखर सम्मेलन के दौरान सभा में उपस्थित सभी राज्याध्क्ष चीनी स्टाइल के “थांग पोशाक ” पहने मंच पर आए थे। इस से “थांग पोशाक ”पहनने का फैशन चला। इसलिए “थांग पोशाक ” को चीनी स्टाइल वेशभूषण का प्रतिनिधि माना गया है क्योंकि विदेशों में बसे चीनियों की बस्ती चाइना टाउन कहलाती है। यह स्वाभाविक है कि चाइना टाउन के चीनियों के पोशाक को “थांग पोशाक ” का नाम दिया गया। वर्तमान में प्रचलित “थांग पोशाक ” वास्तव में छिंग राजवंश के मानचुरीन जाकेट से रूपांतरित कर बनाया गया है। उस के स्टाइल की चार विशेषताएं हैं:एक, उस का कालर सीधा खड़ा हुआ है, बटन जाकेट के अग्र भाग में बीचोंबीच टांके हुए हैं; दो, आस्तीन और जाकेट के बीच सीवन नहीं है, एक समूचे कपड़े पर कतरन हुआ है;तीन, जाकेट के बटन अग्र भाग के बीचोंबीच या बगल के पक्ष में टांके है और चार, बटन समकोण है। कपड़े की सामग्री प्रायः रेशमी और ब्रोकेड की होती है।

चोंग साम और पारंपरिक चीनी वेश-भूषण

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और चीन के विभिन्न स्थानों और विभिन्न जातियों के वेशभूषण की अपनी अपनी पहचान और विशेषता होती है। उदाहरणार्थ, पेटी मध्य चीन और शैनशी प्रांत के उत्तरी भाग में प्रचलित एक परंपरागत वस्त्र है। पेटी रूप में वेस्ट का अग्र भाग जैसा है उस का एक लेस गर्दन पर बांधा जाता है और बीच में दो लेस कमर में पीछे से बांधे जाते हैं। उस के पहनने से बच्चों को सर्दी लगने से रोका जा सकता है और गर्मियों के दिन उसे पहने बच्चे बाहर खेलने विचरने में चंचल और प्यारा भी दिखते हैं। बच्चों के पेटी पर प्रायः बाघ का सिर नुमा चित्र या “पांच विषैला जंतु ”के चित्र काढे गए हैं, जिसमें बच्चों के स्वस्थ परवान चढ़ने के लिए बड़ों का मनोरथ निहित है। और चीन की एक अल्पसंख्यक जाति ई जाति के वस्त्र को लीजिए, उस की अपनी ठेठ अलग पहचान होती है। इस जाति की महिलाओं के शीर्ष आभूषण तीन टाइपों में हैं जिन में सिर पर बांधने वाला पगडी जैसा अलंकृत ब्रोकेड पहनाव, सिर पर बांधने वाला रूमाल और कशीदारी टोपी शामिल है। ह्वोंग ह नदी के घाटी क्षेत्र में रहने वाली ई जाति की महिलाओं के सिर पर पहने आभूषण खासा चमकदार और आंखों को चौंध देता है, चांदी का आभूषण सब से अधिक मूल्यवान और वैभव माना जाता है। ओढ़नी ई जाति के पुरुष व महिला दोनों के लिए पसंदीदा पहनाव है जो काले और नीले दो रंगों में जानवरों के चमड़े, बाल, ऊनी व रेशमी और पटसन के कपड़ों से बनाया जाता है।

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