भारत में“नमस्ते कोलकाता”चीनी भाषा व संस्कृति केंद्र

2017-09-13 00:00:07
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“नमस्ते कोलकाता”चीनी भाषा व संस्कृति केंद्र

“नमस्ते कोलकाता”चीनी भाषा व संस्कृति केंद्र

पूर्वी भारत स्थित कोलकाता भारत का एकमात्र शहर है जहां चाइना टाऊन स्थित है। वह भारत में सबसे ज्यादा चीनियों के बसने वाला  शहर भी है। यहां का सबसे बड़ा चीनी भाषा व संस्कृति केंद्र ——“नमस्ते कोलकाता”चीनी भाषा व संस्कृति केंद्र एक युवा अमेरिकी मूल वाले भारतीय लड़के ने स्थापित किया है।

संजीदगी से पढ़ रहे एक युवा लड़के चेतन पटेल ने पत्रकार से कहा कि वह अभी अभी हाई स्कूल पास हुआ है। अन्य भारतीय छात्रों से अलग वह खुद चीन जाकर विश्वविद्यालय में पढ़ाई करेगा। “मैंने अभी-अभी हाईस्कूल पास किया है। मैंने देखा कि चीन में कई  अच्छे विश्वविद्यालय हैं, इसलिए मैंने थ्येनचिन के नानखाई विश्वविद्यालय में पढ़ने के लिए आवेदन दिया है। मुझे लगता है कि भारत में कड़ी प्रतिस्पर्द्धा होती है, जबकि चीन में प्रतिस्पर्द्धा का दबाव अपेक्षाकृत कम है और पढ़ाई स्तर भी बहुत अच्छा है। मुझे चीनी संस्कृति बहुत पसंद है। मैं आशा करता हूं कि चीन में नौकरी ढूंढ सकूंगा। “

संस्कृति केंद्र के छात्रों के अलावा अनेक सफेद कॉलर वाले लोगों ने भी चीनी सीखना शुरू किया। अभिषेक इनमें से एक है। वे एक बार चीन के शंघाई में कुछ समय के लिए काम कर चुके थे। उस समय चीन के प्रति उन्हें बड़ी रुचि आयी। हाल में उन्हें चीन के फ़ूतान विश्वविद्यालय और मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की सहइवेंट के मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन के अधीनस्थ भर्ती किया गया। वे चीन में नौकरी पाने की कोशिश कर रहे हैं। उनके अनुसार,”मुझे फ़ूतान विश्वविद्यालय और मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की सहइवेंट के मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन के अधीनस्थ भरती किया गया, इसलिए मैं चीनी भाषा सीखने लगा। इस कोर्स को पूरा करने के बाद मैं फिर एक बार चीन वापस लौटना चाहता हूं। इसलिए चीनी भाषा सीखना मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। भारत व चीन की संस्कृतियों की अपनी अपनी विशेषताएं हैं। मुझे नहीं पता कि दूसरे लोगों को क्या अहसास हुआ है। लेकिन मुझे लगता है कि भारत व चीन की परम्परागत संस्कृति की बहुत समानता है। शायद इन सबने मुझे चीन से जोड़ा है।“

“नमस्ते कोलकाता”चीनी भाषा व संस्कृति केंद्र

“नमस्ते कोलकाता”चीनी भाषा व संस्कृति केंद्र

यहां सीखने के अनुभव अभिषेक ने हमें चीनी भाषा में बताया। उन्होंने कहा कि हालांकि चीनी भाषा सीखते हुए सिर्फ एक महीना हुआ है, फिर भी यहां प्रचुर व खास पढ़ाई के तरीके से उन्हें बड़ा लाभ मिला है। उनके अनुसार,”संस्कृति केंद्र ने हमारे लिए विविधतापूर्ण अध्याय तरीकों की तैयारी की, जिनमें इंटरैक्टिव मीडिया, पाठ्य-पुस्तक और ऑनलाइन कोर्स आदि शामिल हैं। हमारे संस्कृति केंद्र के प्रमुख बहुत युवा हैं। उन्हें पता है कि  छात्र क्या चाहते हैं। साथ ही उनके पास बहुत अच्छे पढ़ाई तरीके भी हैं।“

रेनुका छेत्री “नमस्ते कोलकाता”चीनी भाषा व संस्कृति केंद्र में लेक्चर हैं और इस केंद्र में कई महीनों से काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र के प्रमुख बहुत युवा हैं। उन्हें हाल ही में उनकी असली उम्र का पता चला। 

“पहले मुझे उनकी उम्र पता नहीं थी। दो दिन पहले एक पूर्व छात्र ने मुझे बताया कि हमारे सेंटर के प्रमुख युवा हैं। उनकी उम्र मुझ से भी छोटी है। इस साल वे 18 साल के हुए हैं। “

यह कल्पना नहीं की जा सकती है कि इस 17 शिक्षकों और 500 से ज़्यादा छात्रों वाले सांस्कृतिक केंद्र के प्रमुख की उम्र सिर्फ़ 18 साल है। उनका चीनी नाम ताई आओयेन है, जो भारतीय मूल के अमेरिकी हैं। 10 साल की उम्र में उन्होंने चीनी भाषा सीखना शुरू किया। इसके बाद चीनी भाषा और चीन से उनका गहरा संपर्क बरकरार रहा। उनके द्वारा इस सांस्कृतिक केंद्र के गठनका मकसद और ज्यादा लोगों को चीनी भाषा सीखने और चीन को जानने में मदद देना है।“मेरा नाम ताई आओयेन है। मैंने“नमस्ते कोलकाता”इस संस्कृति केंद्र की स्थापना की थी। इसे भारत के प्रमुख पांच चीनी भाषा स्कूलों में से एक माना जाता है। इससे पहले कोलकाता में एक चीनी भाषा स्कूल था, लेकिन अधिकांश भारतीयों के लिए वहां सीखना अपेक्षाकृत महंगा है और पाठ्यचर्या भी सबके लिए उचित नहीं है। इसलिए मैंने इस केंद्र की स्थापना की। यहां के पढ़ाई तरीके दिलचस्प हैं, साथ ही सस्ता भी है। लोग अपने उचित समय पर यहां आकर चीनी भाषा सीख सकते हैं।“

लेकिन संस्कृति केंद्र की स्थापना करना एक आसान बात नहीं है। एक हाई स्कूल के छात्र के लिए और भी मुश्किल है। ताई आओयेन ने कहा कि दैनिक प्रचलन के सुविधाजनक ढंग से आगे चलने के लिए उन्होंने लोगों को अपनी उम्र के बारे में ज्यादा नहीं बताया। केंद्र की स्थापना होते समय बहुत छोटा पैमाना था। सब लोग एक छोटे कमरे में कक्षा लेते थे। कमरे में सिर्फ़ चार छात्र बैठ सकते थे। लेकिन इसी छोटे क्लास रूम में ताई आओयेन ने अपना सपना शुरू किया।“शुरू में हमारा पैमाना बहुत छोटा था। लेकिन हमारी कक्षा का बहुत बड़ा स्वागत किया गया। केवल दो तीन महीनों में हमारे केंद्र में 50 से ज़्यादा छात्र पहुंचे। शुरू में हमारे लिए सचमुच बहुत मुश्किल बात थी। उस समय मैं हाई स्कूल में पढ़ता था, जबकि पूरे दिन में केंद्र में कक्षाएं होती थी। पूरे दिन में मुझे अपने स्कूल में पढ़ना था और रात को वापस लौटकर कक्षाएं देनी थीं।“

संस्कृति केंद्र में और ज़्यादा छात्र आने के बाद हमने और बड़े दफ्तरों में स्थानांतरित किया। ऊंचा किराया और शिक्षकों की संख्या बढ़ने से केंद्र के प्रचलन के लिए ज़्यादा खर्च होने की आवश्यक्ता भी। इसलिए शुरू में शिक्षकों के वेतन देने में भी मुश्किल थी। लेकिन चीनी संस्कृति के प्रति बड़ी रुचि होने से केंद्र के शिक्षक वेतन लिए बिना काम करने लगे। उन्होंने कहा कि केंद्र में लाभांश पाने के बाद वे वेतन लेंगे। अब इस संस्कृति केंद्र का प्रचलन सामान्य हो गया और कई स्थानीय अंतर्राष्ट्रीय स्कूलों के साथ सहयोग भी किया। चीनी कन्फ्यूशियस अकादमी ने भी केंद्र को चीनी भाषा की पुस्तकें उपहार के रूप से दीं। इस केंद्र ने स्थानीय चीनी समितियों और चीनी कांसुलेट के साथ भी अच्छे सहयोग संबंध की स्थापना की। आज केंद्र में चीनी भाषा के कॉर्सों के अलावा अनुवादन विभाग का गठन भी किया गया। केंद्र लोगों के लिए अनुवाद, गाईड आदि सेवाएं भी प्रदान करता है। यहां तक कि इस केंद्र में एक चीनी रेस्तरां भी है।


 ताई आओयेन

ताई आओयेन

ताई आओयेन ने पत्रकार को बताया कि वास्तव में उपरोक्त सेवाएं केंद्र के प्रचलन के लिए अति महत्वपूर्ण है। कारण यह है कि चीनी भाषा कक्षाओं के लिए फ़ीस बहुत सस्ती रही है। कभी कभार केंद्र स्थानीय परोपकार संस्थाओं के लिए मुफ्त कक्षाएं भी देता है। इसलिए केंद्र के प्रचलन के लिए अधिकांश पैसे अनुवाद विभाग से आये हैं। उनके अनुसार,”वास्तव में हमारे अनुवाद विभाग कुछ पैसे कमा सकता है, जबकि चीनी भाषा की कक्षाओं में ज्यादा कमाई नहीं होती। कोलकाता में भारत की सबसे बड़ी चीनी कम्युनिटि है। यहां का चाइना टाऊन दुनिया में सबसे बड़ा और सबसे पुराना है। यहां अनेक प्रवासी चीनी हैं। आर्थिक नीति के परिवर्तन होने से यहां नौकरी के मौके कम होने लगे हैं। लेकिन चीनी भाषा सीखने के बाद लोगों को और ज़्यादा काम करने का मौका मिल सकते हैं।“

इस साल केंद्र के युवा प्रमुख ताई आओयेन स्नातक होकर अमेरिका के स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में भर्ती किये गये। लेकिन उन्होंने कहा कि वे इस केंद्र को नहीं छोड़ेंगे। अब उन्होंने इस संस्कृति केंद्र के प्रबंध अधिकार को चीनी भाषा व संस्कृति से परिचित कर्मियों को सौंपा है। साथ ही छुट्टियों में उन्हें चीन में इंटर्नशिप करने का मौका भी मिला है। उन्होंने कहा कि वे एक ब्राऊन रंग वाले चीनी हैं।“मुझे बड़ी खुशी हुई है खुद चीन जाकर चीनी संस्कृति का अनुभव ले सकूंगा। हालांकि मैं यहां से रवाना होऊंगा, फिर भी मुझे पक्का विश्वास है कि इस केंद्र का सुन्दर भविष्य होगा। मेरी शुभकामना है कि यहां के सभी छात्र व शिक्षक सकुशल रहें। मैं चाय वाले अंडे की तरह हूं। बाहर से देखे तो मैं ब्राऊन कलर वाला भारतीय हूं, फिर भी अंदर से देखें पीला दिल वाला चीनी। “

सच कहते हैं कि ताई आओयेन अपने तरीके से चीन-भारत मैत्री के लिए अपनी कोशिश कर रहे हैं।


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