भारत में“नमस्ते कोलकाता”चीनी भाषा व संस्कृति केंद्र

2017-09-13 00:00:07
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“नमस्ते कोलकाता”चीनी भाषा व संस्कृति केंद्र

“नमस्ते कोलकाता”चीनी भाषा व संस्कृति केंद्र

यहां सीखने के अनुभव अभिषेक ने हमें चीनी भाषा में बताया। उन्होंने कहा कि हालांकि चीनी भाषा सीखते हुए सिर्फ एक महीना हुआ है, फिर भी यहां प्रचुर व खास पढ़ाई के तरीके से उन्हें बड़ा लाभ मिला है। उनके अनुसार,”संस्कृति केंद्र ने हमारे लिए विविधतापूर्ण अध्याय तरीकों की तैयारी की, जिनमें इंटरैक्टिव मीडिया, पाठ्य-पुस्तक और ऑनलाइन कोर्स आदि शामिल हैं। हमारे संस्कृति केंद्र के प्रमुख बहुत युवा हैं। उन्हें पता है कि  छात्र क्या चाहते हैं। साथ ही उनके पास बहुत अच्छे पढ़ाई तरीके भी हैं।“

रेनुका छेत्री “नमस्ते कोलकाता”चीनी भाषा व संस्कृति केंद्र में लेक्चर हैं और इस केंद्र में कई महीनों से काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र के प्रमुख बहुत युवा हैं। उन्हें हाल ही में उनकी असली उम्र का पता चला। 

“पहले मुझे उनकी उम्र पता नहीं थी। दो दिन पहले एक पूर्व छात्र ने मुझे बताया कि हमारे सेंटर के प्रमुख युवा हैं। उनकी उम्र मुझ से भी छोटी है। इस साल वे 18 साल के हुए हैं। “

यह कल्पना नहीं की जा सकती है कि इस 17 शिक्षकों और 500 से ज़्यादा छात्रों वाले सांस्कृतिक केंद्र के प्रमुख की उम्र सिर्फ़ 18 साल है। उनका चीनी नाम ताई आओयेन है, जो भारतीय मूल के अमेरिकी हैं। 10 साल की उम्र में उन्होंने चीनी भाषा सीखना शुरू किया। इसके बाद चीनी भाषा और चीन से उनका गहरा संपर्क बरकरार रहा। उनके द्वारा इस सांस्कृतिक केंद्र के गठनका मकसद और ज्यादा लोगों को चीनी भाषा सीखने और चीन को जानने में मदद देना है।“मेरा नाम ताई आओयेन है। मैंने“नमस्ते कोलकाता”इस संस्कृति केंद्र की स्थापना की थी। इसे भारत के प्रमुख पांच चीनी भाषा स्कूलों में से एक माना जाता है। इससे पहले कोलकाता में एक चीनी भाषा स्कूल था, लेकिन अधिकांश भारतीयों के लिए वहां सीखना अपेक्षाकृत महंगा है और पाठ्यचर्या भी सबके लिए उचित नहीं है। इसलिए मैंने इस केंद्र की स्थापना की। यहां के पढ़ाई तरीके दिलचस्प हैं, साथ ही सस्ता भी है। लोग अपने उचित समय पर यहां आकर चीनी भाषा सीख सकते हैं।“

लेकिन संस्कृति केंद्र की स्थापना करना एक आसान बात नहीं है। एक हाई स्कूल के छात्र के लिए और भी मुश्किल है। ताई आओयेन ने कहा कि दैनिक प्रचलन के सुविधाजनक ढंग से आगे चलने के लिए उन्होंने लोगों को अपनी उम्र के बारे में ज्यादा नहीं बताया। केंद्र की स्थापना होते समय बहुत छोटा पैमाना था। सब लोग एक छोटे कमरे में कक्षा लेते थे। कमरे में सिर्फ़ चार छात्र बैठ सकते थे। लेकिन इसी छोटे क्लास रूम में ताई आओयेन ने अपना सपना शुरू किया।“शुरू में हमारा पैमाना बहुत छोटा था। लेकिन हमारी कक्षा का बहुत बड़ा स्वागत किया गया। केवल दो तीन महीनों में हमारे केंद्र में 50 से ज़्यादा छात्र पहुंचे। शुरू में हमारे लिए सचमुच बहुत मुश्किल बात थी। उस समय मैं हाई स्कूल में पढ़ता था, जबकि पूरे दिन में केंद्र में कक्षाएं होती थी। पूरे दिन में मुझे अपने स्कूल में पढ़ना था और रात को वापस लौटकर कक्षाएं देनी थीं।“

संस्कृति केंद्र में और ज़्यादा छात्र आने के बाद हमने और बड़े दफ्तरों में स्थानांतरित किया। ऊंचा किराया और शिक्षकों की संख्या बढ़ने से केंद्र के प्रचलन के लिए ज़्यादा खर्च होने की आवश्यक्ता भी। इसलिए शुरू में शिक्षकों के वेतन देने में भी मुश्किल थी। लेकिन चीनी संस्कृति के प्रति बड़ी रुचि होने से केंद्र के शिक्षक वेतन लिए बिना काम करने लगे। उन्होंने कहा कि केंद्र में लाभांश पाने के बाद वे वेतन लेंगे। अब इस संस्कृति केंद्र का प्रचलन सामान्य हो गया और कई स्थानीय अंतर्राष्ट्रीय स्कूलों के साथ सहयोग भी किया। चीनी कन्फ्यूशियस अकादमी ने भी केंद्र को चीनी भाषा की पुस्तकें उपहार के रूप से दीं। इस केंद्र ने स्थानीय चीनी समितियों और चीनी कांसुलेट के साथ भी अच्छे सहयोग संबंध की स्थापना की। आज केंद्र में चीनी भाषा के कॉर्सों के अलावा अनुवादन विभाग का गठन भी किया गया। केंद्र लोगों के लिए अनुवाद, गाईड आदि सेवाएं भी प्रदान करता है। यहां तक कि इस केंद्र में एक चीनी रेस्तरां भी है।

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