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चीन में 4 मशहूर बेसिन

cri 2017-06-12 12:47:51
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चीन एक विशाल देश है, जिसका कुल क्षेत्रफल 96 लाख वर्गकिलोमीटर हैं। चीन में पर्वतों, नदियों व मैदानों के अलावा 4 मशहूर बेसिन भी होते हैं।

तरिम बेसिन

अतीत में उइगुर भाषा में"तरिम"का मतलब"खेती योग्य भूमि"या"खेती का काम"था, लेकिन नवीनतम अनुसंधान परिणाम से पुष्ट हुआ है कि"तरिम"का अर्थ"झील व रेगिस्तान में प्रवाहित नदियों की शाखा" है।

तरिम बेसिन थ्येनशान पर्वत, खुनलुन पर्वत, आल्चीन पर्वत और पामीर पठार के बीच में स्थित है, इसका क्षेत्रफल करीब 5 लाख 30 हज़ार वर्ग किलोमीटर है। चीन में, यहां तक कि विश्व में भी यह सब से विशाल अन्तर्स्थली बेसिन है। तरिम बेसिन की चारों ओर ऊंचे ऊंचे पहाड़ खड़े हैं और आबोहवा अत्यन्त सूखा होता है। बाहर से भीतर तक बेसिन की भौगोलिक आकृति बिलकुल रिंग जैसी होती है, बाह्य भाग से अंदरूनी भाग तक क्रमशः गोबी मरूभूमि, नख्लिस्तान और रेगिस्तान फैले हैं।

बेसिन के बाह्य भाग में कंकर-पत्थरों से बना गोबी मरूभूमि है। गोबी मरूभूमि में पानी जमा नहीं हो सकता है, इस तरह गर्मियों में ऊंचे पहाड़ों से पिघली हुई बर्फ़ का पानी भूमि के नीचे रिसकर भूमिगत जल बन जाता है और गोबी मरूभूमि का सतही भाग हमेशा शुष्क रहता है। गोबी मरूभूमि के आंतराल भाग में नख्लिस्तान के टूटे-अटूटे सिलसिले की एक रिंग जैसी नज़र आती है। नख्लिस्तान में विपुल जल स्रोत मिलता है और घना घास उगता है, नहरों, वनों व खेतों का जाल सा बिछा हुआ है, यहां अर्थव्यवस्था विकसित है, अतः स्थानीय लोग मुख्यतः इसमें रहते हैं। तरिम बेसिन में तेल व प्राकृतिक गैस का भंडार अत्यन्त समृद्ध है।

तकलमकान रेगिस्तान

 

तकलमाकन रेगिस्तान तरिम बेसिन के भीतरी भाग में स्थित है, पश्चिम से पूर्व तक इस की लम्बाई एक हज़ार किलोमीटर है और उत्तर से दक्षिण तक चार सौ किलोमीटर चौड़ा है, इस का क्षेत्रफल करीब 3 लाख 30 हज़ार वर्ग किलोमीटर है। यह चीन का सब से बड़ा रेगिस्तान ही नहीं, विश्व में दूसरा बड़ा चलता-फिरता रेगिस्तान भी है। तकलमाकन रेगिस्तान में विविध आकारों के रेतीले टीले हैं, जिनकी ऊंचाई आम तौर पर सौ मीटर से अधिक है, कुछ टीले तो दो या तीन सौ मीटर ऊंचे हैं। रेगिस्तान क्षेत्र बहुत सूखा है, कभी कभी बाहरों माह वर्षा की एक बूंद भी नहीं गिरती है, जीवन की स्थिति बहुत कठोर है।

क्या आप जानते हैं?

तरिम बेसिन की भूमि में तेल का प्रचुर भंडार है, लोग इसे"तेल का सागर"कहते हैं। इधर के वर्षों में इस क्षेत्र में सर्वेक्षण करने आने वाले वैज्ञानिकों व अन्वेषकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

जुंग्गर बेसिन

जुंग्गर बेसिन शिनच्यांग उइगुर स्वायत्त प्रदेश के उत्तरी भाग और थ्येनशान पर्वत व अल्थाई पर्वत के बीच स्थित है, इस का क्षेत्रफल 3 लाख 80 हज़ार वर्ग किलोमीटर है, चीन में दूसरे बड़े बेसिन के रूप में जुंग्गर बेसिन भूस्थिति की दृष्टि से पश्चिम में नीचा तथा पूर्व में ऊंचा है। यह एक अर्ध खुला बेसिन है, केंद्र में चीन का दूसरा बड़ा रेगिस्तान यानी गुर्बानतुंगगुत रेगिस्तान है।

बेसिन में भूमि के नीचे विपुल तेल का भंडार है। 20वीं शताब्दी के 50 वाले देशक में मशहूर करमई तेल क्षेत्र का विकास किया गया था। इसके साथ ही बेसिन में कोयले व अन्य प्रकारों के धातुओं की खानें हैं। उत्तरी भाग में अल्थाई पर्वत क्षेत्र में सोने का प्रचुर भंडार है।

काइदम बेसिन

क्या आप जानते हैं?

मंगोल भाषा में"काइदम"का अर्थ"नमक झील"है।

चीन में तीसरे बड़े बेसिन के रूप में काइदम बेसिन छिंगहाई तिब्बत पठार के उत्तर पूर्वी भाग में स्थित छिंगहाई प्रांत के भीतर है, इसका क्षेत्रफल है करीब 2 लाख वर्ग किलोमीटर। बेसिन के तली भाग की औसत ऊंचाई समुद्र-सतह से 2600 से 3000 मीटर तक है, यह चीन में समुद्र-सतह से सब से ऊंचा बड़ा बेसिन है, बेसिन का तली भाग खुला और समतल है और घोड़े पर सवार होकर या कार चलाकर इस पर दौड़ना बिलकुल मैदान में दौड़ने के बराबर है।

यहां समृद्ध खनिज संसाधन उपलब्ध है, लोग इसे"निधि खजाना"कहते हैं। बेसिन में नमक, मिट्टी के तेल, जस्ता, सीसा और सुहागा चार निधियों के नाम से मशहूर है। नमक का भंडार विशेष ज्यादा है, छोटी बड़ी नमक झीलों की संख्या सौ से अधिक है। नमक का कुल भंडार 60 अरब टन से अधिक है। यहां नमक से बनाए गए हवाई अड्डा व मकान देखने को मिलते हैं।

सछ्वान बेसिन

सछ्वान बेसिन चारों ओर पहाड़ों से घिरा है, इसकी ऊंचाई समुद्र-सतह से 300 से 600 मीटर है। चीन में चौथे बड़े बेसिन के रूप में सछ्वान बेसिन की भूस्थिति सब से विशेष है, देश के अन्य बड़े बेसिनों की तुलना में यह अक्षांशरेखा के सब से दक्षिण में स्थित और समुद्र-सतह से सब से नीचा बेसिन है। सछ्वान प्रांत के पूर्वी भाग और यांगत्सी नदी के ऊपरी भाग में स्थित इस बेसिन का क्षेत्रफल 2 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक है।

क्या आप जानते हैं?

सछ्वान बेसिन के भीतर टीले लहरदार रूप में हैं, नीचे से ऊपर तक टीले पर बहुतया बैंगनी बलुआ पत्थरों की परतें और इस से अपक्षय मिट्टी ढकी हुई हैं। दूर से देखने में पूरा बेसिन बैंगनी रंग से रंजित हुआ प्रतीत होता है, इस तरह लोग इसे"बैंगनी बेसिन"कहते हैं।

बेसिन के भीतर जलवायु सर्दियों में गर्म और गर्मियों में कड़ा गर्म होता है। तापमान में कम फ़र्क और वर्षा पर्याप्त होती है। सर्दियों में अधिक कोहरा छाया रहता है। बेसिन के उत्तर पश्चिमी भाग में करीब 200 किलोमीटर लम्बा और 40 से 70 किलोमीटर चौड़ा एक मैदान है, यह है मशहूर छङतु मैदान, जहां तुच्यांगयान जल परियोजना विश्वविख्यात है, इस परियोजना से उपजाऊ भूमि की सिंचाई होती है। प्राचीन काल से इस बेसिन में कृषि का उद्योग विकसित रहा है और उत्पादित वस्तुएं विविध और विपुल हैं, इसलि सछ्वान बेसिन को"स्वर्ग का प्रदेश"माना जाता है।

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