सही कदम उठाकर बच्चों के स्वास्थ्य व शिक्षा की गारंटी दें: डब्ल्यूएचओ

2020-10-14 10:56:21
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स्थानीय समयानुसार 15 सितंबर की रात को विश्व स्वास्थ्य संगठन, संयुक्त राष्ट्र बाल कोष और यूनेस्को ने एक साथ एक न्यूज़ ब्रीफिंग आयोजित करके कोविड-19 महामारी के दौरान निरंतर रूप से शिक्षा देने को सुनिश्चित करने के साथ स्वास्थ्य व सुरक्षा कार्य को कैसे अच्छी तरह से करने पर सुझाव पेश किये।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस अधनोम घेब्रेयसस ने इस न्यूज़ ब्रीफिंग में कहा कि बच्चों के प्रति कोविड-19 महामारी के असर का अध्ययन एक प्राथमिक कार्य है। महामारी के प्रकोप के बाद हालांकि अब तक बहुत सवाल मौजूद हैं, लेकिन हम स्पष्ट रूप से यह जानते हैं कि बच्चों व किशोरों के संक्रमित होने की संभावना है। और वे अन्य लोगों को भी संक्रमित कर सकेंगे। वायरस बच्चों की जान छीन सकता है। पर आम तौर पर बच्चों की हालत बहुत गंभीर नहीं होगी। बच्चों व किशोरों में मौत के मामलों की संख्या बहुत कम है। इस की चर्चा में टेड्रोस ने कहा, आंकड़ों के अनुसार 20 वर्षों से कम उम्र वाले लोगों में केवल 10 प्रतिशत पुष्ट मामलों और 0.2 प्रतिशत से कम मौत के मामलों की रिपोर्ट दी गयी। लेकिन बच्चों और किशोरों में गंभीर बीमारी और मृत्यु के जोखिम को बढ़ाने वाले कारकों पर ज्यादा शोध की आवश्यकता है। उन के अलावा संक्रमित लोगों के प्रति कोविड-19 के दीर्घकालीन व संभावित असर पर हमारे पास कुछ भी जानकारी प्राप्त नहीं है।

टेड्रोस ने कहा कि हालांकि बच्चे बड़े हद तक कोविड-19 वायरस से गंभीर स्वास्थ्य मामला पैदा करने से बच गये, लेकिन वे अन्य दुःख से पीड़ित हैं। कई देशों में बुनियादी पोषण व टीकाकरण सेवाएं महामारी की वजह से बाधित हो गयी। कई महीनों तक लाखों बच्चों की पढ़ाई करने का समय बर्बाद हो गया।

टेड्रोस को आशा है कि बच्चे जल्द ही स्कूल में वापस लौट सकेंगे। और स्कूल भी बच्चों के लिये सुरक्षित वातावरण तैयार कर सकेंगे। यूनेस्को, संयुक्त राष्ट्र बाल कोष और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड-19 महामारी के दौरान स्कूलों में सुरक्षा गाइड को अपडेट किया है, ताकि विभिन्न स्थिति में विभिन्न देशों का समर्थन दिया जा सके। इस ताज़ा गाइड में शून्य मामला, कई मामले, सामूहिक मामले या सामुदायिक प्रकोप से ग्रस्त क्षेत्रों में स्थित स्कूलों के प्रति कारगर सुझाव पेश किये गये हैं। टेड्रोस ने कहा, बच्चों, किशोरों या सारे समाज के प्रति विनाशकारी परिणाम के मद्देनज़र स्कूलों को बंद करना पड़ा। पर यह कदम अस्थायी है, और केवल महामारी के गंभीर क्षेत्रों में लागू किया जाता है। स्कूलों को बंद करने के दौरान शिक्षा की निरंतरता को सुनिश्चित करने के लिये बच्चों को दूरस्थ शिक्षा देनी चाहिये। साथ ही इस के दौरान संबंधित कदम बनाना चाहिये, ताकि स्कूलों को खोलने के बाद वायरस के फैलने की रोकथाम की जा सके।

उन्होंने यह भी कहा है कि बच्चों की सुरक्षा और स्कूलों में जाने को सुनिश्चित करने के लिये केवल स्कूल, सरकार या परिवार पर निर्भर नहीं है। इस में सभी लोगों की कोशिश चाहिये।

गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र बाल कोष द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार विश्व में कम से कम 46.3 करोड़ बच्चों को महामारी के दौरान दूरस्थ शिक्षा नहीं मिल पाएगी।

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