श्ये चेन स्वर्ग जाने के बजाय अफ़्रीका में वापस लौटीं

2020-08-27 09:00:00
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4 जून के दोपहर के बाद पेइचिंग विश्वविद्यालय के सार्वजनिक स्वास्थ्य कॉलेज के वैश्विक स्वास्थ्य विभाग की उपाध्यक्ष, सह प्रोफ़ेसर श्ये चेन ने कहा था कि वे थोड़ी देर सोना चाहती थी। लेकिन जब वे सो गयी, तो कभी नहीं उठ सकी। केवल 41 वर्षीय श्ये चेन ने अपनी सभी जवानी व कोशिश अफ़्रीका से जुड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्य में लगायी।

सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र की एक विशेषज्ञ के रूप में श्ये चेन ने वर्ष 2014 में सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में चीन के पहले विदेशी आधार का निर्माण मजबूत किया। वर्ष 2017 में उन्होंने पेइचिंग विश्वविद्यालय के सार्वजनिक स्वास्थ्य कॉलेज के मलावी अध्ययन व शिक्षा आधार के निर्माण को बढ़ावा दिया। जब यह आधार मलावी के लिलोंग्वे में स्थापित किया गया, तो मलावी के राष्ट्रपति की पत्नी, स्वास्थ्य व जनसंख्या मंत्री आदि मेहमानों ने इस के उद्घाटन समारोह में भाग लिया।

इस आधार की स्थापना के बाद पेइचिंग विश्वविद्यालय ने वैश्विक स्वास्थ्य, महिला व शिशु के स्वास्थ्य, संक्रामक रोग, स्वास्थ्य से जुड़ी नीति आदि क्षेत्रों में मलावी चिकित्सा कॉलेज व चिकित्सा संस्थाओं के साथ व्यापक रूप से सहयोग किया, और नियमित रूप से शिक्षकों व विद्यार्थियों को वहां भेजकर चिकित्सा से जुड़ा अध्ययन व अभ्यास किया। श्ये चेन ने भी कई बार मलावी की यात्रा की। उन्होंने विद्यार्थियों को लेकर स्थानीय समुदाय में जाकर अनुसंधान किया, और अंतर्राष्ट्रीय दृष्टिकोण प्राप्त वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य सुयोग्य व्यक्तियों का प्रशिक्षण दिया। साथ ही उन्होंने वास्तविकता से स्थानीय लोगों के लिये स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का समाधान किया है।

पेइचिंग विश्वविद्यालय के वैश्विक स्वास्थ्य विभाग के अध्यक्ष प्रोफ़ेसर चेन चीच्ये ने याद करते हुए कहा कि श्ये चेन आराम से स्थानीय जनता के साथ आदान-प्रदान कर सकती थीं। अफ़्रीका के मामले और स्थानीय सांस्कृतिक पृष्ठभूमि व समाज की स्थिति के प्रति उनकी समझ ने मुझ पर गहरी छाप छोड़ी।

विदेशी आधार के निर्माण में श्ये चेन ने अपनी आंखों से मलावी और कोमोरोस जैसे पश्चिमी अफ़्रीकी देशों में मलेरिया के फैलाव को देखा। स्थानीय चिकित्सा व स्वास्थ्य सुविधाओं के पिछड़ेपन को देखकर उन्हें बहुत दुःख ��ुआ। इसलिये श्ये चेन ने अफ़्रीकी देशों में मलेरिया के मुकाबले से जुड़े अध्ययन पर बड़ा ध्यान दिया। हालांकि यह श्ये चेन द्वारा किये गये अध्ययन की दिशा से प्रत्यक्ष संबंध नहीं है, लेकिन उन्होंने कहा कि मलेरिया ने बहुत अफ़्रीकी बच्चों की जान छीन ली। हर बार जब मैंने यह देखा, तो मुझे लगता है कि हमें उन के लिये ज्यादा काम करना चाहिये। फिर श्ये चेन ने इस बात पर विचार करना शुरू किया कि आर्टीमिसिनिन का प्रयोग करके विकासशील देशों की सेवा कैसे और अच्छी तरह से दी जा सकेगी।

यह कहा जा सकता है कि श्ये चेन तीव्र अंतर्राष्ट्रीय मानवतावादी भावना प्राप्त एक शोधकर्ता हैं। उन्होंने यह लिखा है कि दूसरों को खुशी देने के लिये मैं हर समय पर समर्पण देने में तैयार हूं।

अफ़्रीकी महाद्वीप के बहुत क्षेत्रों में श्ये चेन के पैरों के निशान प्राप्त हैं। उन्होंने युगांडा जिनजा अस्पताल और चीन-युगांडा मैत्री अस्पताल का दौरा किया। वहां उन्होंने रोगियों व चिकित्सकों के साथ आदान-प्रदान किया। साथ ही उन्होंने कोमोरोस की यात्रा की, और वहां चीन के मलेरिया विरोधी कार्यक्रम का व्यापक मूल्यांकन करने के अलावा मलेरिया की रोकथाम से जुड़े स्वास्थ्य विकास, सहायता व प्रशिक्षण का विस्तार भी किया। गौरतलब है कि श्ये चेन ने अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य विकास व सहायता प्रशिक्षण को डिज़ाइन करके लागू किया है।

श्ये चेन ने सक्रिय रूप से विश्व में मलेरिया को खत्म करने से जुड़े अनुसंधान को मजबूत किया। मलेरिया के बारे में उनके अध्ययन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के मलेरिया विभाग का ध्यान खींचा। वर्ष 2018 के जून में वे विश्व स्वास्थ्य संगठन की तकनीकी अधिकारी बनी। डब्ल्यूएचओ को आशा है कि वे विश्व में मलेरिया के नियंत्रण कार्य में भाग ले सकेंगी। वर्ष 2019 के जून में श्ये चेन ने पेइचिंग में एक आर्टीमिसिनिन संगोष्ठी आयोजित की। इस के दौरान उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन के वैश्विक मलेरिया परियोजना विभाग के प्रधान डॉक्टर पेड्रो अलोंसो से संपर्क रखा, और देश विदेश के मलेरिया विरोधी विशेषज्ञों व दलों का निमंत्रण किया। ताकि चीन के आर्टीमिसिनिन को विश्व में अच्छी तरह से प्रसार-प्रचार किया जा सके, और स्थानीय रोगियों की सहायता दी जा सके। वास्तव में उस समय वे कैंसर से पीड़ित थीं, और रसायन चिकित्सा कर रही थीं। उद्घाटन समारोह के एक दिन पहले श्ये चेन तैयारी कार्य करने के लिये आधी रात तक व्यस्त थीं। अगले दिन के सुबह उन्हें अच्छा नहीं लगा। और रक्तचाप की जांच करके पता लगा कि उनका रक्तचाप 150 तक पहुंच गया था। लेकिन उन्होंने दवा खाकर उसी दिन की बैठक में भाग लिया। सभी लोग उन के स्वास्थ्य पर बहुत चिंतित थे।

गौरतलब है कि श्ये चेन के काम को अंतर्राष्ट्रीय साथियों का सम्मान मिलता है। उन के देहांत की खबर सुनकर विश्व स्वास्थ्य संगठन के वैश्विक मलेरिया परियोजना विभाग के प्रधान डॉक्टर पेड्रो अलोंसो ने शोक पत्र भेजा, और इस बात की प्रशंसा की कि श्ये चेन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन और चीन के बीच गहन रूप से कारगर सहयोग करने को मजबूत किया। उन की कोशिश से विश्व ने मलेरिया की रोकथाम के प्रति अंतर्राष्ट्रीय सहायता में चीन का रुख व शक्ति समझ लिया है। मलावी के राष्ट्रपति की पत्नी ने भी पत्र भेजकर सच्चे दिल से इस प्रिय दोस्त व शक्तिशाली शोधकर्ता के देहांत के प्रति गहरा शोक व दुःख प्रकट किया।

उधर विद्यार्थियों व सहकर्मियों की नज़र में श्ये चेन बहुत गंभीरता से हर काम करती थीं। कोशिश उन की चरित्र व रक्त में भरी हुई है। अगर उन के काम को अन्य लोगों से संतोष नहीं मिला, तो उन्हें अच्छा नहीं लगा। पेइचिंग विश्वविद्यालय के वैश्विक स्वास्थ्य विभाग के पहले डीन प्रोफ़ेसर ल्यू फेईलुंग ने कहा कि वैश्विक स्वास्थ्य शासन और वैश्विक स्वास्थ्य कूटनीति के प्रति श्ये चेन का बड़ा शौक है। उन्होंने इस पक्ष में बड़ी कोशिश से अध्ययन किया है। उन के देहांत से प्रोफ़ेसर ल्यू के प्रति एक श्रेष्ठ अकादमिक मित्र को खो दिया है।

श्ये चेन एक फ़्रैंक आशावादी हैं। यहां तक कि कैंसर से अस्पताल में भर्ती के बाद उन्होंने अच्छी मानसिक स्थिति को बनाए रखने की पूरी कोशिश की। हर दिन वे कसरत करने पर कायम रहती थीं, स्वस्थ भोजन करती थीं। अंतिम बार अस्पताल में इलाज करने के दौरान उन्होंने अपने लिये एक नीली स्कर्ट भी खरीदी, और उन्हें आशा थी कि अस्पताल से जाते वक्त वे इसे पहन सकेंगी।

श्ये चेन के दफ्तर में दीवार पर मलावी का एक पुराना ट्रैफिक मैप लटकता हुआ है। मैप के सामने क्लिप से नोट्स, पोस्टकार्ड, फ़्रेंच-चीनी शब्दावली तालिका, पता पुस्तिका आदि रखी हुई हैं। आसपास के शिक्षकों व विद्यार्थियों के अनुसार उन्हें ऐसा लगता है कि श्ये चेन स्वर्ग जाने के बजाय अफ़्रीका में वापस लौटीं।

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