वुहान क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग की युवा डॉक्टर यांग श्याओ की कहानी

2020-08-20 09:00:00
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दोस्तों, 32 वर्षीय यांग श्याओ वुहान विश्वविद्यालय के चोंगनान अस्पताल के क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग में काम करने वाली एक युवा डॉक्टर हैं। कोविड-19 महामारी का मुकाबला उनकी जिन्दगी में मौजूद पहली आपातकालीन सार्वजनिक स्वास्थ्य घटना है, जिसमें उन्होंने एक डॉक्टर की जिम्मेदारी निभाई। इस वर्ष जनवरी से यांग श्याओ ने कोविड-19 रोगियों का इलाज करना शुरू किया, जिसे उनके लिये मानसिक व शारीरिक शक्ति की सबसे बड़ी परीक्षा मानी जाती है। इस बार महामारी के मुकाबले में यांग श्याओ ने जुदाई से जूझने के साथ विश्वास भी प्राप्त किया। साथ ही उनके मन में करियर आदर्श और मजबूत बन गया।

“तुम क्या कर रही हो?अगर मज़ा आया, तो मुझे भी दिखाओ, ठीक है न?”

यह तो महामारी की सबसे गंभीर स्थिति में व्यस्त यांग श्याओ द्वारा अवकाश में अपनी बेटी के साथ की गयी बातचीत का एक अंश है। यह वीडियो अभी तक वेब पर प्रचलित है। वीडियो में मोबाइल के इधर बेटी आराम से खेल रही थी, और उधर यांग श्याओ स्क्रीन के सामने रो रही थीं। क्योंकि बेटी मां को सबसे ज्यादा प्यार करती है, लेकिन लंबे समय तक मां को नहीं मिलने के कारण अब वह मां को केवल एक अजनबी मानती है। इसकी चर्चा में यांग श्याओ ने कहा,पहले समय में मेरी बेटी मुझ पर सबसे ज्यादा भरोसा करती थी। जब मैं काम के बाद घर वापस लौटी, तो वह सिर्फ़ मेरे साथ खेलती थी। अब वह बहुत बातें कर सकती है। लेकिन वह मुझे मां नहीं बोलती, और मेरे साथ बातचीत भी नहीं करना चाहती।

बेटी इसलिये मां के साथ ऐसा व्यवहार करती है, क्योंकि उसके जीवन में लंबे समय तक मां की अनुपस्थिति हुई। वसंत त्योहार से पहले यांग श्याओ ने जल्द ही परिवार जनों के लिये गृहनगर वापस जाने की एयर टिकट खरीदी। यांग के अनुसार,एयरपोर्ट के द्वार पर मैं चुपचाप से चली गयी। पर मेरी बेटी आगे नहीं गई। द्वार पर उसने रुककर मां को बुलाया। उसका मतलब यह है कि मां अंदर में नहीं आयी है। जब हवाई जहाज़ गंतव्य स्थल पहुंचा, तो ग्राउंड स्टाफ़ भी मास्क पहनकर रक्षात्मक पोशाक में थे। क्योंकि मेरी बेटी ने मुझ से वीडियो बातचीत करते समय मुझे इस पोशाक में देखा। इसलिये उसने ग्राउंड स्टाफ़ की एक कर्मचारी की जांघ पकड़कर बार बार मां पुकारा। लेकिन गृहनगर वापस लौटने के बाद क्योंकि मां से न मिलने के कारण तो वीडियो बातचीत में उसने मुझे मां नहीं पुकारा।

गौरतलब है कि यांग श्याओ की बेटी केवल डेढ़ साल की है। इस वर्ष के बच्चों को मां से खूब देखभाल व प्यार चाहिये। लेकिन कोविड-19 महामारी के सामने यांग श्याओ ने बिना किसी झिझक के अपनी बेटी को छोड़कर रोगियों का इलाज करना सही माना। इसकी चर्चा में उन्होंने कहा,क्योंकि हमारे चिकित्सक टीम में अन्य लोगों के भी बच्चे हैं। चाहे किसी युवा चिकित्सक के बच्चे नहीं हैं, लेकिन वे भी अपने मां-बाप के बच्चे हैं। सभी लोग एक ही तरह हैं। महामारी के सामने कोई नहीं हिला।

वर्ष 2012 से क्रिटिकल केयर मेडिसिन चुनने के बाद यांग श्याओ ने आपात सार्वजनिक चिकित्सा घटना का मुकाबला करने की तैयारी की है। इस बार कोविड-19 महामारी से ग्रस्त रोगियों के इलाज में उन्होंने चिकित्सकों व रोगियों के बीच सामंजस्यपूर्ण संबंधों को गहन रूप से महसूस किया। उन्हें आशा है कि ये संबंध जारी रहेंगे। इसकी चर्चा में यांग श्याओ ने कहा,सभी रोगियों के परिजनों ने कहा है कि हम इलाज नहीं छोड़ेंगे और हमारी तरफ़ से अगर मरीज़ इलाज को नहीं छोड़ेंगे, तो चाहें कितना मुश्किल हो, हम उन्हें ज़रूर बचाने की पूरी कोशिश करेंगे। हर सुबह वार्ड का निरीक्षण दौरा करते समय हम इलाज के विभिन्न तरीके का प्रयास करने के बारे में सोचते हैं। अगर यह सफल नहीं है, तो क्या हम और एक तरीके की कोशिश कर सकेंगे? क्योंकि एक चिकित्सक के प्रति मरीज़ों व उनके परिजनों का विश्वास बहुत महत्वपूर्ण है। मैंने इस पर गहन रूप से महसूस किया है।

इस बार महामारी की रोकथाम करने के दौरान यांग श्याओ को न सिर्फ़ रोगियों व उन के परिजनों से सम्मान व विश्वास मिला है, बल्कि पेशेवर जानकारियों पर भी अपडेट किया गया है। पर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उनकी जिन्दगी का लक्ष्य और मजबूत हो गया है कि वे रोगियों के प्रति एक विश्वसनीय और श्रेष्ठ क्रिटिकल केयर मेडिसिन चिकित्सक बनना चाहती हैं। इसकी चर्चा में उन्होंने कहा,मुझे लगता है कि युवाओं को सपना होना चाहिये। शायद यह सपना बहुत महान नहीं है, पर तुम्हारे पास सपना ज़रूर होना चाहिये। और तुम्हें इस सपने को पूरा करने के लिये कोशिश करनी चाहिये।

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