अल्बानिया की स्वयंसेवक सारा लू

2020-03-24 16:32:46
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महामारी की कोई सीमा नहीं होती है, साथ ही प्रेम की भी कोई सीमा नहीं होती। अल्बानिया की राजधानी तिराना से आई सारा लू एक साहसी व दयालु सीमाहीन स्वयंसेवक हैं। वे अपने परिजनों के साथ चीन में 12 वर्षों तक रह चुकी हैं। अब वे शांगहाई में रहती हैं। कोविड-19 निमोनिया की महामारी के प्रकोप के बाद 20 वर्षीय सारा लू ने चीनी पंचांग के अनुसार नव वर्ष के सातवें दिन फूथो क्षेत्र के रेड क्रॉस द्वारा जारी भर्ती सूचना देखी। फिर वे हाइवे के प्रवेश द्वार पर एक स्वयंसेवक बन गयीं। हर दिन वे रक्षात्मक पोशाक में छह घंटे तक गाड़ी में लोगों के शारीरिक तापमान की जांच करती हैं, और गाड़ी व इस में सवार यात्रियों से जुड़ी सूचना का पंजीकरण कार्य करती हैं। गौरतलब है कि उक्त छह घंटों के दौरान वे कोई खाद्य-पदार्थ नहीं खाती, और पानी भी नहीं पी सकती। हाल ही में उन्होंने अपनी स्वयंसेवा को पूरा कर चाइना मीडिया ग्रुप के संवाददाता से महामारी की रोकथाम में अपना अविस्मरणीय अनुभव बताया।

कोविड-19 महामारी के प्रकोप के शुरू से ही सारा लू व उन के परिजनों ने विभिन्न तरीकों से महामारी की रोकथाम के लिये चीन सरकार व संबंधित विभागों द्वारा जारी कदमों को समझ लिया। उन्होंने अच्छी तरह से आत्म रक्षा की है। इस की चर्चा में सारा लू ने कहा कि हमने विभिन्न मीडिया के माध्यम से महामारी की रोकथाम से जुड़े कदम व सूचनाएं प्राप्त कीं। समुदाय ने भी हमें हर दिन बाहर जाते समय मास्क पहनने और हाथ धोने की याद दिलायी। चीन सरकार ने महामारी की रोकथाम के लिये बहुत कदम उठाये हैं। मुझे लगता है कि चीन ने खूब काम किया और अच्छी तरह से भी किया।

लेकिन महामारी के विकास से उसी समय हर दिन हजार से अधिक मामलों की पुष्टि हुई। अल्बानिया में स्थित सारा लू के रिश्तेदारों को इस पर बहुत चिंता हुई। फिर सारा लू और उन की मां ने रिश्तेदारों से यहां के जीवन की स्थिति को समझाया, ताकि वे चिंतित न हो। सारा लू ने कहा कि अल्बानिया में रहने वाले मेरे नाना और नानी जी इस बात पर बहुत चिंतित हैं। क्योंकि वे बहुत बूढ़े हैं, इसलिये उन्हें समझाना थोड़ा मुश्किल है। मैंने उन्हें बताया कि यहां जीवन की आवश्यकताओं की आपूर्ति काफ़ी है, किसी चीज़ का अभाव नहीं है। समुदाय में बुजुर्गों व असहाय लोगों के लिये होम डिलीवरी सेवा दी जाती है। बाहर जाने के बिना लोग सामान्य जीवन भी बिता सकते हैं। मां ने कहा कि चीन सरकार ने बहुत कम समय में सिलसिलेवार कारगर कदम उठाये हैं, जो अन्य देशों ने कभी नहीं उठा सके। हम चीन में रहते हैं, हमारा जीवन सुनिश्चित और सुखमय है। सारा लू और उन की मां की बातों को सुनकर नाना और नानी जी के मन की चिंता दूर हो गयी।

हालांकि महामारी के प्रति सारा लू और उन की मां शांति व तर्कसंगत रूप से समझती हैं। लेकिन मां इस बात पर भी दुविधा में पड़ गयी कि सारा लू, जिन के पास हेल्थकेयर का कोई अनुभव नहीं है, महामारी की सब से गंभीर स्थिति में स्वयंसेवक बनना चाहती हैं। अंत में बेटी की जिद से मां ने उन्हें अनुमति दी। स्वयंसेवक बनने के आरंभिक लक्ष्य की चर्चा में सारा लू ने सच्चे दिल से कहा कि पारिवारिक शिक्षा में मैंने दूसरों की मदद देना सीखा है। साथ ही कई साल पहले मैंने रेड क्रॉस में भाग लिया। हालांकि शुरू में मां-बाप को इस बात के लिए समझाना थोड़ा मुश्किल था, लेकिन बाद में उन्होंने मुझे अनुमति दी। आवेदन करने की प्रक्रिया भी सुचारू रूप से हो गयी। इस में विदेशी लोगों व चीनी लोगों के बीच कोई फ़र्क नहीं है। क्योंकि मेरी उम्र सब से छोटी है, इसलिये सभी लोगों ने मेरा ज्यादा ख्याल रखा।

हालांकि स्वयंसेवक बनने में कोई मुश्किल नहीं थी, लेकिन काम करने में आराम नहीं था। सारा लू के सेवा देने का समय दोपहर के 12 बजे से शाम के 6 बजे तक था। इस दौरान वे लगातार हाइवे के प्रवेश द्वार पर यातायात का मार्गदर्शन, इंतज़ाम की रक्षा, तापमान की जांच पड़ताल आदि काम करती थीं। अगर जांच में किसी व्यक्ति का तापमान सामान्य स्थिति से ऊंचा था, तो इस व्यक्ति को थोड़ा आराम करना पड़ता, इस के बाद सारा लू फिर एक बार उन की जांच करती। अगर तापमान पहले की तरह सामान्य नहीं था, तो सारा लू को चिकित्सक को बुलाकर इस बात का प्रबंध करना पड़ा। हर दिन जब सूरज ढल जाता था, तो बाहर का तापमान तेज़ी से गिर पड़ता था। हाइवे के प्रवेश द्वार पर हवा बहुत तेज थी। पर काम करने में यह सब से बड़ी चुनौती नहीं थी। नीति-नियम के अनुसार स्वयंसेवकों को अपनी रक्षा करने के लिये रक्षात्मक कपड़ा पहने पड़े। एक बार रक्षात्मक कपड़े पहने के लिये बहुत समय चाहिये। हाइवे के प्रवेश द्वार पर वाहनों को सुचारू रूप से चलने को सुनिश्चित करने के लिये हर स्वयंसेवक को छह घंटे तक कुछ खाना पीना नहीं होता। हालांकि कुछ भी नहीं खाया पीया, लेकिन लंबे समय तक शौचालय न जाना एक बड़ी चुनौती है, कभी कभार उन्हें यह सहना पड़ा। इस की चर्चा में सारा लू ने शर्म के साथ कहा कि न खाना पीना मेरे लिये एक आसाम बात है, लेकिन शौचालय न जाना सचमुच बहुत मुश्किल है।

अंत में सारा लू ने सफलता के साथ अपना कर्तव्य पूरा किया। यहां तक कि उन्होंने और दो दिन का ओवरटाइम काम भी किया। इतना ही नहीं, हाइवे की सेवा समाप्त करने के बाद उन्होंने जल्द ही समुदाय में महामारी की रोकथाम से जुड़े काम में भाग लिया। समुदाय के द्वार पर वे हर दिन आने-जाने वाले सौ से अधिक लोगों के तापमान की जांच करती हैं, और कूरियर आइटम्स का स्वीकार व प्रबंध करती हैं।

महामारी की रोकथाम में अपनी भूमिका की चर्चा में सारा लू ने अपनी तारीफ़ के बजाय सभी स्वयंसेवकों की खूब प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि मेरी तरह इसी समय चीन की हर जगह पर हर समुदाय में अनगिनत लोग दूसरों की मदद देने के लिये हाथ बटा रहे हैं। हम दूसरों को मास्क पहनने की याद दिलाते हैं, बुजुर्गों की देखभाल करने में मदद देते हैं, और महामारी की रोकथाम से जुड़ी सूचना देते हैं। हम एक साथ कोशिश करते हैं, ताकि महामारी की रोकथाम में अपना योगदान दे सकें।

महामारी में सारा लू की कहानी पर अल्बानिया में विस्तृत ध्यान दिया गया। रिपोर्ट देने के बाद फ़ेसबुक पर 50 हजार से अधिक लोगों ने इसे पढ़ा । नेटिज़नों ने क्रमशः संदेश भेजा कि तुम कमाल हो, तुम बहुत साहसी हो, तुम्हें सलाम इत्यादि।

वर्तमान में महामारी धीरे धीरे से नियंत्रण में हो चुकी है। चीन में अर्थव्यवस्था व समाज का सामान्य संचालन बहाल हो रहा है। महामारी के बाद अपनी इच्छा की चर्चा में सारा लू ने कहा कि अब वे हर दिन विश्वविद्यालय की ऑनलाइन शिक्षा लेती हैं, उन्हें आशा है कि जल्दी से जल्दी उन्हें क्लासरूप में सहपाठियों से मिल सकेगा। उन के अलावा वे छोटे भाई के साथ बाहर दिन भर बास्केटबॉल खेलना चाहती हैं। हमारी उम्मीद है कि उन की इच्छा जल्द ही पूरी हो सकेगी।

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