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नाइजीरिया में फुटबाल का सपना कारखाना

2020-03-05 14:25:35
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दोस्तों, अगर हम अफ़्रीकी ईगल नामक नाइजीरिया टीम की चर्चा करें, तो सॉकर फ़ेंस को ज़रूर इस बात की याद आती है कि पश्चिमी अफ़्रीका से आई इस हरी जर्सी वाली टीम ने अंतर्राष्ट्रीय फुटबाल मंच पर उज्जवल उलब्धियां हासिल कीं। वास्तव में केवल अंतर्राष्ट्रीय फुटबाल मैदान में ही नहीं, नाइजीरिया में भी फुटबाल एक बहुत लोकप्रिय खेल है। इस देश के बड़े या छोटे शहर में यहां तक कि एक छोटे से खुले मैदान पर आप लोगों के फुटबाल खेलने के दृश्य देख सकते हैं। उन में फुटबाल को पसंद करने वाले बच्चे भी शामिल हैं। हालांकि उन के कंधे नंगे हैं, और पैर भी नंगे हैं, लेकिन उन का ध्यान गंभीरता से फुटबाल पर केंद्रित हुआ है। शायद उन में भविष्‌य के फुटबाल सितारे पैदा होंगे।

फुटबाल प्रतिभा ढूंढ़ने के लिये फुटबॉल डिटेक्टिव कुनले इस्माइल अपाम्पाम हर दिन इधर उधर जाकर बच्चों के फुटबाल खेलने को देखते हैं। इस की चर्चा में उन्होंने कहा, पहले हम यह देख सकते हैं कि इस बच्चे के पास फुटबाल खेलने की प्रतिभा होती है या नहीं?क्योंकि प्रतिभा नहीं हटायी जा सकेगी। हमें उन्हें फुटबाल खेलने में अपनी प्रतिभा दिखाने का प्रोत्साहन देना चाहिये।

अपाम्पाम लुगबे फुटबॉल अकादमी के एक फुटबॉल कोच हैं। वे इस व्यवसाय में 20 वर्षों से काम कर रहे हैं। उन के विद्यार्थियों में मुस्ताफा मोहम्मद, देले ओगुंदारे और अबू अलियू जैसे नाइजीरिया में युवा फुटबॉल स्टार शामिल हुए हैं।

आखिर लुगबे फुटबॉल अकादमी कैसी है?जहां से इतने फुटबॉल स्टार पैदा हुए हैं। यह फुटबॉल अकादमी नाइजीरिया की राजधानी अबूजा के उपनगर लुगबे क्षेत्र में स्थित है। अकादमी में सरकार द्वारा मुफ्त में दिया गया एक ट्रेनिंग मैदान है। यह मैदान केवल सूरज के नीचे खुली लाल भूमि ही है। इसलिये बच्चों के दौड़ने व फुटबॉल खेलने में थोड़ी परेशानी होती है। मैदान पर सफेद मार्कर लाइन खींची गयी है। मैदान के दोनों तरफ़ में केवल एक गोल पर टूटा हुआ जाल रखा हुआ है। मैदान के किनारे पर एक सिंपल शेड स्थापित हुई, जहां बच्चे आराम कर सकते हैं। मैदान की चारों तरफ़ पत्थर व लाल ब्रिक्स द्वारा घिरी हुई है। मैदान से ज्यादा दूर नहीं है, गाय व भेड़ें आराम से घास चर रही होती हैं। आसपास कचरे के ढेर भी नज़र में आते हैं।

लेकिन ऐसे ट्रेनिंग वातावरण में कई बुटबॉल स्टार पैदा हुए हैं। अपाम्पाम के अनुसार हाल ही में नाइजीरिया की विभिन्न क्लबों, खास तौर पर क्लास ए. क्लबों में बहुत श्रेष्ठ खिलाड़ी उन के विद्यार्थी थे। उदाहरण के लिये लोबी बैंक टीम के आबोई, लोबी स्टार्स ऑफ़ माकुर्दी टीम के ईज़ेकील तामारा, और रोशनी स्टार ऑफ़ अकुरे के मुस्ताफा मोहम्मद व देले ओगुंदारे आदि।

पर अपाम्पाम ने बल देकर कहा कि फुटबाल खेलना आजीवन कैरियर नहीं है। सौभाग्यशाली व्यक्तियों के शीर्ष फुटबाल खिलाड़ी बनने की संभावना है। और उन का काम तो अकादमी में प्रवेश करने वाले हर बच्चे को ज्यादा से ज्यादा विकल्प देना है। अगर बच्चा एक व्यावसायिक फुटबाल खिलाड़ी नहीं बन सकता, या खिलाड़ी बनने के बाद सेवानिवृत होकर या चोट खाने के बाद उन्हें भी एक रोजगार मिल सकेगा। इसलिये अपाम्पाम ने फुटबाल खेलने के कौशल के अलावा बच्चों की सांस्कृतिक कक्षा की पढ़ाई पर भी बड़ा ध्यान दिया। उन्होंने कहा कि, अकादमी में पढ़ने वाले सभी बच्चे मुझे सड़क पर मिले। मैंने उन के मां-बाप को यह वचन दिया है कि बच्चों को बुनियादी शिक्षा मिल सकती है। साथ ही मैंने यह सलाह भी दी कि अकादमी के सभी बच्चे फुटबाल ट्रेनिंग से पहले सांस्कृतिक शिक्षा लेते हैं। मुझे यह काम करते हुए लगभग 20 वर्ष हो चुके हैं। मैं इसे जारी रखूंगा। अब मेरे विद्यार्थी नाइजीरिया के विभिन्न फुटबाल क्लबों में खेल रहे हैं।

वर्तमान में लुगबे फुटबॉल अकादमी में लगभग 50 लड़के पढ़ रहे हैं। उन्हें तीन आयु वर्गों में विभाजित किया गया है। 8 से 10 वर्ष की आयु तक एक वर्ग है। 11 से 15 वर्ष की आयु तक एक वर्ग है, और 15 से 22 वर्ष की आयु तक एक वर्ग है। अभ्यास हर दिन सुबह से शुरू होता है। ताकि बच्चों को अभ्यास के बाद घर में वापस लौटकर नहाने व नाश्ता करने का समय मिल सके। फिर वे स्कूल में जाकर पढ़ाई कर सकते हैं। बच्चों को पढ़ाई के पर्याप्त समय को सुनिश्चित करने के लिये अकादमी में रात को अभ्यास का प्रबंध कभी नहीं किया जाता। हर शुक्रवार व सप्ताहांत में फुटबाल मैच आयोजित होती है। श्रेष्ठ बच्चों को इससे मौका मिल सकता है।

अपाम्पाम ने परिचय देते हुए कहा कि उन के बहुत विद्यार्थी गरीब परिवारों से हैं। ऐसे परिवार में एक फुटबाल खरीदने का पैसा भी नहीं मिल सकता। यहां तक कि पानी की बोतल भी उन के फुटबाल ट्रेनिंग में एक साधन बन सकती है। लेकिन फुटबाल खेल ने उन बच्चों व उन के परिवारों को बड़ा बदलाव लाया। इस की चर्चा में अपाम्पाम ने कहा, अकादमी में पढ़ने वाले बच्चों और उन के परिवारों को फुटबाल द्वारा दिया गया फायदा मिल रहा है। फुटबाल से उन बच्चों का जीवन तरीका बदल रहा है। वे पैसे कमाकर अपने परिवार की सहायता भी दे सकते हैं।

अपाम्पाम ने एक उदाहरण लेकर कहा कि जब अपाम्पाम पहली बार मुस्तफा मोहम्मद को मिले, तो उसी समय वे सड़क पर फुटबाल खेल रहे थे। उन का परिवार बहुत गरीब था। घर में एक ही घरेलू उपकरण नहीं था। अकादमी में पढ़ाई व ट्रेनिंग करने के बाद सौभाग्य से मुस्तफ़ा को कानो पिलर्स ऑफ़ कानो टीम में चुना गया। इस के बाद वे गोम्बे यूनाइटेड टीम में फुटबाल खेलते थे। फिर उन्हें रोशनी स्टार ऑफ़ अकुरे टीम में स्थानांतरित किया गया। अब मुस्तफ़ा की मासिक आय लगभग छह हजार आरएमबी से अधिक है। बेशक अगर क्लब ने किसी विद्यार्थी को चुना है, तो उसे अकादमी को कुछ फ़ीस भी देना पड़ती है। ताकि अकादमी का संचालन चल सके।

उच्च वेतन, सितारे के गौरव, और जिन्दगी के बदलाव से नाइजीरिया के अधिक से अधिक युवा फुटबाल खेलने को एक शौक से व्यवसाय के रूप में चुनने लगे हैं।

पता नहीं कि लुगबे फुटबॉल अकादमी जैसे फुटबाल के सपने कारखाना नाइजीरिया में कितने हैं?अपाम्पाम का अनुमान है कि कम से कम एक हजार से अधिक है। हर साल फुटबाल प्रतिभा प्राप्त बच्चों ने ऐसे अकादमी में प्रवेश करके ट्रेनिंग की बड़ी कोशिश की, फिर एक एक मैच में अपनी प्रतिभा दिखायी। अंत में उन में सौभाग्यशाली व्यक्ति फुटबाल सितारा बन सकते हैं। श्रेष्ठ खिलाड़ी को नाइजीरिया की राष्ट्रीय टीम में प्रवेश करने का मौका भी मिल सकता है। आज तक यह मिथक नाइजीरिया में दिख रहा है। जिस में फुटबाल खेल के प्रति यहां के लोगों का प्रेम जाहिर हुआ है।

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