महामारी में चिकित्सक शू चिनह्वा की कहानी

2020-02-24 17:09:45
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“मुझे अलगाव वार्ड में काम करना है। मैंने हर समय पर इस की तैयारी की है।”महामारी के सामने यह चिकित्सक शू चिनह्वा का जवाब है। चिकित्सक शू पेइचिंग के फ़ंगथाई जिले में स्थित पारंपरिक चीनी चिकित्सा व पश्चिमी चिकित्सा एकीकृत अस्पताल में काम करती हैं। आम जीवन में वे आपातकालीन चिकित्सा विभाग में काम करती हैं। क्योंकि इस बार एनसीपी महामारी की स्थिति बहुत गंभीर है। इसलिये चिकित्सक शू का अस्पताल भी पुष्ट मामलों का इलाज करने वाले निश्चित अस्पतालों में से एक बन गया। वर्ष 2020 के वसंत त्योहार से पहले नोवेल कोरोना वायरस निमोनिया से लड़ने के लिये चिकित्सक शू ने वसंत त्योहार की छुट्टी में बेटे को लेकर पर्यटन करने की योजना को छोड़कर अलगाव वार्ड में सब से पहले प्रवेश कर काम शुरू किया।

अलगाव वार्ड में जाने से पहले सभी चिकित्सकों को शारीरिक जांच करनी पड़ी। शू चिनह्वा के परिणाम से यह जाहिर हुआ है कि उन का श्वेत रक्त कोशिका सूचकांक केवल 3.3 था। जो सामान्य सूचकांक से थोड़ा कम हुआ। इसलिये अस्पताल के नेता ने उन की शारीरिक स्थिति की चिंता की, और उन्हें अलगाव वार्ड में न जाने का सुझाव दिया। लेकिन चिकित्सक शू ने दृढ़ता से जवाब दिया कि मैं चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की एक सदस्य हूं, और सार्स के दौरान मैंने भी अलगाव वार्ड में काम किया और खूब अनुभव प्राप्त किये। मुझे यह काम करना चाहिये। चिंता मत करो, मैंने हर समय पर अलगाव वार्ड में काम करने की तैयारी की है।

वास्तव में 17 वर्ष पहले चिकित्सक शू तो सार्स की रोकथाम में व्यस्त थीं। उन्हें फ़ंगथाई जिले में सार्स की रोकथाम में श्रेष्ठ व्यक्ति और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की श्रेष्ठ सदस्य की उपाधि मिली। इस बात की चर्चा में चिकित्सक शू ने कहा कि सार्स के दौरान मैं अलगाव वार्ड में काम करने वाले पहले खेप वाले चिकित्सकों में से एक थी। इस बार भी मैंने सब से पहले अलगाव वार्ड में प्रवेश करके पहले पुष्ट रोगी की सेवा की।

पता चला है कि अलगाव वार्ड में काम करने के प्रति शू चिनह्वा के परिजनों के अलग अलग विचार हैं। चिकित्सक शू ने कहा कि क्योंकि मेरे ससुर व सास दोनों सीपीसी के सदस्य हैं, इसलिये उन्होंने शुरू से ही मेरा बड़ा समर्थन दिया, और मुझे महामारी के खिलाफ़ लड़ाई में सब से आगे जाने का प्रोत्साहन दिया। लेकिन मेरे अपने मां-बाप ने इस बात पर खूब चिंता व्यक्त की। इसलिये मैंने उन्हें ज्यादा नहीं बताया, केवल यह कहा कि हम तैयारी कर रही हैं।

फिर अलगाव वार्ड में जाने से पहले शू चिनह्वा ने अपनी मां से फ़ोन पर बातचीत की। क्योंकि उन के मां-बाप बूढ़े हैं, इसलिये 43 वर्षीय शू चिनह्वा ने अपनी जिन्दगी में पहले झूठ बोला। उन्होंने कहा“मां, माफ़ कीजिये, मुझे आप की इच्छा का विरुद्ध करना पड़ा। पर मुझ पर विश्वास कीजिये। मैं ज़रूर सुरक्षा से आप के पास वापस लौटूंगी।”पर वास्तव में चिकित्सक शू अलगाव वार्ड में काम करने के खतरों को खूब समझती हैं। क्या वे सुरक्षित वापस लौट सकेंगी?इस के प्रति वे भी सुनिश्चित नहीं कर सकेंगी।

अगर हम चिकित्सक शू को महामारी से लड़ाई के मोर्चे में एक नायिका मानते हैं। तो शू के पति उन के पीछे एक वीर भी हैं। इस की चर्चा में चिकित्सक शू ने कहा कि मेरा सब से बड़ा समर्थन देने वाले तो मेरे पति ही हैं। वे मुझे समझते हैं, और मेरे चरित्र को जानते हैं। इसलिये वे बेटे को लेकर गृहनगर में वापस लौटे, ताकि मेरे काम में डिस्टर्ब न हो।

अलगाव वार्ड में काम करने की स्थिति की चर्चा में चिकित्सक शू ने हमें बताया कि हमारे नेता सभी चिकित्सकों का ख्याल रखते हैं। इसलिये हम हर दिन अलगाव वार्ड में केवल चार घंटों तक काम करते हैं। काम करने में सब से बड़ी मुश्किल तो यह है कि सुरक्षात्मक कपड़ा पहनकर पहले घंटे में खूब तकलीफ़ आयी। जैसे सांस लेने में कठिनाई होती है, काम में लचीलापन नहीं है, और सुरक्षात्मक चश्मे पर अकसर कोहरा आता है। हम न सिर्फ़ चिकित्सा कार्य करती हैं, बल्कि कचरा बाहर निकालना, वार्ड की सफाई करना, रोगियों को भोजन देना, और कीटाणुशोधन करना आदि सभी कामों को भी चिकित्सकों व नर्सों को करना पड़ता है। साथ ही लंबे समय तक सुरक्षात्मक कपड़े पहने के कारण त्वचा पर दबाव अल्सर पैदा करने और हाथ छिलने की स्थिति भी होती है। खास तौर पर जब आंसू या पसीना चेहरे पर आया, लेकिन आप इसे नहीं पोंछ सकते। जैसे चेहरे पर एक छोटा कीड़ा रेंग रहा है। इतनी खुजली है कि लोग मुश्किल से यह सह सकते हैं।

क्योंकि अलगाव वार्ड में सभी चिकित्सक सुरक्षात्मक कपड़ों में होते हैं, इसलिये एक दूसरे को पहचाना भी मुश्किल होता है। आदान-प्रदान में सुविधा देने के लिये उन्होंने सुरक्षात्मक कपड़ों पर अपना नाम लिखा है, साथ ही जेक दो जैसे शब्द भी लिखे हुए हैं। नाम तो दूसरे चिकित्सकों के लिये लिखा हुआ, और जेक दो तो रोगियों के लिये लिखा हुआ है। शब्द लिखते समय शू ने अपने साथी से कहा कि मेरे पीठ पर डरो मत लिखिये। ताकि रोगी यह देखकर न घबराएं।

हर बार जब शू चिनह्वा ने अलगाव वार्ड के द्वार को खोला, तो उन्होंने देखा कि सभी रोगी रजाई में लिपटे हुए मास्क पहनकर चुपचाप से लेटे हुए हैं। उसी समय उन्होंने महामारी के प्रति रोगियों के डर को गहन रूप से महसूस किया। इसलिये शू चिनह्वा ने रोगियों की शारीरिक समस्याओं का इलाज करने के साथ उन की मानसिक स्थिति पर भी बड़ा ध्यान दिया, और रोगियों के मन में महामारी की रोकथाम के लिये एक मानसिक किले का निर्माण करने में मदद दी। उन के अनुसार इस बार महामारी की स्थिति बहुत गंभीर है, इसलिये रोगी यहां तक कि चिकित्सक भी इस के प्रति घबराते हैं।

शू चिनह्वा व उन के साथी हर दिन रोगियों की मानसिक स्थिति का मूल्यांकन करते हैं, और रोगियों को आराम करवाते हैं। उन की कोशिश से रोगी धीरे धीरे डर से मुक्त हो गये, और चिकित्सकों व रोगियों के बीच एक दूसरे का बड़ा विश्वास करते हैं। साथ ही रोगियों के बीच भी आपस में प्रोत्साहन दिया जाता है।

इस की चर्चा में चिकित्सक शू ने हमें बताया कि हमारे अस्पताल में एक 70 से अधिक वर्षीय बूढ़े रोगी का इलाज किया गया। उन्होंने अलगाव वार्ड में पहुंचते ही मुंह में मरने की बातें बारी बारी कहीं। क्योंकि ये बूढ़े अकेले हैं, और उन की स्थिति बहुत गंभीर है, वे अपने आप की देखभाल नहीं कर सकते। इसलिये वे बहुत निराश हो गये। फिर हम एक तरफ़ उन्हें मनोवैज्ञानिक परामर्श देते थे, एक तरफ़ परिजन की तरह उन की देखभाल करते थे। बाद में उन्हें और अच्छी तरह से इलाज देने के लिये एक सैन्य अस्पताल में स्थानांतरण किया गया। वहां से जाने के दिन बूढ़े बहुत प्रभाविक हुए, और आंसू भी बहाये। हमने भी आंसू बहाये।

गौरतलब है कि इन्टरव्यू देते समय चिकित्सक शू ने अकसर यह बात कही कि ये सभी छोटी बातें ही हैं। जो रिपोर्ट देने के योग्य नहीं हैं। यह मेरा काम है, मेरी जिम्मेदारी है। फ़ंगथाई जिले के पारंपरिक चीनी चिकित्सा व पश्चिमी चिकित्सा एकीकृत अस्पताल के अलगाव वार्ड में काम करने वाले 20 चिकित्सक शू चिनह्वा की तरह विशेष अलगाव क्षेत्र में काम करते हैं, भोजन करते हैं, और आराम करते हैं। हालांकि वे अपने परिजनों से नहीं मिल सकते, लेकिन ज्यादा से ज्यादा रोगियों को स्वस्थ बनाकर परिजनों से मिलने के लिये उन्हें सुरक्षात्मक कपड़े पहनकर अलगाव वार्ड में प्रवेश करना है, और महामारी से लड़ना है। हमारी नज़र में वे सब से प्यारे व्यक्ति हैं।

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