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महिला फिल्म मंच चीन के हाईनान में आयोजित

2019-12-26 16:33:07
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दोस्तों, दूसरे हाईनान अंतर्राष्ट्रीय फिल्म दिवस में 6 दिसंबर को एक महिला फिल्म मंच आयोजित किया गया। जिस का मुद्दा है महिला फिल्म में सृजन व महिला छवि की सुन्दरता। इस मंच में उपस्थित मेहमानों ने निम्न प्रश्नों पर विचार-विमर्श किया कि महिलाओं पर केंद्रित फिल्में आखिर क्या होती हैं?ज्यादा बेहतर महिला प्रधान फिल्में कैसे बनायी जा सकती हैं?और भविष्य में महिला फिल्म के विकास की रुझान क्या होगी?

महिला प्रधान फिल्में क्या होती हैं?जो इस वर्ष में हाईनान अंतर्राष्ट्रीय फिल्म दिवस में आयोजित महिला फिल्म मंच में पेश किया गया पहला प्रश्न है। इस की चर्चा में निर्देशक, पटकथा लेखक और निर्माता सुश्री चिन ईमंग ने कहा कि महिला प्रधान फिल्मों का विषय बहुत विस्तृत है। उन की निर्देशक या निर्माता शायद महिलाएं होती हैं, या फिल्मों का विषय महिलाओं से जुड़ा हुआ होता है। पर सब से महत्वपूर्ण बात यह है कि इस में महिलाओं पर ध्यान दिया जाता है। उन्होंने कहा,महिला प्रधान फिल्में अवश्य ही महिलाओं के दृष्टिकोण से बनायी जाती है। फ़िल्म में महिलाओं के जीवन की स्थिति, महिलाओं की भावना दुनिया, महिलाओं के विकास में प्राप्त अनुभव, और महिलाओं का नैतिक मूल्य आदि शामिल होते हैं। वह शायद कमजोर हैं, शायद साहसी हैं। पर उनके मन में बहुत शक्ति छिपी हुई होती है।

चिन ईमंग ने फ़िल्म《बहुत सुन्दर》और《एक रात का आश्चर्य》आदि फिल्मों का निर्देशन किया था। उन के अनुसार वास्तव में महिला प्रधान फिल्में अन्य प्रकार की फिल्मों से अलग नहीं होती हैं। सभी फिल्मों के तरीके से एक अच्छी कहानी बताना या किसी भावना व विचार का प्रसार-प्रचार करना चाहती हैं। ताकि ज्यादा से ज्यादा दर्शकों को आकर्षित किया जा सके।

महिला फिल्म निर्माण की चर्चा में पटकथा लेखक राओ श्वेएमान ने कहा कि चाहे साहित्य हो या फिल्म हर किसी के लिए अपनी विशेषता का ध्यान रखना बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सच्चे दिल से कहा कि पहले उन्होंने एक लेखक से पटकथा लेखक बनकर कई उपन्यासों को स्क्रिप्ट में बदल दिया। क्योंकि उन्हें आशा है कि फ़िल्म में उपन्यास की विशेषता बहाल हो सकेगी। इस की चर्चा में उन्होंने कहा,महिला लेखक होने के नाते चाहे तुम एक लेखक हो, या एक पटकथा लेखक, तुम्हें अपनी विशेषता बहाल करनी होती है। मुझे आशा है कि अगर लोग मेरी रचनाएं पसंद करते हैं, तो मुझे अच्छा लगता है। क्योंकि इस में मेरी विशेषता होती है।

उपस्थित मेहमानों ने कहा कि कई सालों में महिला फिल्म जगत यहां तक कि सारे समाज में वंचित स्थिति में रहती आयी हैं। इस वास्तविकता के मद्देनज़र महिला फिल्म की लोकप्रियता व आवश्यकता पैदा हुई। चीन-यूरोप महिला फिल्म प्रदर्शनी की संस्थापक और हाईनान अंतर्राष्ट्रीय फिल्म दिवस की सलाहकार यांग ईंग ने कहा कि महिला फिल्म महिला की मुक्त अभिव्यक्ति की पुष्टि हैं। साथ ही वह महिला व पुरुष के बीच आपसी सम्मान करने और सामंजस्यपूर्ण रूप से रहने के लिये लाभदायक भी है। उन्होंने कहा,मैं इस नारीवाद को स्वीकार करती हूं कि हम सही ढंग से महिला के पसंदीदा तरीके द्वारा अपना विचार व्यक्त कर सकती हैं। महिला व पुरुष को एक दूसरे का सम्मान करना चाहिये, और आपस में अपनी अपनी दिशा का सम्मान भी करना चाहिये।

भविष्य में विकास की रुझान की चर्चा में चिन ईमंग ने कहा कि पिछली शताब्दी के 70वें दशक से अब तक महिला फ़िल्मों पर ज्यादा से ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। यह समाज की प्रगति और महिला के स्थान की उन्नति से अलग नहीं हो सकता। भविष्य में महिला प्रधान फिल्मों में नारीवाद व वीरता से जुड़े विषय ज्यादा से ज्यादा होंगे।《तुम्हें ढूंढ़ा》आदि फिल्मों की निर्माता छन चे ने इस से सहमत होकर कहा,मुझे रोष का मार्ग नामक यह फ़िल्म बहुत पसंद है। क्योंकि इस में बहुत विशेष पंक सौंदर्यशास्त्र भरा हुआ होता है। और फिल्म की अभिनेत्री बहुत शक्तिशाली हैं। मुझे लगता है कि यह महिला फिल्म की एक दिशा होगी। उन के अलावा मेरे दिल में《छो जू की कहानी》और《तीन बिलबोर्ड》जैसी महिला फिल्में भी अच्छी हैं। इस वर्ष महिला फिल्म के बाजार ने बारी बारी से हमें यह संदेश भेजा कि दर्शक सही व्यक्ति, वास्तविक मुश्किलें, और सच्ची शक्ति देखना चाहते हैं।

सीना निवेश की उप जनरल मैनेजर च्यांग इंगछुन ने बाजार की दृष्टि से सुझाव देते हुए कहा कि अनुसंधान से यह जाहिर हुआ है कि महिला इस बात का फैसला करने में निर्णायक भूमिका अदा करती हैं कि कौन सी फिल्म देखी जाएगी। यह साबित हुआ है कि महिला फिल्म दर्शक एक बड़ी निहित शक्ति हैं। फिल्म निर्माता को महिला दर्शकों का ज्यादा विश्लेषण करना चाहिये। ताकि ज्यादा लक्षित फिल्म बनायी जा सके। उन्होंने कहा,आंकड़ों के अनुसार आधुनिक महिलाओं की वैश्विक खपत 200 खरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गयी है। उन में 70 से 80 प्रतिशत तक महिलाओं के ख्याल से वे सकारात्मक रूप से यह खर्च करती हैं। इसलिये मुझे लगता है कि इस बात से यह जाहिर हुआ है कि भविष्य में हमें बड़े साहस के साथ महिला फिल्में बनानी चाहिये, क्योंकि महिलाएं कौन सी फिल्म देखने का फैसला करेंगी। अगर फिल्म का विषय अच्छा है, तो ज़रूर अच्छा परिणाम मिल सकेगा।

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