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महिला राजदूत च्यांग येन ने चीन-उज़्बेकिस्तान संबंधों की चर्चा की

2019-11-14 20:00:39
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दोस्तों, 1 से 2 नवंबर तक चीनी प्रधानमंत्री ली खछ्यांग ने उज़्बेकिस्तान की औपचारिक यात्रा की, और उज़्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में आयोजित शांगहाई सहयोग संगठन के सदस्य देशों की सरकारी नेता परिषद के 18वें सम्मेलन में भाग लिया। 29 अक्तूबर को उज़्बेकिस्तान स्थित चीनी राजदूत सुश्री च्यांग येन ने हमारे संवाददाता को इन्टरव्यू देते समय कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिरज़ियोयेव के रणनीतिक नेतृत्व में चीन व उज़्बेकिस्तान के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदार संबंधों का तेज विकास हुआ है। जो इतिहास में सब से अच्छे दौर में हैं। विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की समृद्ध उपलब्धियां हासिल हुई हैं। इस बार प्रधानमंत्री ली खछ्यांग ने छह सालों के बाद फिर एक बार उज़्बेकिस्तान में जाकर शांगहाई सहयोग संगठन के सदस्य देशों के सरकारी नेता परिषद के सम्मेलन में भाग लिया। जिससे दोनों देशों के संबंधों को एक नयी मंज़िल पर पहुंचाया जाएगा।

पुरातन रेशम मार्ग और रेशम मार्ग आर्थिक पट्टी में एक महत्वपूर्ण देश के रूप में उज़्बेकिस्तान ने मध्य एशिया के पाँच देशों में सब से पहले चीन के साथ औपचारिक रूप से राजनयिक संबंधों की स्थापना की है। दोनों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 20 वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में दोनों देशों का सहयोग सुचारु रूप से चल रहा है। वर्ष 2016 के जून में चीन-उज़्बेकिस्तान संबंध औपचारिक रूप से व्यापक रणनीतिक साझेदार संबंधों तक उन्नत हो गये। राजदूत सुश्री च्यांग येन ने कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिरज़ियोयेव के रणनीतिक नेतृत्व में चीन व उज़्बेकिस्तान के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदार संबंधों का तेज विकास हुआ है। जो इतिहास में सब से अच्छे दौर में गुजर रहे हैं। विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की समृद्ध उपलब्धियां हासिल हुई हैं। उन के अनुसार,राजनीति के पक्ष में चीन व उज़्बेकिस्तान के बीच आपसी विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है। दोनों देशों के नेताओं ने इस साल में कई बार मुलाकात की है, और सिलसिलेवार महत्वपूर्ण सहमतियां प्राप्त कीं। जिन्होंने द्विपक्षीय संबंधों के विकास के लिये एक स्पष्ट दिशा दिखायी। साथ ही दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने इस साल सफलता से एक दूसरे देश की यात्रा की। चीन व उज़्बेकिस्तान की सरकारों के बीच सहयोग कमेटी का संचालन ठीक ढंग से चल रहा है। जो दोनों देशों के बीच सहयोग का निर्देशन व समन्वय करने की भूमिका अदा कर रही है। उन के अलावा संसदों, विभिन्न मंत्रालयों और क्षेत्रीय विभागों के बीच आदान-प्रदान भी बहुत घनिष्ठ हैं। व्यावहारिक सहयोग के पक्ष में द्विपक्षीय व्यापार राशि ने बारी बारी नया रिकॉर्ड बनाया। व्यापार का ढांचा निरंतर रूप से बेहतर बन रहा है। हाल के कई वर्षों में चीन लगातार उज़्बेकिस्तान का सब से बड़ा व्यापार साझेदार देश होने के साथ सब से बड़ा आयातित स्रोत देश और सब से बड़ा निर्यातित गंतव्य देश भी है। वर्तमान में उज़्बेकिस्तान में स्थित चीनी पूंजी वाले उद्यमों की संख्या 1500 से अधिक पहुंच चुकी है। जो उज़्बेकिस्तान की विभिन्न व्यवसायों से संबंधित हैं। मानवीय संस्कृति के पक्ष में चीनी भाषा सीखना उज़्बेकिस्तान में बहुत लोकप्रिय है। उज़्बेकिस्तान में दो कंफ्यूशियस कॉलेज मौजूद हैं। जहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या निरंतर रूप से बढ़ रही है। साथ ही चीन आकर पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या भी दिन-ब-दिन बढ़ रही है। अभी तक यह संख्या 7 हजार से अधिक हो चुकी है। उन के अलावा चिकित्सा व दवा, पुरातत्व और पर्यटन आदि क्षेत्रों में भी नये वृद्धि बिंदु और कार्यक्रम मौजूद हुए हैं।

ताशकंद में आयोजित शांगहाई सहयोग संगठन के सदस्य देशों की सरकारी नेता परिषद के सम्मेलन की चर्चा में सुश्री च्यांग येन ने कहा कि वर्तमान में विश्व में अभूतपूर्व बड़ा परिवर्तन आया है। व्यापार संरक्षणवाद और एकपक्षीयवाद फिर सक्रिय हैं। बल-राजनीति और शून्य-राशि का खेल भी प्रचलित है। खास तौर पर व्यापारिक प्रभुत्ववाद फिर एक बार नज़र में आया है। अंतर्राष्ट्रीय स्थिति में नयी गंभीर चुनौती मौजूद है। ऐसी पृष्ठभूमि में शांगहाई सहयोग संगठन के सदस्य देशों के प्रधानमंत्रियों की नियमित भेंट का खास महत्व है। उन्होंने कहा,शांगहाई सहयोग संगठन की स्थापना के बाद वह हमेशा से शांगहाई भावना का पालन करता है, एकता व आपसी विश्वास को मजबूत करता है, विभिन्न क्षेत्रों के आपसी लाभ व सहयोग को गहन करता है। साथ ही वह क्षेत्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मामलों में भाग लेता है, और क्षेत्रीय शांति व विकास को मजबूत करने और अंतर्राष्ट्रीय निष्पक्षता व न्याय की रक्षा करने में महत्वपूर्ण रचनात्मक भूमिका अदा करता है। हमें विश्वास है कि इस बार के सम्मेलन में विभिन्न देशों के नेता शांगहाई सहयोग संगठन के ढांचे के तले अर्थव्यवस्था, व्यापार और पूंजी-निवेश आदि क्षेत्रों के व्यावहारिक सहयोग को गहन करने, बहुपक्षीय व्यापारिक व्यवस्था को मजबूत करने, खुली वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थापना करने, और क्षेत्रीय शांति व स्थिरता की रक्षा करने पर गहन रूप से विचार-विमर्श करेंगे। संयुक्त विज्ञप्ति जारी होने के साथ सिलसिलेवार सहयोग दस्तावेजों पर भी हस्ताक्षर किये जाएंगे। ताकि शांगहाई सहयोग संगठन के अगले चरण के विकास के लिये नयी शक्तिशाली ऊर्जा डाली जा सके।

वर्ष 2016 के दिसंबर में उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिरज़ियोयेव ने पद संभाला, और उज़्बेकिस्तान में सुधार व खुलेपन की नीति लागू की। उन्होंने आर्थिक विकास पर बल देकर व्यापार के वातावरण को बेहतर बनाने में बड़ी कोशिश की। सुश्री च्यांग येन ने कहा कि हाल के कई वर्षों में उज़्बेकिस्तान का बड़ा विकास हुआ है। जिसने चीन- उज़्बेकिस्तान संबंधों के विकास, खास तौर पर चीन व उज़्बेकिस्तान के बीच व्यावहारिक सहयोग के लिये बड़ा मौका दिया। उन्होंने कहा, मिरज़ियोयेव ने राष्ट्रपति का पद संभालने के बाद तीन सालों में बड़े साहस के साथ देश में सुधार किया है। बाहरी दुनिया के प्रति उन्होंने खुलेपन की नीति अपनायी। और राजनीति के पक्ष में मिरज़ियोयेव के नेतृत्व में उज़्बेकिस्तान ने राष्ट्रीय संस्थाओं का पुनर्गठन किया और भ्रष्टाचार का कड़ा विरोध किया। जिससे राजनीतिक वातावरण बेहतर हो गया। आर्थिक क्षेत्र में उन्होंने पूंजी-निवेश आकर्षित किया, और निर्यात का विस्तार किया। उन्होंने 20 वर्षों तक चली विदेशी मुद्रा नियंत्रण की नीति को रद्द किया, कर व सीमा शुल्क से जुड़े सुधार को गहन किया, और व्यापार वातावरण को बेहतर बनाने की बड़ी कोशिश की। मुझे विश्वास है कि उज़्बेकिस्तान द्वारा किया गया सुधार व खुलापन ज़रूर उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रीय निर्माण में ज्यादा बड़ी सफलता देगा, साथ ही वह चीन-उज़्बेकिस्तान संबंधों के विकास, खासतौर पर दोनों देशों के व्यावहारिक सहयोग को बड़ा मौका देगा।

उन के अलावा राजदूत च्यांग येन ने यह भी कहा है कि कुछ समय पहले उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति मिरज़ियोयेव ने यह घोषणा की कि अगले वर्ष की 1 जनवरी से चीनी नागरिकों के प्रति उज़्बेकिस्तान 7-दिन की वीजा-मुक्त प्रणाली लागू करेगा। विश्वास है कि इस कदम से दोनों देशों के लोगों के बीच आदान-प्रदान को ज्यादा सुविधाएं मिल सकेंगी, श्रेष्ठ चीनी उद्यमों को उज़्बेकिस्तान में व्यापार करने का प्रोत्साहन मिलेगा, और ज्यादा से ज्यादा आपसी लाभ व समान जीत वाले कार्यक्रमों का विकास किया जा सकेगा।

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