अफ़्रीकी गर्भवती महिलाओं व नवजात शिशुओं को जान की परी नामक कार्यक्रम से लाभ मिला

2019-09-19 15:29:41
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दोस्तों, हाल ही में जान की परी नामक अफ़्रीकी दाई सहायक प्रशिक्षण की दूसरी अवधि की शुरूआत रस्म चीन के चच्यांग प्रांत के वनचो चिकित्सा विश्वविद्यालय में आयोजित की गयी। इस बार के प्रशिक्षण में तंजानिया, घाना, युगांडा, रवांडा, नाइजीरिया और जाम्बिया आदि देशों से आए 25 अफ़्रीकी प्रशिक्षु शामिल हुए।

वनचो चिकित्सा विश्वविद्यालय में गर्भवती महिला व नवजात शिशु की देखभाल करने से जुड़े प्रशिक्षण ले रही तंजानिया की प्रशिक्षु मूवाचा हाप्पिनेस टिब्रूस ने कहा कि वे यहां से हासिल जानकारियां लेकर अपने देश में वापस लौटकर अफ़्रीका में मातृ व शिशु के स्वास्थ्य को मजबूत करने के लिये योगदान देना चाहती हैं। उन के अनुसार,मेरे देश में अगर गर्भवती महिला शिशु को जन्म देने वाली होती है, पर उनका घर अस्पताल से बहुत दूर हो, तो उन्हें अस्पताल ले जाना संभव नहीं होगा। अगर ज्यादा से ज्यादा लोग दाई का काम जानती हैं, तो उन गर्भवती महिलाओं की मदद की जा सकेगी। साथ ही शिशु को जन्म देने के दौरान गर्भवती के सामने मौजूद खतरों को भी कम किया जा सकेगा।

जान की परी नामक अफ़्रीकी दाई सहायक प्रशिक्षण कार्यक्रम वर्ष 2018 के 20 अगस्त से औपचारिक रूप से शुरू हुआ। जिस का उद्देश्य है चीन में गैर-चिकित्सा पृष्ठभूमि वाले अफ़्रीकी विद्यार्थियों को दाई सहायक से जुड़ी तकनीकों का प्रशिक्षण देना, अफ़्रीकी युवा बुद्धिजीवियों में महिला व शिशु के स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारियों का प्रसार-प्रचार करना। ताकि उन्हें प्रशिक्षित करने से अफ़्रीका में गर्भवती महिलाओं व नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य स्तर को उन्नत किया जा सके। पहली अवधि के प्रशिक्षण में कुल 15 अफ़्रीकी विद्यार्थी शामिल थे। वनचो चिकित्सा विश्वविद्यालय के नर्स कॉलेज के प्रधान, वनचो चिकित्सा विश्वविद्यालय के अधीन प्रथम अस्पताल के उप प्रधान लू चोंगछो ने कहा कि बेल्ट एंड रोड और चीन-अफ़्रीका सहयोग व समान जीत के पहल के जवाब में वनचो चिकित्सा विश्वविद्यालय ने अफ़्रीका के प्रति चिकित्सा सुयोग्य व्यक्तियों को शिक्षा व प्रशिक्षण देने को मजबूत करने का वास्तविक कदम उठाया है। उन्होंने कहा,हम लगातार अपने विश्वविद्यालय की श्रेष्ठता से लाभ उठाकर अफ़्रीकी देशों को मदद देकर चिकित्सा स्थिति में सुधार करने का उपाय ढूंढ़ रहे हैं। पिछले वर्ष से हमने दाई सहायक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया। आशा है इस तरह के प्रशिक्षण से अफ़्रीकी देशों में गर्भवती महिलाओं व नवजात शिशुओं का स्वास्थ्य स्तर उन्नत हो सकेगा।

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष और विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी विश्व दाई के काम की स्थिति रिपोर्ट से यह जाहिर हुआ है कि अफ़्रीकी देशों में शिशुओं का जन्म देते समय महिलाओं की मृत्यु दर 8 प्रतिशत से अधिक है। जो विश्व में गर्भवती महिलाओं की औसत मृत्यु दर 0.2 प्रतिशत से ज्यादा ऊंची है। दाई गर्भवती महिलाओं की रक्षक के रूप में गर्भवती महिलाओं व नवजात शिशुओं की मृत्यु दर को कम करने, और गर्भवती की स्वास्थ्य स्थिति में सुधार करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती हैं।

इस बार अफ़्रीकी दाई सहायक प्रशिक्षण कार्यक्रम 16 जुलाई से शुरू हुआ, और दो हफ्ते तक चला। शिक्षा में सिद्धांत व अभ्यास दो भाग शामिल हुए हैं। कक्षा शिक्षण के साथ प्रयोगशाला में अभ्यास, नैदानिक अवलोकन, और सामाजिक अभ्यास भी होते हैं। प्रशिक्षण के बाद परीक्षा से विद्यार्थियों का मूल्यांकन किया गया। इस कार्यक्रम के प्रधान चेन छोंग ने परिचय देते हुए कहा कि,हमने विद्यार्थियों को प्रसव पूर्व देखभाल की जानकारियां दीं। उदाहरण के लिये गर्भवती महिलाओं को कैसे मनोवैज्ञानिक व तकनीकी समर्थन दिया जाय?शिशु को जन्म देने के बाद महिलाओं की देखभाल कैसे करें?इस में स्तनपान व शिशुओं की देखभाल, स्नान व मालिश और खतरनाक स्थिति का निपटारा आदि शामिल हुए हैं।

घाना से आई विद्यार्थी अन्ना अन्न मारी तो स्त्री रोग विभाग की एक विद्यार्थी हैं। उन्होंने कहा कि इस बार के प्रशिक्षण में भाग लेने से उन की चिकित्सा से जुड़ी जानकारियां और विस्तृत हो गयीं। आशा है कि भविष्य में चीन व अफ़्रीका के बीच ज्यादा से ज्यादा चिकित्सा सहयोग कार्यक्रमों से ज्यादा से ज्यादा अफ़्रीकी लोगों को लाभ मिलेगा। मारी ने कहा,इस बार के प्रशिक्षण में मैंने दाई के काम से जुड़ी बहुत जानकारियां प्राप्त कीं। अपने देश में वापस लौटने के बाद मैं ज्यादा लोगों को इस बारे में जानकारी दूंगी, ताकि वे अन्य लोगों को भी ये जानकारियां दे सकें। साथ ही मुझे आशा है कि चीन व अफ़्रीका के बीच ज्यादा से ज्यादा चिकित्सा आदान-प्रदान कार्यक्रमों का आयोजन किया जा सकेगा। आशा है ज्यादा से ज्यादा चीनी चिकित्सक अफ़्रीका में जाकर स्थानीय लोगों को चिकित्सा से जुड़े अनुभव सीखा सकेंगे। ताकि ज्यादा से ज्यादा अफ़्रीकी जनता को इस से लाभ मिल सके।

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