पांचवें चीनी बाल पुस्तक मेले में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की भारी संभावना

2019-07-31 15:15:10
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दोस्तों, बाल पुस्तक क्षेत्र का वार्षिक भव्य समारोह यानी चीनी बाल पुस्तक मेला 17 से 23 जुलाई तक पेइचिंग में आयोजित हुआ। इस मेले में बिक्री हुई पुस्तकों की कुल संख्या 35 हजार तक पहुंची। साथ ही मेले का अंतर्राष्ट्रीयकरण स्तर भी बड़े हद तक उन्नत हुआ। प्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय बाल पुस्तक प्रकाशन ब्रांड भी इस में शामिल हैं। वरिष्ठ लोगों के अनुसार चीनी बाल पुस्तक के प्रकाशन पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग ज्यादा से ज्यादा हुए हैं। जिसने न सिर्फ़ चीनी बच्चों के प्रति पढ़ने के अनुभव को समृद्ध बनाया, बल्कि चीनी लेखकों के विकास को भी तेज किया।

कुछ बच्चों द्वारा पढ़ी गयी कविता《चीन को पढ़ें》की आवाज़ में पाँचवाँ चीनी बाल पुस्तक मेला पेइचिंग में उद्घाटित हुआ। इस बार बाल पुस्तक मेले का मुद्दा है रंगारंग विश्व को पढ़ें। मेले की विशेषता यह है कि चीनी बच्चे विश्व की श्रेष्ठ पुस्तकें पढ़ें और विश्व के बच्चे अच्छी चीनी पुस्तकें पढ़ें। देश-विदेश की प्रमुख प्रकाशन संस्थाएं व श्रेष्ठ लेखक संसाधन यहां इकट्ठे हुए। इस दौरान कुल 35 हजार से अधिक पुस्तकें बेची गयीं। उन में चित्र पुस्तकें, बाल साहित्य पुस्तकें, बाल विज्ञान पुस्तकें, कार्टून पुस्तकें, परंपरागत संस्कृति पुस्तकें, और पहेली पुस्तकें आदि शामिल थी। उन में विदेशी पुस्तकों की संख्या 5 हजार से अधिक तक पहुंची।

सुश्री ईन ने अपनी छह वर्षीय बेटी के साथ मेले में भाग लिया। उन्होंने संवाददाता से कहा कि उन्हें और उन की बेटी को अभिभावक-बच्चा रीडिंग से खूब लाभ मिला। उन के अनुसार,वास्तव में हम हर साल इस मेले में भाग लेते हैं। यह तीसरी बार है। मेरी बेटी को पुस्तकें पढ़ना बहुत पसंद करती है। यह आदत बचपन से शुरू हुई। हम कई सालों तक निरंतर रूप से अभिभावक-बच्चा रीडिंग पर कायम रहती हैं। हाल ही में हम《सुन्दरता की यात्रा》नामक सिलसिलेवार पुस्तकें पढ़ रहे हैं। जो कला के बारे में हैं। मैं अपनी बेटी के लिये पढ़ने की अच्छी आदत विकसित करना चाहती हूं।

चीनी युवा पुस्तक प्रकाशन संस्था—— रिले प्रकाशन गृह ने 300 से अधिक तरह की पुस्तकें लेकर इस पुस्तक मेले में भाग लिया। उन पुस्तकों में चित्र पुस्तकें, बाल साहित्य पुस्तकें, विज्ञान के प्रसार-प्रचार की पुस्तकें और शिक्षा से जुड़ी पुस्तकें आदि शामिल हुई हैं। रिले प्रकाशन गृह की उप मुख्य संपादक मा च्ये ने कहा कि हाल ही में चीनी मूल पुस्तकों और आयातित कॉपीराइट पुस्तकों की बिक्री बाजार में बहुत अच्छी है। कुछ सिलसिलेवार पुस्तकों की बिक्री दस करोड़ से अधिक हो गयी। उन्होंने कहा,मूल चित्र पुस्तकों के पक्ष में हमने हाल के कई वर्षों में ड्रैगन बच्चा नामक सिलसिलेवार मूल चित्र पुस्तकें बनायी हैं। अब इस सिलसिलेवार पुस्तकों की किस्में दस से अधिक हो गयीं। उदाहरण के लिये《मेढक के साथ रस्सी मत कूदो》और《वन से निकली लिटिल रेड राइडिंग हुड》दोनों को अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। हाल के कई वर्षों में चीनी मूल की चित्र पुस्तकों के चित्र स्तर व कहानी स्तर दोनों उन्नत हुए हैं। आयातित कॉपीराइट पुस्तकों की बिक्री में यूसबोरने प्रकाशन कंपनी और अकेला ग्रह निरंतर रूप से चीन में लोकप्रिय हैं। साथ ही हमने《पिता बाबा》सिलसिलेवार पुस्तकें,《स्मुर्फ्स》सिलसिलेवार पुस्तकें और《तिल की कहानी》सिलसिलेवार पुस्तकें भी मेले में लायीं। बिक्री में वे भी दस करोड़ से अधिक पहुंचेंगी।

बताया जाता है कि पहले बाल पुस्तक मेले की अपेक्षा इस बार मेले का अंतर्राष्ट्रीयकरण स्तर बड़े हद तक उन्नत हुआ। डीके. स्कोलास्टिक, पेंगुइन ग्रूप, हार्पेर कोल्लिंस आदि अंतर्राष्ट्रीय बाल पुस्तक प्रकाशन ब्रांड्स मेले में दिखे हैं। उन के अलावा मेले में 11 भाषाओं वाली अंतर्राष्ट्रीय चित्र पुस्तकें व सौ से अधिक अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने वाली चित्र भी प्रदर्शित की गयीं। छोटे पाठक आराम से इस रंगारंग पुस्तकों की दुनिया में घूम सकते थे।

अंतर्राष्ट्रीय बाल पुस्तक संघ के अध्यक्ष च्यांग मिंगचो ने संवाददाता से कहा कि हाल के कई वर्षों में चीनी बाल पुस्तक प्रकाशन के अंतर्राष्ट्रीय सहयोग दिन-ब-दिन घनिष्ठ हो रहे हैं। जिसने न सिर्फ़ चीनी बच्चों के प्रति पढ़ने के अनुभव को समृद्ध बनाया, बल्कि चीनी लेखकों के विकास को भी तेज किया। उन के अनुसार,अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का पैमाना बहुत बड़ा है। यह कहा जा सकता है कि वह तेजी से विकसित हुआ है। हाल के 15 वर्षों में विदेशों के प्रसिद्ध, क्लासिक, या अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने वाली अधिकतर पुस्तकें मंगाई गयी हैं। साथ ही विदेशों के प्रति चीनी कॉपीराइट का निर्यात हाल के कई वर्षों में भी तेजी से विकसित हो रहा है। चीन को विश्व के विभिन्न देशों की अच्छी पुस्तकें पढ़ना चाहिये। विश्व को भी चीन की अच्छी पुस्तकें पढ़नी चाहिये। खास तौर पर बाल पुस्तकें। वह बच्चों के बीच आध्यात्मिक आदान-प्रदान का पुल है। बच्चे अपने देश की अच्छी पुस्तकों के अलावा अन्य देशों व अन्य राष्ट्रों की अच्छी कहानियां व अच्छी पुस्तकें भी पढ़ सकते हैं। जिससे उन के मन में सभी मानव जाति का विचार पैदा होगा।

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