सागर से मिली आवाज़

2019-07-25 13:23:42
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दोस्तों, 18 जून से 2 जुलाई तक आत्मकेंद्रित बच्चों की डॉल्फिन स्वास्थ्यलाभ यात्रा की दूसरी अवधि रूस के सोची शहर में आयोजित हुई। स्वास्थ्यलाभ अभ्यास के दौरान सोची शहर की सरकार और चीनी विकलांग कल्याण कोष ने दोनों देशों के आत्मकेंद्रित बच्चों के स्वास्थ्यलाभ व चिकित्सा पर दीर्घकालीन सहयोग आदि पक्षों में आदान-प्रदान किया और सहयोग का बुनियादी उद्देश्य प्राप्त किया। अब लीजिये सुनिये, इस के बारे में एक रिपोर्ट।

18 जून से 2 जुलाई तक सोची के समुद्री तारा नामक डॉल्फिन ट्रेनिंग हॉल में चीन से आए दस आत्मकेंद्रित बच्चों को हर दिन प्रति व्यक्ति के लिये एक बार डॉल्फिन स्वास्थ्यलाभ अभ्यास मिला। चिकित्सा में हर बच्चे के लिये एक पेशेवर चिकित्सक, एक डॉल्फिन ट्रेनर, एक अनुवादक, एक चीनी स्वास्थ्यलाभ अध्यापक, और दो महत्वपूर्ण चिकित्सा साझेदार यानी डॉल्फिन होते थे। पेशेवर चिकित्सक के साथ बच्चे ने डॉल्फिन के साथ खेलने समेत स्वास्थ्यलाभ अभ्यास किया। पेशेवर चिकित्सक विक्टोरिया ने कहा,एक कक्षा में 25 मिनट है। किनारे पर इंटरएक्टिव खेल पांच मिनट है, फिर हाथों का अभ्यास पाँच मिनट है, पैरों का अभ्यास पाँच मिनट है। अंत में पानी में चिकित्सा दस मिनट है। बच्चे का माथा, कान, कंधे व गर्दन, और शरीर डॉल्फिन से घनिष्ठ रूप से संपर्क रखते हैं। बच्चे डॉल्फिन के एक्यूपंक्चर बिंदु को छूने से उस की आवाज़ व ध्वनि तरंग महसूस करके एक आंतरिक चक्र की स्थापना कर सकते हैं।

आत्मकेंद्रित रोग नस के विकास में एक बाधा है। आत्मकेंद्रित से पीड़ित व्यक्ति मुश्किल से अन्य लोगों के साथ आदान-प्रदान करते हैं और कुछ रोगियों की बुद्धि भी कम होती है। चिकित्सकों की आम राय है कि आत्मकेंद्रित के प्रति उपचार की सब से अच्छी अवधि तो शिशुकाल से छै वर्ष तक है। अब विश्व में आत्मकेंद्रित का चिकित्सा अन्वेषण चरण में है। 11 साल पहले रूसी विशेषज्ञों ने यह पाया कि डॉल्फिन आत्मकेंद्रित के उपचार में सकारात्मक भूमिका अदा कर सकते हैं।

डॉल्फिन दो हजार से एक लाख तक हर्ट्स की उच्च आवृत्ति अल्ट्रासाउंड निकाल सकते हैं। सिद्धांत के अनुसार डॉल्फिन की अल्ट्रासोनिक लहर मस्तिष्क की कोशिकाओं और तंत्रिका केंद्रों को सक्रिय बना सकती है।

चार वर्षीय लड़की श्याओ यू दूसरी बार मंडल के साथ चिकित्सा के लिये सोची में आयी। अन्य बच्चों की अपेक्षा श्याओ यू को डॉल्फिन ज्यादा पसंद है। वह सक्रिय रूप से चिकित्सक के साथ पानी में जा सकती है। डॉल्फिन के साथ अभ्यास करने के दौरान उसने मां के साथ आराम से गीत गाया।

संवाददाता:तुम कितने साल की हो?

श्याओ यू:चार साल।

संवाददाता:क्या तुमने पहली बार यहां आकर डॉल्फिन देखा?

श्याओ यू:यह दूसरी बार है।

श्याओ यू की मां:मुझे लगता है कि बेटी की भावना में थोड़ी प्रगति हासिल हुई। उस की भावना ज्यादा समृद्ध हुई है। पहले वह अकेली थी, और अन्य लोगों के गुस्से या खुशी पर ध्यान नहीं देती थी। अब उसे पता चलता है कि आप गुस्से में हैं या नहीं। अब वह किंडरगार्टन भी जा सकती है।

वर्तमान में इस लोकोपकार कार्यक्रम को सोची शहर की सरकार से बड़ा ध्यान व समर्थन मिला। इस बार के स्वास्थ्यलाभ अभ्यास के दौरान सोची सरकार ने चीनी विकलांग लोकोपकार कोष के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता की। दोनों पक्षों ने डॉल्फिन स्वास्थ्यलाभ अभ्यास से जुड़ी तकनीकों के प्रशिक्षण, चीन व रूस के बीच आत्मकेंद्रित विशेषज्ञों के बीच अकादमिक आदान-प्रदान, आत्मकेंद्रित से पीड़ित बच्चों के चिकित्सा में दोनों देशों के दीर्घकालीन सहयोग आदि पक्षों में आदान-प्रदान किया और बुनियादी सहमति प्राप्त की। सोची के मेयर अनाटोली पाखोमोव ने कहा,गत वर्ष से चीनी बच्चे चिकित्सा पाने के लिये सोची में आने लगे। अब तक दसेक बच्चे डॉल्फिन चिकित्सा पाकर बेहतर हो गये। डॉल्फिन चिकित्सा रूसी विशेषज्ञ द्वारा बनाया गया एक विशेष उपाय है। मुझे बहुत खुशी हुई कि चीन ने हमारा चिकित्सा तरीका चुना है। आशा है भविष्य में हम इस क्षेत्र में और स्थिर व दीर्घकालीन सहयोग संबंध बना सकेंगे। हम इसके लिये विभिन्न सहायता व समर्थन देंगे।

गौरतलब है कि वर्ष 2018 के मई में चीनी विकलांग लोकोपकार कोष के आत्मकेंद्रित बच्चों का स्वास्थ्यलाभ केंद्र औपचारिक रूप से हाईनान प्रांत के हाईखो शहर में खुला गया। पेइचिंग विश्वविद्यालय के छठे अस्पताल में बाल रोग की मुख्य चिकित्सक, चीन में आत्मकेंद्रित स्वास्थ्यलाभ क्षेत्र की विशेषज्ञ च्या मेई श्यांग ने हाल ही में कहा कि इस केंद्र की स्थापना से ज्यादा से ज्यादा चीनी रोगियों को लाभ मिलेगा। उन के अनुसार,सोची का मौसम हाईनान की तरह है। अगर हम डॉल्फिन चिकित्सा की तकनीक हाईनान में पहुंचाएंगे, तो हम अपने संसाधन से ज्यादा बच्चों की मदद दे सकेंगे। आखिर सोची में जाकर चिकित्सा लेने का खर्च बहुत महंगा है। हालांकि एक नये तरीके के रूप में डॉल्फिन चिकित्सा शायद हर बच्चे पर प्रभाव नहीं डाल सकेगा। लेकिन अब आत्मकेंद्रित का उपचार बहुत कम है।

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