सीडीएसी एशिया व विश्व के सामंजस्यपूर्ण विकास को मजबूत करेगा:मालीहा लोधी

2019-06-05 15:23:47
Comment
शेयर
शेयर Close
Messenger Messenger Pinterest LinkedIn

सीडीएसी एशिया व विश्व के सामंजस्यपूर्ण विकास को मजबूत करेगा:मालीहा लोधी

दोस्तों, सीडीएसी यानी एशियाई सभ्यताओं का संवाद सम्मेलन 15 मई को पेइचिंग में आयोजित हुआ। विश्व के दर्जन देशों व सरकारों के नेता तथा यूनेस्को समेत अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रधान भी इस मौके पर उपस्थित हुए। उन्होंने एक साथ एशियाई सभ्यताओं के बीच आदान-प्रदान व आपसी सीख पर विचार-विमर्श किया, ताकि मानव साझा नियति समुदाय का निर्माण किया जा सके। संयुक्त राष्ट्र संघ स्थित पाक स्थायी प्रतिनिधि मालीहा लोधी ने हाल ही में न्यूयार्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में कहा कि सीडीएसी विभिन्न देशों और विभिन्न सभ्यताओं के बीच बातचीत, आदान प्रदान और अंतःसंबधन को बढ़ाएगा, एशिया यहां तक कि दुनिया के सामंजस्यपूर्ण विकास को भी मजबूत कर सकेगा।

संयुक्त राष्ट्र संघ स्थित पाक स्थाई प्रतिनिधि मालीहा लोधी ने हाल ही में न्यूयार्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में इंटरव्यू देते समय कहा कि सीडीएसी का आयोजन पहली बार है और इसका ऐतिहासिक अर्थ है। उन के अनुसार,यह पहली बार है कि एशियाई सभ्यता संवाद सम्मेलन जैसा शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया। जिसका महत्वपूर्ण ऐतिहासिक अर्थ है। यह भी पहली बार है कि एशियाई देशों ने इकट्ठे होकर सभ्यता पार आदान-प्रदान किया, और एक दूसरे से अनुभव साझा किया। इस सम्मेलन ने न सिर्फ़ एशिया के विभिन्न देशों को अपनी अपनी सभ्यता में प्राप्त उलब्धियों को दिखाने का एक अच्छा मौका दिया। बल्कि इस से विभिन्न सभ्यताओं के बीच आदान प्रदान को बढ़ावा दिया जाएगा और एशिया व सारी दुनिया के समान भाग्य वाले समुदाय की स्थापना को बढ़ाया जाएगा।

लोधी ने कहा कि पाकिस्तान ने चीन के महत्वपूर्ण पड़ोसी देश और हर मौसम वाले रणनीतिक साझेदार के नाते सक्रिय रूप से सीडीएसी के मंच और सांस्कृतिक कार्निवाल में भाग लिया। साथ ही पाकिस्तान के संग्रहालय ने भी अपने सांस्कृतिक अवशेषों के साथ एशियाई सभ्यता प्रदर्शनी में भाग लिया।

लोधी के अनुसार एशिया विश्व में सबसे अधिक विकास संभावना प्राप्त क्षेत्र बना है। समीक्षकों का मानना है कि 21वीं सदी एशिया की शताब्दी बनेगी और एशिया का युग भी बड़ी तेज़ी से नजर में आ रहा है। एशियाई देश विश्व के दूसरे क्षेत्रों के साथ आर्थिक विकास और सभ्यताओं को साझा करने को तैयार हैं। सीडीएसी ने एशिया और विश्व के अन्य देशों की जनता द्वारा प्राप्त सभ्यताओं की उपलब्धियों का प्रसार-प्रचार करने, और एशिया यहां तक कि विश्व सभ्यताओं के विकास को बढ़ाने के लिए एक अच्छा मंच तैयार किया। उन्होंने कहा,बहुत समीक्षाओं में यह कहा गया है कि 21वीं शताब्दी एशिया की शताब्दी है। अगर यह एशिया की शताब्दी है, तो एशिया को विश्व के सामने अपने को दिखाने का एक अच्छा मौका मिलेगा। हालांकि एशिया में बहुपक्षीकरण होता है, लेकिन उन्हें विकास का समान लक्ष्य मिलता है। हालांकि एशिया में विविध सभ्यताएं हैं। पर विकास की एक ही इच्छा के कारण वे घनिष्ठ रूप से एक दूसरे से जुड़ते हैं। किसी ने कहा है कि अगले दस साल में एशिया का युग आएगा। क्योंकि एशिया के विभिन्न देशों को सब से तेज़ आर्थिक वृद्धि प्राप्त है। पर वास्तव में हमारे आर्थिक व सामाजिक विकास, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, भविष्य के प्रति हमारी समान इच्छा, और विश्व शांति व सुरक्षा के निर्माण के लिये हमारी समान कोशिश व योगदान, इन सभी तत्वों ने हमारा समान एशिया बनाया है। हमारे पास बराबर मानवतावादी ध्यान व एक ही भविष्य प्राप्त है।

लोधी के ख्याल से एशियाई सभ्यता में समावेशी, सामंजस्य और व्यवस्था शामिल हैं, जिसके अनुसार अलग अलग विचारधाराओं, संस्कृतियों और विश्वासों का समादर किया जाता है। यह विश्व के साथ साझा करने के योग्य है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि वर्तमान में दुनिया के सामने अभूतपूर्व चुनौतियां मौजूद हैं। विश्व की अस्थिरता और अनिश्चितता भी और स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। पर एशियाई सभ्यता संवाद सम्मेलन ने रचनात्मक तरीके से एशिया व विश्व के अन्य देशों को इकट्ठे करके एक साथ तरह तरह के संघर्षों का मुकाबला करने की चर्चा की। उन के अनुसार,वर्तमान में विश्व के सामने तरह तरह की गंभीर चुनौतियां मौजूद हुईं। नये व पुराने अंतरविरोध बारी बारी से सामने आए हैं। विश्व के दायरे में घृणा कथन व बहिष्कार के विचार, और देशों के बीच गैर-वफादार व गैर-विश्वास की भावना बढ़ रही है। इस पृष्ठभूमि में सीडीएसी के आयोजन से विभिन्न सभ्यताओं के बीच बातचीत और पारस्परिक समझ को बढ़ाया जाएगा। अर्थव्यवस्था व समाज के समान विकास को मजबूत किया जाएगा, और एक ज्यादा से ज्यादा सुन्दर दुनिया तैयार हो सकेगी।

लोधी ने बल देकर कहा कि हाल ही में बहुपक्षीयवाद के सामने बहुत नयी चुनौतियां व धमकियां मौजूद हैं। इस बार यूनेस्को समेत कई अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रधानों ने भी एशियाई सभ्यता संवाद सम्मेलन में भाग लिया। जिन्होंने बाहरी दुनिया को एक बहुत स्पष्ट संदेश भेजा है कि हमें आशा है कि विश्व के विभिन्न देश एशियाई देशों के साथ जनता को लाभ देंगे, समाज के सामंजस्य को बढ़ावा देंगे, और विश्व के समान विकास को मजबूत करेंगे।

शेयर

सबसे लोकप्रिय

Related stories