शील्योज़ी किंडर-गार्टन की कहानी

2019-05-29 10:52:17
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दोपहर के बाद लगभग तीन बजे चीन के शिनच्यांग वेवूर स्वायत्त प्रदेश के आखसू क्षेत्र के मोमाथ्येरेखो गांव में मौसम बहुत अच्छा था। यहां स्थित शील्योज़ी किंडर-गार्टन से मधुर संगीत की आवाज़ निकली। बड़े वर्ग के बच्चे शिक्षक फूबाओश्या के नेतृत्व में संगीत की कक्षा ले रहे हैं।

फूबाओश्या की उम्र 22 साल है। उन्होंने शिनच्यांग नॉर्मल उच्चतर कॉलेज में पूर्वस्कूली शिक्षा की पढ़ाई की। स्नातक होने के बाद इंटरनेट पर एक भर्ती सूचना देखकर वे अपने जन्मभूमि कानसू प्रांत से हजारों दूर के शील्योज़ी किंडर-गार्टन में आयी हैं। इसकी चर्चा में उन्होंने कहा, मैंने इस किंडर-गार्टन द्वारा बनाये गये एक वीडियो को देखा। इस में बहुत बड़ी आंखें वाले बच्चे हैं, वे बहुत सुन्दर व नन्हे हैं। बाद में उन्होंने एक वाक्य बोला कि शिक्षक, हमें आपकी जरूरत है। इसे देखकर मैं बहुत प्रभावित हुई। फिर यहां आयी। हालांकि मैं किंडर-गार्टन के विकास के लिये बहुत बड़ा योगदान नहीं दे सकी। लेकिन मैं अपनी पूरी कोशिश कर रही हूं।

शील्योज़ी किंडर-गार्टन मोमाथ्येरेखो गांव में स्थित है। यहां से सबसे नज़दीक खूछे काउंटी तक गाड़ी द्वारा एक घंटे की यात्रा करनी होती है। गांव वाले मुख्य तौर पर वेवूर जाति के हैं, जो आम जीवन में वेवूर भाषा बोलते हैं। निंगबो शहर के शिनच्यांग की सहायता कमांडिंग पोस्ट के उपाध्यक्ष वांग शिनफिंग ने कहा कि कमांडिंग पोस्ट को जांच-पड़ताल व अध्ययन के बाद पता लगा है कि इस गांव में रहने वाले पूर्वस्कूली बच्चों के पास चीनी मंदारिन बोलने का अच्छा माहौल नहीं है। इसलिये उन्होंने 50 लाख युआन की पूंजी लगाकर एक द्विभाषी किंडर-गार्टन की स्थापना की। इसकी चर्चा में वांग ने कहा,पहले गांव में एक किंडर-गार्टन था। लेकिन इस का पैमाना बहुत छोटा था। हार्डवेयर की स्थिति बहुत खराब थी। क्षेत्रफल भी काफ़ी नहीं था। इसलिये हमने सहायता देकर शील्योज़ी किंडर-गार्टन की स्थापना की।

सितंबर 2018 में किंडर-गार्टन की स्थापना के बाद मंदारिन बोलने वाली पेशेवर बालवाड़ी शिक्षक का अभाव एक बड़ी समस्या बन गयी। शील्योज़ी किंडर-गार्टन की भर्ती सूचना को देखकर च्यांग ज्वेन नाम की एक लड़की ने पंजीकरण कर यहां की प्रमुख का कर्तव्य निभाना शुरू किया। इससे पहले वे खूछे काऊंटी में तीन साल तक पूर्वस्कूली शिक्षा दे चुकी थी।

हाल ही में शील्योज़ी किंडर-गार्टन में कुल 87 बच्चे पढ़ रहे हैं। उन में 86 बच्चे अल्पसंख्यक जाति के हैं। जब उन्होंने अभी अभी किंडर-गार्टन में प्रवेश किया, तो उन्हें मंदारिन नहीं आती थी। च्यांग ज्वेन व फूबाओश्या और बच्चों के बीच भाषा से आदान-प्रदान में बहुत मुश्किल आयी। इस की चर्चा में च्यांग ज्वेन ने कहा,जैसे छोटे वर्ग के बच्चों में अगर उनके पेट में दर्द है या भूख लगती है, तो वे अपने पेट पर हाथ लगाकर शिक्षक को बोलते हैं। हम जानते हैं कि उन के पेट में कुछ न कुछ समस्या हुई। लेकिन पता नहीं है कि उन्हें भूख लगी है या पेट में दर्द है?

इस मामले के समाधान के लिये किंडर-गार्टन में खास तौर पर तीन वेवूर जाति की चाइल्डकेअर शिक्षिकाएं तैयार की गयी। बच्चों की देखभाल करने के साथ आम जीवन में वे मंदारिन बोलने वाले शिक्षकों और बच्चों के बीच आदान-प्रदान में भी मदद दे सकती हैं। शिक्षक बच्चों के सब से पसंदीदा समय यानी खेल के समय में बच्चों को मेंडारिन सीखने की मदद देती हैं। सुश्री च्यांग ने कहा,क्षेत्रीय खेल, आउटडोर खेल व व्यायाम के समय शिक्षक मंदारिन में बच्चों के साथ बातचीत करती हैं। बच्चे खेल में सीखते हैं, और सीखकर खेलते हैं। ऐसा करके उनकी याद बहुत गहरी बनी।

साथ ही किंडर-गार्टन में एक बाल आवाज़ हॉल की स्थापना की गयी। इस में रेडिंग कलम, हेडसेट आदि उन्नत उपकरण तैयार किये गये। ताकि बच्चों को भाषा सीखने में मदद दी जा सके।

शिक्षकों की यथासंभव कोशिश से बच्चों का मेंडारिन स्तर तेजी से बढ़ रहा है। बड़े वर्ग का छह वर्षीय बच्चा सुलेमान किंडर-गार्टन में प्रवेश से पहले मंदारिन में कुछ नहीं बोल पाता था। लेकिन अब वह धाराप्रवाह मंदारिन से अन्य बच्चों के साथ उँगली खेल खेल सकता है। उँगली खेल इस प्रकार होता है:छोटे सफेद छोटे सफेद सीढ़ियों से नीचे जा रहा है। वह केएफसी खाने के लिये बाहर निकला। हैमबर्गर अरे हैमबर्गर, आलू के चिप्स अरे आलू के चिप्स, चिकन पंख अरे चिकन पंख, कोक अरे कोक, वह एकदम पीएगा।

आम जीवन में सुलेमान अपनी मां का छोटा मंदारिन अध्यापक व अनुवादक भी बन चुका है। उस की मां को पहले से ही आशा है कि उन का बेटा मंदारिन भाषा बोलने वाली कक्षा में शिक्षा ले सकेगा। यहां तक कि मंदारिन सीखने के लिये वे बेटे को काऊंटी में भेजना चाहती हैं। अब उन के घर के नज़दिक इस द्विभाषी किंडर-गार्टन की स्थापना की गयी। उन्हें बहुत सौभाग्य लगता है। उन्होंने कहा,अब मैं मंदारिन के महत्व को खूब समझती हूं। बेटे ने मंदारिन सीख ली। यह उस के लिये बहुत लाभदायक होगा। अस्पताल या दुकान में वह अच्छी तरह से दूसरे लोगों से आदान-प्रदान कर सकता है। कोई समस्या नहीं है। और भविष्य में वह बाहर में व्यापार भी कर सकेगा।

बच्चों के दिन-ब-दिन बड़े बनने और प्रगति हासिल करने को देखकर च्यांग ज्वेन व फूबाओश्या बहुत खुश हैं। दिन भर बच्चों के साथ रहती हुई फूबाओश्या को लगता है कि उन्होंने भी प्रगति हासिल की। उन्होंने कहा, जिम्मेदारी सब से महत्वपूर्ण बात है। हमें हर पक्ष में अपनी क्षमता व गुणवत्ता को उन्नत करना चाहिये। अगर तुम बच्चों को पानी की एक बूंद देना चाहते हो, तो तुम्हारे पास ज़रूर एक कटोरी का पानी होना चाहिये। तुम्हें निरंतर रूप से सीखना चाहिये। ताकि बच्चों को पढ़ाई करने का ज्यादा से ज्यादा अच्छा तरीका सीखा जा सके, और उन्हें ज्यादा से ज्यादा ज्ञान प्राप्त हो सके।

फूबाओश्या का अनुभव किंडर-गार्टन के 11 शिक्षकों का समान अनुभव भी है। उन की उम्मीद है कि बच्चे गांव में स्थित चिनार पेड़ की तरह स्वस्थ रूप से बड़े हो सकेंगे, और अनार पेड़ की तरह फूल खिलकर फल दे सकेंगे। आशा है भविष्य में वे मोमाथ्येरेख गांव से निकलकर और शिनच्यांग से निकलकर बाहर की दुनिया देख सकेंगे।

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