चीनी मोड की मदद से गरीबी से मुक्त हुई नेपाली महिलाएं

2019-04-17 08:50:18
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दोस्तों, वर्ष 2015 के 25 अप्रैल को नेपाल में 8.1 तीव्रता वाला भीषण भूकंप आया। चीनी गरीबी उन्मूलन कोष ने जल्द ही पूंजी इकट्ठा कर नेपाल में बचाव व पुनर्निर्माण कार्य में भाग लिया। पहले चरण के बचाव कार्य के बाद चीनी गरीबी उन्मूलन कोष ने एक पट्टी एक मार्ग सुझाव को लागू करने के लिये नेपाल के साथ साझा नियति समुदाय के निर्माण के आधार पर अगस्त 2015 में नेपाल में कार्यालय को पंजीकृत कर स्थापित किया। इस के बाद वह लंबे समय से लगातार आपदा के बाद पुनर्निर्माण व अन्य गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों को लागू करता है। हाल के चार सालों में इस कार्यालय ने नेपाल में आपदा के बाद पुनर्निर्माण, गरीबी समाप्ति, स्वास्थ्य सफ़ाई, श्रेष्ठ शिक्षा आदि चार पक्षों में चीनी अनुभवों का प्रसार-प्रचार किया, और स्थानीय लोगों को सेवा दी। जिसे अच्छा आर्थिक व सामाजिक परिणाम मिला है। उन में स्थानीय लोगों को छोटी राशि वाला ऋण प्रदान करने का कार्यक्रम चीन के इस प्रकार के गरीबी उन्मूलन मोड में पहली बार विदेश में लागू किया गया।

नेपाल की राजधानी काठमांडू से 170 किमी दूर स्थित दिब्यापुरी गांव की अर्थव्यवस्था पिछड़ी है। हालांकि यहां से विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल चितवन राष्ट्रीय पार्क तक गाड़ी से जाने के लिये केवल दो घंटे से कम समय लगता है। लेकिन स्थानीय किसानों को पूंजी व तकनीक के अभाव से केवल सरल खेती व पशुपालन का काम करना पड़ा। पर्यटन स्थल के निकट के बावजूद कोई लाभ नहीं मिला। हाल के कई वर्षों में इस गांव के युवा पुरुष क्रमशः विदेश में काम करते हैं। इसलिये घर में रहने वाली महिलाओं का जीवन और कठोर बन गया। पर दिब्यापुरी गांव में छोटी राशि ऋण का प्रयोग बहुत सक्रिय है। जहां सामुदायिक ऋण सहकारी बहुत सालों तक चलते हैं। चीनी गरीबी उन्मूलन कोष के नेपाली कार्यालय ने स्थानीय सहयोग साझेदार के साथ अध्ययन करके गांव की महिलाओं को छोटी राशि ऋण देने का फैसला किया। हर आवेदक को 50 हजार नेपाली रुपये (लगभग पाँच सौ अमेरिकी डॉलर) मिल सकते हैं। एक साल के बाद वे ऋण वापस करेंगी। ऋण से प्राप्त ब्याज़ का प्रयोग इस बार के कार्यक्रम के शासन व प्रशिक्षण आदि काम में किया जाता है। एक साल के बाद वापस लिया गया ऋण अगले छोटी राशि ऋण कार्यक्रम में प्रदान किया जाएगा।

32 वर्षीय बिष्णु कुमारी माहत ने पाँच महीने पहले 50 हजार रुपये का ऋण लेकर एक मुर्गी फार्म बनाया। अब उन्होंने पैसे कमाकर मुर्गी फार्म के पैमाने को विस्तार किया। साथ ही उन्होंने 7 हजार रुपये के ब्याज़ को भी वापस दिया है। उन्होंने जोश भरा कहा कि,अब मैंने ऋण लेकर मुर्गी फार्म का विस्तार किया। ज्यादा पूंजी मिलकर बहुत अच्छा लगा। पहले मैं भेड़ों को भी पालती थी, जो बहुत मुश्किल था। चारे पर कम जानकारी होती थी, और हमेशा चिंता लगती थी कि बाघ जैसे जंगली जानवर भेड़ के बच्चों को खाएंगे। पैसा कमाने में असफल रही। अब मैंने मुर्गी पालने में खूब जानकारियां प्राप्त हैं, और सफलता भी मिली।

बिष्णु जैसी ग्रामीण महिलाओं को पहले भी तरह तरह की सहायता मिली है। लेकिन बहुत सहायता केवल पैसे देना है, पर उन्हें अनवरत विकास की तकनीक व मोड को नहीं सीखाया गया। इसलिये चीनी गरीबी उन्मूलन कोष के नेपाली कार्यालय ने कार्यक्रम चलाते समय इस पर बड़ा ध्यान दिया। कार्यालय की प्रमुख ज़ो चिछ्यांग वर्ष 2015 के 17 मई को नेपाल में पहुंची। कार्यालय का पंजीकरण करने के बाद वे लगातार विभिन्न कार्यक्रमों का लागू करने में व्यस्त थीं। वे ऋण देने के अलावा नेपाली ग्रामीण महिलाओं को संबंधित तकनीकों के प्रशिक्षण देने पर कायम रहती हैं। इस की चर्चा में उन्होंने कहा,उन्होंने पैसे लेकर मुर्गी पालन शुरू किया। पर अगर वे पेशेवर ढंग से काम न करें, तो मुर्गियां मर जाएंगी। इसलिये हम इस दौरान उन्हें 30 बार प्रशिक्षण देते हैं। पहले तो बाजार पहुंच प्रशिक्षण। सभी विशेषज्ञ काठमांडू से बुलाए गए हैं। विशेषज्ञों ने उन महिलाओं को यह सिखाया कि पैसे लेकर कार्यक्रम कैसे चुना जाए?बाजार व ग्राहकों का विश्लेषण कैसे किया जाता है?धन का आवंटन कैसे किया जाता है?उदाहरण के लिये मुर्गी पालने में कितने पैसे चाहिये?चारे खरीदने में कितने पैसे चाहिये?इस में बहुत तकनीक की जरूरत होती है। इसलिये हम उन्हें विशेष प्रशिक्षण देते हैं। ताकि वे महिलाएं एक साधारण गृहिणी से बाजार से जुड़ी महिलाएं बन सकें।

हालांकि चीन के छोटी राशि ऋण देने के गरीबी उन्मूलन मोड को सफलता मिली थी। लेकिन वह पहली बार विदेश में लागू किया जा रहा है। इसलिये चीनी गरीबी उन्मूलन कोष ने दिब्यापुरी गांव में पहले से अध्ययन करने, पैसे देने के मोड को निश्चित करने, और सहयोग के साझेदार चुनने पर बड़ी सावधानी बरती। प्रमुख ज़ो के परिचय के अनुसार कोष ने नेपाल में पहले सब से पिछड़े क्षेत्रों की ग्रामीण महिलाओं को ऋण देने का फैसला किया। दिब्यापुरी गांव चुनने के बाद कोष ने तीन बार विशेषज्ञों को भेजकर वहां का अध्ययन किया। 51 वर्षीय लक्ष्मी बास्ताकोटी स्थानीय महिला दल की एक प्रधान हैं। स्थापना के बाद चार साल में उन के दल द्वारा चलायी गयी छोटी राशि ऋण ने आसपास के कई गांवों में रहने वाली लगभग छह हजार ग्रामीण महिलाओं को कवर किया। इस दल में 550 से अधिक सक्रिय महिला सदस्य शामिल हुई हैं। कोष के विशेषज्ञों ने अध्ययन व तुलना के बाद लक्ष्मी के दल के साथ सहयोग करने का फैसला किया। चीनी गरीबी उन्मूलन कोष इस दल पर भरोसा कर ऋण प्रदान करता है, ब्याज़ लेता है, और अंत में ऋण वापस लेता है। ज़ो के अनुसार,ऐसा करके यहां काम करने में चीनी गरीबी उन्मूलन कोष की लागत कम हो गयी। अब हमने उन की परिपक्व व्यवस्था से लाभ उठाकर बहुत पैसे बचाये। फिर उन पैसे का प्रयोग ऋण देने और प्रशिक्षण देने में किया जाता है। ताकि स्थानीय महिलाओँ को ज्यादा लाभ मिल सके। ऐसा करके परिणाम बहुत अच्छा रहा। हमने चीन का अनुभव नेपाली छोटी राशि ऋण दल को दिया। यह कहा जा सकता है कि चीन के गरीबी उन्मूलन में छोटी राशि ऋण मोड पहली बार विदेश में लागू किया गया।

लक्ष्मी इस बात पर बहुत गौरव महसूस करती हैं कि उन के दल को चीनी गरीबी उन्मूलन कोष के साथ सहयोग करने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि दल की सदस्य ध्यान से ऋण की आवेदकों को संबंधित आग्रह बताती हैं, सक्रिय रूप से महिलाओं को प्रशिक्षण में भाग लेने का प्रबंध करती हैं, और ऋण के प्रयोग की स्थिति को जानने के लिये नियमित रूप से ग्रामीण महिलाओं के घर में जाती हैं। लक्ष्मी के अनुसार,हम गरीब क्षेत्र में रहते हैं। चीनी गरीबी उन्मूलन कोष ने यहां की महिलाओं के जीवन स्तर को उन्नत करने के लिये मूल्यवान ऋण सहायता दी। हमारे लिये यह बात शहद जैसी मीठी है। हर आवेदक को 50 हजार रुपये की पूंजी मिली है। वे मुर्गी, गाय व भेड़ पाल सकती हैं। पैसे कमाने के बाद वे सब से पहले ब्याज़ देती हैं, फिर अंत में ऋण को पूरी तरह वापस देती हैं। जीवन सुधार करने के साथ उन ग्रामीण महिलाओं का पारिवारिक स्थान भी बेहतर हुआ है।

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