आनछी घर मस्तिष्क पक्षाघात से ग्रस्त बच्चों का घर

2019-03-21 15:15:46
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दोस्तों, वर्ष 2019 के आरंभ में वीवर्क सृजक प्रतियोगिता का वैश्विक फ़ाइनल लॉस एंजेलिस में धूमधाम से समाप्त हुआ। चीनी सृजक आनछी घर ने इस प्रतियोगिता में गैर लाभकारी संगठन का पुरस्कार जीता। जिसने विश्व को चीनी सृजक की क्षमता दिखायी है।

आनछी घर की कहानी वर्ष 2002 से शुरू हुई। इस की संस्थापक वांग फ़ांग की बड़ी बेटी मस्तिष्क पक्षाघात से पीड़ित है। अपनी बेटी को पुनर्वास प्रशिक्षण देने के दौरान उन्होंने अपने पैसे से चीन के नाननिंग शहर में मस्तिष्क पक्षाघात बच्चों के एक पुनर्वास केंद्र की स्थापना करने का फैसला किया। ताकि ज्यादा से ज्यादा मस्तिष्क पक्षाघात से पीड़ित बच्चों को मदद दी जा सके। इस तरह आनछी घर की स्थापना की गयी। उस समय इस पुनर्वास केंद्र का क्षेत्रफल केवल 50 वर्ग मीटर से कम था। लेकिन वह चीन के क्वांगशी ज्वांग स्वायत्त प्रदेश में स्थापित पहला मस्तिष्क पक्षाघात से ग्रस्त बच्चों का पुनर्वास केंद्र है।

वांग फांग ने संवाददाता से कहा कि आनछी घर में मस्तिष्क पक्षाघात से पीड़ित बच्चों को विविध पुनर्वास देखभाल प्राप्त हैं, और महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चों को भविष्य में सामाजिक जीवन में भाग लेने और अपने मूल्य को दिखाने के लिये यहां शिक्षा मिल सकती है। इसकी चर्चा में वांग फ़ांग ने कहा,मस्तिष्क पक्षाघात से पीड़ित बहुत बच्चों ने अपने बचपन को अस्पताल या पुनर्वास केंद्र में बिताया है। मैं अकसर इस बात को सोचती हूं कि उन बच्चों का भविष्य कैसा होगा?मेरे ख्याल से एक ऐसी जगह होनी चाहिये, जहां उन बच्चों को पुनर्वास प्राप्त करने के साथ शिक्षा भी मिल सकती है। ताकि वे व्यापक रूप से विकसित हो सकें। आनछी घर की स्थापना के बाद मैंने दो दिशा में इस का विकास किया है। एक है बच्चों की पेशेवर क्षमता को उन्नत करना और बच्चों की निहित शक्ति का विकास करना। दूसरा है भिन्न-भिन्न सामाजिक गतिविधियों का आयोजन कर मस्तिष्क पक्षाघात से पीड़ित बच्चों के प्रति जनता की समझ को मजबूत करना। क्योंकि हमारी इच्छा यह है कि मस्तिष्क पक्षाघात से पीड़ित लोग समाज में शामिल हो सकेंगे।

सब से पहले आनछी घर केवल 3 से 15 वर्ष तक के बच्चों की सेवा देता था। हम उन्हें बोर्डिंग सेवा देते थे, व्यक्तिगत प्रशिक्षण के साथ सामान्य स्कूल की पाठ्यपुस्तक व कक्षा भी देते थे। हाल ही में आनछी घर की सेवा का दायरा धीरे धीरे से विस्तृत हो गया, सेवा का विषय भी दिन-ब-दिन समृद्ध बना। अब आनछी घर की कुल तीन शाखाएं स्थापित हो चुकी हैं:बाल विकास केंद्र, युवा विकास केंद्र, और सामुदायिक सेवा केंद्र। वांग फांग ने परिचय देते हुए कहा कि,अब 12 वर्ष से कम बच्चों को बोर्डिंग सेवा नहीं दी जाती। हम केवल उन्हें दिन की सेवा देते हैं। क्योंकि कई सालों के अध्ययन के बाद हमें पता पता चला कि छोटे बच्चों को अपने मां-बाप के साथ ज्यादा समय बिताना चाहिये। यह घनिष्ठ संबंध उन के पुनर्वास के लिये ज्यादा अच्छा है। इसलिये हमने एक युवा केंद्र की स्थापना भी की। युवा केंद्र में केवल 16 वर्ष से बड़े बच्चों को बोर्डिंग सेवा मिल सकती है। वर्ष 2016 से हमने अनाथों की सेवा शुरू की। हमने नागरिक मामलात ब्यूरो के साथ सहयोग करके एक कल्याणकारी घर का संचालन किया। सेवा के विषय को भी परिवार के बच्चों से अनाथों व गली के बच्चों तक विस्तार किया गया।

मस्तिष्क पक्षाघात से पीड़ित बच्चों के लिये एक व्यापक समर्थन व्यवस्था की स्थापना की जाएगी, ताकि हर बच्चा समानता से सुखमय व सुन्दर जिन्दगी प्राप्त कर सके। यह आनछी घर की स्थापना करते समय वांग फांग का आरंभिक लक्ष्य है। कई सालों की कोशिश से आनछी घर ने उल्लेखनीय उलब्धियां हासिल कीं। वर्ष 2019 तक आनछी घर ने दो हजार से अधिक बच्चों को मदद व सेवा दी है। उसे इस व्यवसाय में चीन के 60 गैर लाभकारी संगठन व साझेदार मिले। साथ ही हर साल वह देश के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित कई संबंधित संस्थाओं को पुनर्वास तकनीक, विशेष शिक्षा व सामाजिक कार्यकर्ताओं के व्यावसायिक तकनीक प्रशिक्षण देता है। उन में शिनच्यांग के काशी क्षेत्र में स्थित मां का घर की स्थापना वांग फ़ांग की प्रत्यक्ष मदद से की गयी।

वर्ष 2013 के मई में काशी की लड़की आयिनूर हालिक ने नाननिंग के आनछी घर में तीन चरणों के व्यावसायिक प्रशिक्षण लेने के बाद वांग फ़ांग के दूरस्थ मार्गदर्शन से शिनच्यांग के काशी क्षेत्र में मां का घर की स्थापना की। आयिनूर ने कहा कि दक्षिण चीन में आनछी घर मौजूद है। और पश्चिमी चीन में उन्होंने आनछी घर जैसे एक स्नेह भरे विकलांग बच्चों के घर की स्थापना करना चाहा। उन के अनुसार,मां का घर की स्थापना से अब तक हम लगातार गरीबी एकल अभिभावक परिवार से आए 3 से 14 वर्ष तक के मस्तिष्क पक्षाघात से पीड़ित बच्चों को सहायता देते हैं। इसके लिए कोई भी पैसा नहीं देना होता है। अब तक हमने एक हजार से अधिक बच्चों को सेवा दी है। सुश्री वांग फ़ांग हमारे काशी शहर में सभी मस्तिष्क पक्षाघात से पीड़ित बच्चों की परी मां हैं।

वास्तव में कामकाज के हर चरण में वांग फ़ांग को विभिन्न मुश्किलों व चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लेकिन वे पूरी कोशिश पर कायम रहीं। आज ज्यादा से ज्यादा बच्चों को कारगर सहायता मिलने को देखकर वांग फ़ांग को बहुत खुशी हुई। साथ ही उन की बेटी ने भी अपने बड़ी होने के अनुभव से समाज को आनछी घर के महत्व को बताया। इस की चर्चा में वांग फ़ांग ने कहा,मेरी बेटी अब 26 साल की है। मेरा विचार यह है कि चाहे काम की बात या परिवार की बात के बारे में मैं उन के साथ विचार-विमर्श करती हूं। शुरू में उन्हें बहुत गौरव महसूस होता था। क्योंकि इस स्कूल की स्थापना मां ने उन के लिये की है। लेकिन बाद में उन्हें धीरे धीरे समझ में आया कि कक्षा में या गतिविधि में एक प्रबंधक बनने की कोशिश करती हैं। अब वे अध्यापक की सहायक बन चुकी हैं। साथ ही वे आनछी घर की प्रवक्ता भी हैं। वे अकसर अन्य लोगों को आनछी घर का परिचय देती हैं।

वांग फ़ांग के अनुसार जब आनछी घर की स्थापना की गयी, तो उस समय उन्होंने एक दस वर्षीय योजना बनायी। पहले पाँच वर्षों में सेवा के पैमाने का विस्तार किया जाता है, और व्यावसायिक दल की स्थापना की जाती है। पाँच साल के बाद सेवा के मोड को कॉपी कर पेशेवर दल व तकनीक से इस व्यवसाय के अन्य संगठनों को लाभ दिया जाएगा।

वर्ष 2018 में आनछी घर ने वीवर्क सृजक प्रतियोगिता की चीनी शाखा की चैंपियनशिप जीती। और 12 लाख 69 हजार युआन का इनाम भी मिला। गौरतलब है कि इस वर्ष उसने वैश्विक फ़ाइनल प्रतियोगिता में भी जीत हासिल की। जिससे आनछी घर को और 2.5 लाख अमेरिकी डॉलर का इनाम मिला। इनामी राशि का प्रयोग आगामी दो सालों में आनछी घर के विकास में किया जाएगा।

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