फिल्म पहली विदाई 69वें बर्लिन अंतर्राष्ट्रीय फिल्म दिवस में दिखी

2019-03-06 11:19:05
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दोस्तों, स्थानीय समयानुसार 12 फ़रवरी को टेनसेंट पिक्चर्स द्वारा निर्मित, युवा फिल्म निदेशक वांग लीना द्वारा बनायी गयी फ़िल्म पहली विदाई 69वें बर्लिन अंतर्राष्ट्रीय फिल्म दिवस में प्रदर्शित की गयी। इस फिल्म को इस बार के फिल्म दिवस की नयी पीढ़ी इकाई में शामिल किया गया। इस से पहले इसे 31वें टोक्यो फिल्म दिवस में एशिया भविष्य इकाई की सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार मिला। 13 से 17 फ़रवरी तक वह बर्लिन फिल्म दिवस के दौरान चार बार प्रदर्शित की गयी।

फिल्म पहली विदाई वांग लीना द्वारा बनायी गयी पहली लंबी फिल्म है। इस फिल्म में विदाई, बढ़ना, स्नेह व मित्रता आदि मुद्दों पर ध्यान केंद्रित हुआ। जिस में शिनच्यांग के शाया क्षेत्र में रहने वाले आईसा नामक एक लड़के की कहानी बतायी गयी। इस फिल्म के सभी अभिनेता गैर पेशेवर हैं, जिन के पास प्रदर्शन का अनुभव बहुत कम है। साथ ही फिल्म की कहानी भी वास्तविक जीवन से आयी है। फिल्म का शूटिंग स्थल शिनच्यांग का शाया तो निदेशक वांग लीना का जन्मस्थान है। संवाददाता को इन्टरव्यू देते समय वांग ने कहा कि फिल्म पहली विदाई उनके द्वारा अपने जन्मस्थान के लिये दी गयी एक लंबी कविता है। उस दिन इस फिल्म को देखने वाले दर्शकों में बहुत बच्चे मौजूद हैं। इस पर वांग थोड़ी आश्चर्य में रही। साथ ही उन्हें जन्मस्थान में अपने बचपन की याद भी आयी। उन के अनुसार,फिल्म देखते समय बच्चों का अनुभव शायद बड़े लोगों से अलग है। उन की भावना ज्यादा सीधी व मुक्त है। लेकिन अगर आपकी फिल्म में बचपन की कहानी है, तो वास्तव में सभी लोग इसे समझ सकते हैं। इसलिये चाहे चीन के बच्चे हो या विदेश के बच्चे, अगर वे समान जीवन देखते हैं, एक ही तरह के मां-बाप को देखते हैं, या परिवार के प्रति एक ही स्नेह देखते हैं। तो उन की भावना भी एक ही होगी। मैंने 27 वर्ष की उम्र में इस फिल्म की शूटिंग की। उस समय मेरे पास जीवन का ज्यादा अनुभव नहीं था। इसलिये मैंने अपने व्यक्तिगत अनुभव से शुरू होकर अपने जन्मस्थान की कहानी चुनी। जन्मस्थान में मैंने अपना बचपन बिताया। फिल्म में बतायी गयी कहानी मुझे भी मिली है। जब मैं फिल्म में इस कहानी को फिर एक बार बताना चाहती हूं, तो मैं अपने जन्मस्थान व अपने बचपन को और गहन रूप से समझ सकती हूं। यह समझ पहले से शायद अलग होगी।

हालांकि जोहान्ना व माडिल्दा केवल नौ साल की बच्चियां हैं, लेकिन वे बर्लिन फिल्म दिवस की वरिष्ठ दर्शक बनी। वे दोनों ने अन्य तीन लड़कियों के साथ मां के समर्थन में चार साल पहले एक छोटे फिल्म दर्शक दल की स्थापना की। उन्होंने एक साथ इस फिल्म दिवस में नयी पीढ़ी इकाई की फिल्म देखी। उन्होंने कहा,यह फिल्म देखकर मुझे थोड़ा दुःख हुआ। क्योंकि लड़के की तीन चीज़ें खो गयी। उसकी मां, उस के भेड़ का बच्चा, और उस की अच्छी मित्र। पर यह फिल्म बहुत आकर्षक है। इस फिल्म से हमने यह देखा है कि अन्य देशों में बच्चे कैसे जीवन बिताते हैं। मुझे लगता है कि बर्लिन फिल्म दिवस की सुन्दरता केवल जर्मन फिल्मों में नहीं, विश्व के विभिन्न देशों की फिल्मों में भी होती है।

दस वर्षीय अलिया अपने सहपाठियों व अध्यापिका के साथ फिल्म देखने यहां आयी है। उन्होंने संवाददाता को बताया ,मुझे यह फिल्म बहुत पसंद है। क्योंकि वह बहुत वास्तविक लगती है। जिस में जीवन का वास्तविक ढंग दिखाया गया। हालांकि कुछ विषय बहुत दिलचस्प हैं, लेकिन दुःख भी ज्यादा है। उदाहरण के लिये लड़के व उन की बीमार हुई मां के बीच, और इस लड़के व उन के सहपाठी के बीच की कहानी सुचारू ढंग से नहीं चल सकती। पर मुख्य तौर पर वह एक अच्छी फिल्म है।

अलिया की अध्यापिका कारोला के परिचय के अनुसार उन की रिचार्ड गरुंडस्चुले नेउकोल्लन स्कूल हर साल सभी वर्ग के विद्यार्थियों को बर्लिन फिल्म दिवस की कम से कम एक फिल्म देखने का प्रबंध करती है। विद्यार्थियों की उम्र के आधार पर स्कूल उचित फिल्म चुनती है। उस दिन फिल्म देखने वाले विद्यार्थी पाँचवें वर्ग की चार कक्षाओं के बच्चे हैं। जिन की कुल संख्या लगभग सौ होगी। उन्होंने कहा,मुझे लगता है कि इस फिल्म का विषय बहुत गहन है। क्योंकि वह सामान्य बाल फिल्म की तरह नहीं है। उसमें कहानी की लय धीरे धीरे से चलती है। कुछ विषयों का विवरण विचार करने के योग्य है। आज जब हम स्कूल वापस लौटे, तो हम कक्षा में इस फिल्म के बारे में बच्चों के अपने अपने अनुभव को साझा करेंगे। जैसे फिल्म के किसी चित्र से क्या सूचना मिली आदि।

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