वांग लिनडा का शिक्षा व लोकोपकार रास्ता

2019-01-24 08:50:31
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दोस्तों, वर्ष 2018 के 18 दिसंबर को चीन में सुधार व खुलेपन की 40वीं वर्षगांठ का भव्य समारोह पेइचिंग के जन वृहत भवन में धूमधाम से आयोजित हुआ। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय कमेटी के महासचिव शी चिनफिंग ने महत्वपूर्ण भाषण दिया। पेइचिंग के फ़ंगथाई डिस्ट्रेक्ट की एक कार्यालय इमारत में चीन के प्रवासी चीनी संघ की स्थाई सदस्य, ईहाई ग्रुप के बोर्ड मंडल की अध्यक्ष वांग लिनडा ने अपने कर्मचारियों के साथ इस समारोह का सीधा प्रसारण देखा। सब से पहले पेइचिंग में पूंजी लगाने वाले हांगकांग व्यापारियों में से एक होने के नाते सुधार व खुलेपन की 40वीं वर्षगांठ पर वांग लिनडा ने कहा कि सुधार व खुलेपन ने विस्तृत प्रवासी चीनियों को एक बहुत अच्छा मौका दिया। उन के लिये सब से खुशी की बात यह है कि उन का सब से सुन्दर समय सुधार व खुलेपन के साथ बिताया गया। उन की शिक्षा समुदाय की विचार धारा को मातृभूमि पर सफल परिणाम मिला। वे सुधार व खुलेपन की गवाह व प्रतिभागी होने के साथ इस की लाभार्थी भी हैं।

गत् 80 के दशक के अंत में वांग लिनडा के नेतृत्व वाले ईहाई ग्रुप ने प्रवासी चीनियों की पूंजी वाले उद्यमों के प्रतिनिधि के रूप में सब से पहले क्वांगचो शहर में प्रवेश किया। वहां उन्होंने भीतरी चीन में अपने पहले कार्यक्रम का विकास किया। फिर उन्हें शनचेन में पूंजी लगाकर निर्माण करने की अनुमति मिली। दो साल के बाद पहले पेइचिंग-हांगकांग मेले के आयोजन के बाद ईहाई ग्रूप पेइचिंग में पूंजी लगाने वाले पहले खेप वाले प्रवासी चीनियों की पूंजी वाले उद्यमों में से एक बन गया। कई सालों में उन्होंने शिक्षा संसाधन को समुदाय में लाने की बड़ी कोशिश की। वे भी चीन में शिक्षा व अचल संपत्ति से जोड़ने वाला पहला आदमी बन गयी। वे लोकोपकार कार्य में सक्रिय हैं। उन्हें कई बार चाइना चैरिटी अवार्ड और चीनी चैरिटी तालिका में शीर्ष दस परोपकारी की उपाधि मिली।

अपने शिक्षा सपना व लोकोपकार रास्ते की चर्चा में वांग लिनडा ने संवाददाता से कहा कि चीन में सुधार व खुलेपन का लागू करने के बाद 40 वर्ष बीत चुके हैं, ईहाई ग्रुप ने भी लगभग 30 साल बिताये हैं। हालांकि ईहाई ग्रुप का व्यापार रियल एस्टेट है, लेकिन इस की विशेषता व केंद्र शिक्षा समुदाय है। ईहाई द्वारा दिया गया सब से बड़ा योगदान समुदाय में पहली स्तरीय शिक्षा देना है।

जब वांग लिनडा पहली बार पेइचिंग में आयी थी, उस समय नवंबर का महीना था। दक्षिण पेइचिंग के चौथी रिंग रोड के पास स्थित इस जगह में जल नहीं था, बिजली नहीं थी, रास्ता नहीं था, यहां तक कि कोई पेड़ पौधा भी नहीं मिल सकता था। वहां केवल विशाल बंजर भूमि व तीन रेत के गड्ढ़े थे। उस समय सभी लोग कहते थे कि यहां पूंजी लगाना बेकार होगा।

वांग लिनडा की कंपनी अस्थाई रूप से किसानों के एक खाद के गोदाम में स्थित थी। इस गोदान में खिड़की भी नहीं थी। उन के अनुसार उस समय हमारे दफ़तर में केवल एक मेज़ होता था। मैं और मैनेजर मेज़ की दोनों ओर बैठते थे। क्योंकि हम दक्षिण चीन से आए हैं, इसलिये उत्तर चीन के मौसम की आदत नहीं थी। दोनों बीमार हो गये। हम नाक में ऑक्सीजन ट्यूब डालकर काम करते थे।

इतनी कठोर शर्त में वांग लिनडा के बड़ा समुदाय बनाने का सपना बहुत मजबूत था। उन के सपने में समुदाय के लिये न सिर्फ़ सुविधाजनक आधारभूत संस्थापन प्राप्त हैं, बल्कि पहली स्तरीय स्कूल व शिक्षा भी देनी चाहिये। वर्ष 1997 में पेइचिंग ईहाई पार्क की स्थापना पूरी हुई। फिर ईहाई ग्रुप ने पूंजी लगाकर किंडर-गार्टन, प्राईमरी स्कूल व मिडिल स्कूल की स्थापना की। साथ ही फ़ंगथाई जिले की सरकार के समर्थन से उन्होंने पेइचिंग की पहले स्तरीय स्कूल को इस समुदाय में लाया।

सब से पहले किंडर-गार्टन में 50 या 60 शिक्षक थे, लेकिन केवल चार बच्चे भर्ती हुए। किंडर-गार्टन के प्रबंधक ने वांग लिनडा से पूछा कि क्या हम काम शुरू करेंगे?तो वांग ने दृढ़ता से कहा कि शुरू करें, अगर केवल एक बच्चा है, तो हम भी शुरू करेंगे। वांग लिनडा ने खुद किंडर-गार्टन का प्रबंध किया। हर सुबह दो बजे वे बच्चों के शयनकक्ष का दौरा करती थीं, और महाराज का प्रशिक्षण भी वे अपने आप करती थीं।

हालांकि वांग लिनडा का व्यापार शिक्षा नहीं है, लेकिन आज वे शिक्षा की एक विद्वान बन चुकी हैं। गत वर्ष के अंत में वांग लिनडा पेइचिंग निज़ी शिक्षा संघ की बुनियादी शिक्षा शाखा और पेइचिंग शिक्षा संघ की निज़ी मीडिल व प्राइमरी स्कूल व किंडर-गार्टन शिक्षा अनुसंधान परिषद की अध्यक्ष बन गयीं। वर्तमान में ईहाई शिक्षा ग्रुप ने चीन के कई प्रांतों में अपनी शाखाओं की स्थापना की। इन में प्रारंभिक शिक्षा, किंडर-गार्टन, प्राइमरी स्कूल, मिडिल स्कूल, अंतर्राष्ट्रीय स्कूल, प्रशिक्षण कॉलेज, तथा बुजुर्ग विश्वविद्यालय समेत 15 शिक्षा संस्थाएं शामिल हुई हैं। वांग लिनडा के ख्याल से शिक्षा को अच्छी तरह से देना मातृभूमि व जनता का सब से बड़ा जवाब है।

जब किसी व्यक्ति ने वांग से पूछा कि बच्चों को शिक्षा देने का रहस्य क्या है?तो उन्होंने जवाब दिया कि कोई रहस्य नहीं है, केवल सच्चे दिल व प्रेम बच्चों को देना ही है। वांग लिनडा की बहुत हैसियतों में एक हैसियत ने लोगों को गहरी छाप छोड़ी। वह है पेइछ्वेन मिडिल स्कूल की स्थाई मानद प्राचार्य। पर वांग लिनडा के लिए सब से खुशी की बात यह है कि जब पेइछ्वेन मिडिल स्कूल के विद्यार्थी उन्हें देखते हैं, तो ज़रूर स्नेह के साथ उन्हें माता जी वांग को बुलाते हैं। ऐसा क्यों?क्योंकि वर्ष 2008 में 12 मई वनछ्वेन बड़े भूकंप के बाद वांग लिनडा ने एक सर्वेक्षण दल के साथ वहां जाकर पुनर्निर्माण का निरीक्षण दौरा किया। जब उन्होंने पेइछ्वेन मिडिल स्कूल में ढह गयी कक्षाओं व बेघर बच्चों को देखा, तो उन के दिल में बहुत दर्द है। ठीक उसी समय उन्होंने फ़ौरन यह फैसला किया कि वे ज़रूर बच्चों के लिये स्कूल व घर का पुनर्निर्माण करने की बड़ी कोशिश करेंगी।

वांग ने कहा कि मुझे लगता है कि मेरे पास एक जिम्मेदारी व कर्तव्य है। खास तौर पर उस समय मैंने खुद स्कूल की स्थापना की। इसलिये मैं बच्चों को खूब समझ सकती हूं। भूकंप के बाद बच्चे कहां पर पढ़ाई कर सकेंगे?अध्यापकों की स्थिति कैसी है?हालांकि भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है, लेकिन राहत कार्य व पुनर्निर्माण की प्रक्रिया में सभी लोगों की मदद चाहिये। देश, सरकार और पूरे समाज एक साथ सहायता देते हैं, ऐसा करके आपदा से ग्रस्त जनता गर्मजोशी को महसूस कर सकती हैं।

वांग लिनडा ने कहा कि वनछ्वेन भूकंप के बाद पुनर्निर्माण में चीन सरकार के नेतृत्व में सारे देश की जनता ने एक साथ मेहनत की। खास तौर पर विदेश में रह रहे चीनियों ने चीन के प्रवासी चीनी संघ के आह्वान में सक्रिय रूप से एकत्र चन्दा व अन्य सामग्री के दान में भाग लिया।

वर्ष 2008 के 21 सितंबर को चीन के प्रवासी चीनी संघ की सहायता से पेइछ्वेन मिडिल स्कूल का निर्माण कार्यक्रम औपचारिक रूप से शुरू हुआ। वांग लिनडा ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय, मेसाचुसेट्स प्रौद्योगिक संस्थान, हांगकांग विश्वविद्यालय, छिंगह्वा यूनिवर्सिटी, थोंगची विश्वविद्यालय आदि विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों को बुलाकर एक अंतर्राष्ट्रीय डिज़ाइन दल की स्थापना की। उन्होंने एक साथ पुनर्निर्माण की योजना बनायी।

दो साल के बाद वांग लिनडा ने कई बार पेइछ्वेन मिडिल स्कूल के लिये दान का आयोजन किया, और पेइछ्वेन मिडिल स्कूल को सीधे से 1 करोड़ 60 लाख युआन की सहायता दी। उन के अलावा वे हर साल पेइछ्वेन में वापस लौटकर हाई स्कूल के तीसरे साल के विद्यार्थियों को भाषण दिया। न सिर्फ़ बच्चों के मुंह पर बल्कि बच्चों के दिल में भी वे एक मां बन गयीं।

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