अध्यापिका नुओरजिमन की कहानी

2018-12-28 12:51:30
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दोस्तों, वर्ष 2000 से भीतरी चीन के दसेक शहरों, जहां शिक्षा संसाधन बहुत समृद्ध हैं, के सौ से अधिक श्रेष्ठ हाई स्कूलों में शिनच्यांग कक्षा की स्थापना की गयी। अब तक शिनच्यांग की विभिन्न जातियों के लगभग 90 हजार विद्यार्थियों ने इस कक्षा में शिक्षा ली। और 30 हजार विद्यार्थियों को विश्वविद्यालयों से स्नातक होने के बाद काम मिला है। उन में अधिकतर लोग शिनच्यांग वापस लौटकर स्थानीय निर्माण व विकास में एक नये शक्ति बने।

वर्ष 2018 में गर्मियों के एक दिन में शिनच्यांग के होशो काऊंटी में स्थित लैनशिन किंडरगार्टन में छोटे बच्चे ध्यान से व बहुत मज़े के साथ कला की शिक्षा ले रहे थे। बच्चों की आंखें चमकदार हैं, और वे उत्साह के साथ सवालों का जवाब देने के लिये हाथ उठाते थे। उन के सामने एक मुस्कुराती हुई युवा शिक्षक हैं। शायद इस अध्यापिका ने उन्हें लेकर एक रंगारंग काल्पनिक दुनिया में प्रवेश किया है।

नुओरजिमन:बच्चों, मेरे हाथों का एक विशेष प्रयोग होता है। क्या आप लोग इसे जानना चाहते हैं?

बच्चे:चाहते हैं।

नुओरजिमन:मेरे हाथ जादू कर सकते हैं। क्या आप लोग जादू देखना चाहते हैं?

बच्चे:चाहते हैं।

28 वर्षीय नुओरजिमन एक मंगोलियन लड़की हैं। उसका जन्म शिनच्यांग की होशो काऊंटी में हुआ। वर्ष 2014 में नुओरजिमन ने भीतरी चीन के हाई स्कूल व विश्वविद्यालय में स्नातक होने के बाद अपने जन्मस्थान वापस लौटने का विकल्प चुना। वे होशो काऊंटी के नंबर दो मीडिल स्कूल में एक चीनी भाषा की शिक्षक बनी। शिनच्यांग में इन-सर्विस शिक्षकों को नियमित रूप से नौकरी का चक्कर करना व आदान-प्रदान करना है। इस नीति के आधार पर वर्ष 2017 में नुओरजिमन ने होशो काऊंटी की एक दूर दराज़ गांव में स्थित लैनशिन किंडरगार्टन में शिक्षा देने का काम करना शुरू किया। उन्होंने कहा,भीतरी चीन के विश्वविद्यालय से स्नातक होने वाली एक विद्यार्थी के रूप में खास तौर पर अब मैं एक शिक्षक हूं। मुझे आशा है कि मैं अपने द्वारा प्राप्त सभी जानकारियां अपने विद्यार्थियों को सिखा सकूंगी। साथ ही मैं उन्हें अच्छी तरह से पढ़ने को प्रोत्साहित भी करती हूं, ताकि भविष्य में वे ज्यादा अच्छे विश्वविद्यालयों में प्रवेश कर सकें, और शिनच्यांग के विकास के लिये अपना योगदान दे सकें। हालांकि शिनच्यांग का क्षेत्रफल बहुत बड़ा है, और संसाधन भी समृद्ध हैं। लेकिन भीतरी चीन की अपेक्षा यहां की अर्थव्यवस्था पिछड़ी है। पर हाल के कई वर्षों में शिनच्यांग का विकास बहुत तेज है। शिनच्यांग के विकास में हमारी कोशिश चाहिये। शायद एक व्यक्ति की शक्ति कम है, लेकिन बहुत लोगों की समान कोशिशों से यह शक्ति ज़रूर बड़ी बनेगी।

लैनशिन किंडरगार्टन की निदेशक छए यूफ़ंग की नज़र में नुओरजिमन बहुत सक्रिय हैं, और बच्चों को शिक्षा देने में उनके तरीके बहुत अच्छे हैं। इस की चर्चा में छए यूफ़ंग ने कहा,शिक्षक नुओरजिमन ने जल्द ही अपनी भूमिका बदल ली। क्योंकि पहले वे मिडिल स्कूल के बच्चों को सिखाती थी, लेकिन अब वे किंडरगार्टन के बच्चों को सिखाती हैं। वे बहुत जिम्मेदार व सक्रिय हैं। बच्चे उन्हें बहुत पसंद हैं। वर्तमान के बच्चे तेजी से जानकारियां स्वीकार कर सकते हैं। इसलिये अगर शिक्षकों को ज्यादा जानकारियां प्राप्त हैं, तो बच्चे भी ज्यादा जानकारियां सीख सकते हैं।

वर्ष 2006 में नुओरजिमन ने श्रेष्ठ अंकों से च्यांगसू प्रांत के च्यांगतू मिडिल स्कूल में प्रवेश किया। जो भीतरी चीन के विकसित शहरों में शिक्षा लेने वाले सातवें खेप वाले विद्यार्थियों में से एक बनी । नुओरजिमन की मां स्थानीय प्राइमरी स्कूल में एक अध्यापिका हैं। पिता जी भी इस स्कूल में काम करते हैं। अपने मां-बाप के प्रभाव से नुओरजिमन का सपना भी एक शिक्षक बनना था। जब नुओरजिमन को भीतरी चीन के श्रेष्ठ स्कूलों में जाने का मौका मिला, तो उन के मां-बाप की भावना बहुत खुश व जटिल थी। इस की चर्चा में नुओरजिमन की मां ने संवाददाता से कहा,उस समय हमारी बेटी ने भीतरी चीन के श्रेष्ठ स्कूल में प्रवेश किया। हम एक पक्ष में बहुत खुश थे, दूसरे पक्ष में भी डरते थे। क्योंकि उन की उम्र बहुत कम है, केवल 15 या 16 वर्ष की है। इतनी दूर जगह जाने पर हम बहुत चिंतित थे। बाद में वे धीरे धीरे वहां के माहौल के अनुकूल हो गयीं। और उसने वहां खूब सीखा। उसकी चीनी भाषा भी बहुत अच्छी है, क्योंकि प्राइमरी स्कूल में मंगोलियन भाषा में शिक्षा मिली। जूनियर हाईस्कूल में भी मंगोलिया भाषा में। फिर हाई स्कूल में वे भीतरी चीन के स्कूल में गयीं। लेकिन वह अच्छी तरह से सीख सकती थीं। मुझे बहुत खुशी हुई।

नुओरजिमन ने च्यांगसू प्रांत के यांगचो शहर के हाई स्कूल में एक साल की आधार शिक्षा व तीन सालों की सामान्य शिक्षा लेने के बाद वर्ष 2010 में हूपेई प्रांत के चुंगनान जातीय विश्वविद्यालय में प्रवेश किया। भीतरी चीन में आठ साल की पढ़ाई में उन की दृष्टि विस्तृत हो गयी, और क्षमता भी उन्नत हो गयी। लेकिन वे अपने जन्मस्थान वापस लौटकर सेवा देना चाहती हैं। उन के अनुसार,जन्म से अब तक मुझे लगातार देश की जातीय उदार नीति से लाभ मिलता रहा है। खास तौर पर हाई स्कूल में। विश्वविद्यालय से स्नातक होने के बाद शिनच्यांग में एक ऐसी नीति है कि अगर ग्रेजुएट जमीनी स्तर पर काम करते हैं, तो वे विश्वविद्यालय में अपना ट्यूशन वापस लेने का आवेदन कर सकते हैं। इसलिये मैं स्नातक होने के बाद नंबर दो मिडिल स्कूल में आयी , और ट्यूशन वापस लेने का आवेदन किया। फिर मुझे जल्द ही चार साल का ट्यूशन वापस मिल गया। क्योंकि मुझे लगता है कि देश ने मेरी इतनी मदद दी है, इसलिये मुझे अपने जन्मस्थान के विकास के लिये योगदान देना चाहिये। क्योंकि मैं भीतरी चीन के श्रेष्ठ स्कूल में पढ़ती थी, इसलिये मैं हर काम को दूसरे लोगों से और बेहतर रूप से करना चाहती हूं। यह तो मेरी कोशिश की शक्ति ही है।

गौरतलब है कि वर्ष 2000 से भीतरी चीन के शहरों, जहां शिक्षा संसाधन बहुत समृद्ध हैं, के श्रेष्ठ हाई स्कूलों में शिनच्यांग कक्षा की स्थापना की गयी। अभी तक 14 विकसित प्रांतों के 45 शहरों के श्रेष्ठ हाई स्कूलों में शिनच्यांग की विभिन्न जातियों के लगभग 90 हजार विद्यार्थियों ने इस कक्षा में शिक्षा ली। शिनच्यांग में ज्यादा से ज्यादा विद्यार्थी भीतरी चीन में शिक्षा लेना चाहते हैं।

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