यमन बच्चों के लिए बना नर्क

2018-12-06 11:28:06
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दोस्तों, मध्यपूर्व व उत्तर अफ़्रीका क्षेत्र में स्थित संयुक्त राष्ट्र बाल कोष के कार्यालय के अध्यक्ष गीरत काप्पेलाएरे ने हाल ही में जॉर्डन की राजधानी अम्मान में संवाददाता सम्मेलन आयोजित कर यमन के संघर्ष से बच्चों की आपदा की स्थिति बतायी। उन के अनुसार अब यमन बच्चों के लिए नर्क बन चुका है। और लाखों बच्चे बेहद खराब जीवन जी रहे हैं।

यमन में लगातार चार साल तक चले सैन्य संघर्ष ने स्थानीय अर्थव्यवस्था व समाज को बड़ा नुकसान पहुंचाया। इससे भी गंभीर बात यह है कि बच्चे सैन्य संघर्ष के शिकार बने। इस संवाददाता सम्मेलन में काप्पेलाएरे ने बहुत दुःख के साथ यमन की लड़की अमाल की भूख से मौत से जुड़ी एक फ़ोटो की चर्चा की। यह फोटो कई दिन पहले मीडिया द्वारा जारी किए जाने के बाद चर्चा में थी। उन्होंने कहा कि यमन में अमाल जैसे बच्चों की संख्या कम नहीं है। बच्चों के प्रति यमन पूरी तरह नर्क बन चुका है। उन्होंने कहा,आज का यमन बच्चों के लिए नर्क जैसा है। जो केवल कुछ बच्चों के प्रति नहीं, यमन के सभी बच्चों के लिए है। चाहे लड़के हो या लड़कियां सभी का जीवन बहुत खराब है।

काप्पेलाएरे ने बताया कि वर्तमान में यमन में 18 लाख बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। उन में 4 लाख बच्चों की स्थिति बहुत गंभीर है, जो उन की जान के लिये खतरनाक है। पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में आधे से ज्यादा पुराने कुपोषण से ग्रस्त हैं। उन के अलावा लगभग 11 लाख गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाएं खून की कमी से पीड़ित हैं। इस कारण से उन के बच्चों का वज़न जन्म से ही सामान्य स्तर से कम होता है, और उन बच्चों में पोषण का अभाव हैं। गौरतलब है कि पुराने कुपोषण से बच्चों के दिमाग के विकास पर बुरा असर पड़ेगा। जो बच्चों की जिन्दगी पर कुप्रभाव डालेगा।

और एक चिंता की बात यह है कि कुछ नियंत्रित रोग भी यमन के बच्चों के स्वास्थ्य व जान को खतरा दे रहे हैं। यमन में टीकाकरण बहुत लोकप्रिय नहीं है। युद्ध शुरू होने के बाद टीकाकरण का स्तर तेजी से गिर चुका है। मीज़ल्स और डिप्थीरिया का संक्रमण बच्चों पर घातक प्रभाव डालता है। अब यमन में हर दस मिनट में एक बच्चा नियंत्रित बीमारी से मर जाता है। काप्पेलाएरे ने खास तौर पर सारा नामक एक लड़की की चर्चा की। टीका न लगाने के कारण उसे डिप्थीरिया हो गया। अंत में उसे पक्षाघात हो गया।

संघर्ष के निरंतर विकास से यमन की आर्थिक स्थिति भी दिन-ब-दिन खराब बन रही है। काप्पेलाएरे ने कहा कि वे कई परिवारों में गये, उन में अध्यापक, चिकित्सक, नर्स आदि शामिल हैं। बहुत लोगों को कई महीनों तक वेतन नहीं मिला है। काप्पेलाएरे ने स्पष्ट रूप से कहा कि आज यमन में लाखों बच्चे दुःख से ग्रस्त हैं, और यह दुःख मानव द्वारा बनाया गया है। उन के अनुसार,आज हम इस बात की चिंता करते हैं कि यमन में शायद अकाल का खतरा होगा। पर वास्तव में इस का कोई प्राकृतिक कारण नहीं है, वह केवल मानव का कारण है। लेकिन बच्चों को इसकी बड़ी कीमत अदा करनी होगी।

अंत में काप्पेलाएरे ने संघर्ष के विभिन्न पक्षों से जल्द ही मिल-जुलकर युद्ध विराम का विचार-विमर्श करने और शांति के रास्ते में वापस लौटने की अपील की।

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