चित्र व लेख से चीन के प्रति प्रेम दिखाया रूसी युवाओं ने

2018-11-06 15:48:33
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दोस्तों, स्थानीय समयानुसार 26 सितंबर को मेरी नज़र में चीन नामक रूसी युवाओं की चित्र प्रतियोगिता और मैं और चीन नामक लेख प्रतियोगिता का पुरस्कार वितरण समारोह मास्को में स्थित चीनी संस्कृति केंद्र में सफलता से आयोजित हुआ। जिसने चीन व रूस के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ की सिलसिलेवार गतिविधियों का पर्दा खोला।

मास्को चीनी संस्कृति केंद्र के अध्यक्ष कुंग च्याच्या ने कहा कि हमने तीन महीने में प्रतियोगिता के लिये लगभग हजार चित्र व लेख इकट्ठे किये। मास्को, सेंट पीटर्सबर्ग, येकातेरिनबर्ग, व्लादिवोस्तोक और कोमसोमोलस्क समेत कई रूसी शहरों के युवाओं ने सक्रिय रूप से इस गतिविधि में भाग लिया। उन्होंने कहा,लेख प्रतियोगिता में भाग लेने वालों में संवाददाता, व्यापारी, विद्यार्थी, अध्यापक आदि विभिन्न व्यवसाय व विभिन्न उम्र के लोग शामिल हुए हैं। उन्होंने चीन से जुड़ी अपनी कहानी लिखी, जो बहुत दिलचस्प है। हमें आशा है कि ज्यादा से ज्यादा रूसी जनता, खास तौर पर युवाओं को चीन के प्रति बड़ा शौक पैदा होगा, और वे चीन को पसंद करेंगे।

पुरस्कार वितरण समारोह में लेख प्रतियोगिता में भाग लेने वाले रूसी युवाओं ने चीन व चीनी संस्कृति के प्रति अपना ध्यान व प्रेम प्रकट किया। 20 वर्षीय मिराबेल्ला ओज़ेरोवा पहला पुरस्कार जीतने वाले पाँच विजेताओं में से एक हैं। एक कलाकार के रूप में उन्हें लेख लिखने को भी बहुत पसंद है। वे अकसर कविता या कहानी लिखती हैं, या उन का अनुवाद करती हैं। हालांकि मिराबेल्ला को चीनी नहीं आती, उन्होंने कभी चीन की यात्रा नहीं की थी। लेकिन चीन की रंगारंग संस्कृति व कला बचपन से ही उन के दिल में बस गयी। इस बार मिराबेल्ला द्वारा लिखे गये लेख का शीर्षक है चीनी कलाकारों से तीन बार मिली। जिस में चीनी कलाकारों द्वारा उन पर डाले गये प्रभाव को बताया गया। उन्होंने कहा,स्वर्गीय चीनी प्रसिद्ध चित्रकार छी पाईशी ने मुझ पर गहरी छाप छोड़ी। जब मैं एक छोटी लड़की थी, तो उन के विशेष चित्रों ने मुझे बहुत आकर्षित किया। अब मैं बड़ी हो गयी, और मैंने फिर एक बार छी पाईशी द्वारा बनाये गये चित्र देखे, जिस में काली व सफ़ेद दुनिया में झींगे तैर रहे हैं। मुझे लगा जैसे कि शायद वे मेरी ओर इशारा कर रहे हैं। मैं उनसे बातचीत करना चाहती थी। लेकिन चाहे समय या स्थान दोनों बहुत दूर थे। मेरे और छी पाईशी के बीच क्या संबंध है?इस सवाल पर मैंने यह लेख लिखा।

मिराबेल्ला ने कहा कि उन्होंने चीनी संस्कृति से बहुत पोषण लिया, जिसने उन्हें प्रेरणा स्रोत दिया। हालांकि अब तक उन्होंने कभी भी चीन की यात्रा नहीं की, लेकिन उन्हें चीन बहुत नज़दीक लगता है। और उन के दिल में चीन बहुत दूर नहीं है। इस बार पहला पुरस्कार मिलने से उन्हें चीन की एक सप्ताह की यात्रा करने का मौका मिला। उन्हें बहुत खुशी हुई कि वे अपनी आंखों से चीन के प्राकृतिक दृश्य व परंपरागत संस्कृति देख सकेंगी, और चीन के विकास को महसूस कर सकेंगी। ये सभी भविष्य में उन की कलात्मक रचना के लिये लाभदायक होंगे।

रूसी संसद के तले शिक्षा व विज्ञान कमेटी की उपाध्यक्ष लुबोव डुखानिना ने कहा कि इस बार की लेख व चित्र प्रतियोगिता ने रूसी युवाओं को आदान-प्रदान करने का अच्छा मौका मिला। उन के अनुसार,प्रतियोगिता ने दूसरे देश तथा वहां रहने वालों को समझने के लिये ज्यादा मौके दिये हैं। साथ ही बच्चों को अपनी दृष्टि को विस्तार करने और नये मित्र बनाने का मौका भी मिला।

रूसी बच्चों की आंखों में चीन कैसा है?लंबी दीवार, पांडा, ड्रैगन नाव, काप, पतंग इत्यादि। बच्चों ने ब्रश से कागज़ पर चीनी प्रतीक बनाकर चीन के प्रति अपना प्रेम दिखाया। सीमांत क्षेत्र की प्राइमरी स्कूल से आए छोटे बच्चे अलेक्सांडर द्वारा बनायी गयी चित्र काप ने मेरी नज़र में चीन प्रतियोगिता का पहला पुरस्कार जीता। इस की चर्चा में उन्होंने कहा,मैंने नौ कापों के चित्र बनाये। उन में आठ लाल रंग के हैं, और एक काला रंग का है। चीन में काप सुख का द्योतक है।

अलेक्सांडर चीन यात्रा की बड़ी प्रतीक्षा में हैं। ताकि वे लंबी दीवार को देख सकें, और चीनी बच्चों के जीवन को भी जान सकें। भविष्य में वे चीनी भाषा सीखना चाहते हैं। क्योंकि चीनी भाषा जानकर वे चीन को और गहन रूप से समझ सकेंगे। छै वर्षीय लड़की पोलिना को भी चित्र प्रतियोगिता में पहला पुरस्कार मिला। उन्होंने मां-बाप के साथ चीन के पेइचिंग, छंगतू, क्वोचो व मानचोली की यात्रा की थी। उन के अनुसार चीन में उन की सब से पसंदीदा चीज़ चीन के चिड़ियाघर व गोल्डन बंदर हैं। चीन के अन्य विशेष जानवर भी उन्हें बहुत पसंद हैं। उन्होंने कहा,क्योंकि यह प्रतियोगिता चीन के बारे में है, इसलिये मैं पांडा की चित्र बनाना चाहती हूं। मेरी चित्र में पांडा का एक परिवार है।

एक एक सुन्दर चित्र देखकर लोग चीन के प्रति रूसी बच्चों के प्रेम को महसूस कर सकते हैं। हालांकि उन में ज्यादा बच्चों को चीनी नहीं आती, उन्होंने चीन की यात्रा भी नहीं की, लेकिन चीन के बारे में वे खूब जानते हैं। हाल के कई वर्षों में चीन व रूस के बीच मानवीय आदान-प्रदान दिन-ब-दिन गहन हो रहा है। रूसी मीडिया भी चीन के बारे में ज्यादा से ज्यादा रिपोर्ट देती हैं। ज्यादा से ज्यादा रूसी बच्चों को चीन के प्रति बड़ा शौक पैदा हुआ। रूस स्थित चीनी राजदूत ली ह्वेई ने कहा कि वर्ष 2019 चीन व रूस के बीच राजनयिक संबंध स्थापना की 70वीं वर्षगांठ है। आशा है ज्यादा से ज्यादा रूसी युवाओं को चीन में यात्रा करने या पढ़ाई करने का मौका मिल सकेगा। जिससे वे वास्तविक चीन को जान सकेंगे, और दोनों देशों की मित्रता को मजबूत कर सकेंगे, ताकि चीन-रूस मित्रता पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ सके।

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