31वां इस्फ़हान अंतर्राष्ट्रीय बाल व युवा फिल्म दिवस उद्घाटित

2018-09-05 10:57:17
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दोस्तो, स्थानीय समयानुसार 30 अगस्त से 5 सितंबर तक 31वां इस्फ़हान अंतर्राष्ट्रीय बाल व युवा फिल्म दिवस ईरान के प्रसिद्ध पर्यटन शहर इस्फ़हान में उद्घाटित हुआ। 70 से अधिक देशों के चार सौ से अधिक बाल फ़िल्मों ने इस दिवस में भाग लिया। फिल्म दिवस के कर्मचारी ने संवाददाता से कहा कि इस्फ़हान अंतर्राष्ट्रीय बाल व युवा फिल्म दिवस की बुनियादी नीति बच्चों के लिये और बच्चों पर ध्यान देना है। इसलिये बाल मूल्यांकनकर्ता फिल्म पुरस्कार चुनने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं।

आयोजक के मुताबिक, इस बार के फिल्म दिवस में बाल व पर्यावरण, बाल व स्वास्थ्य, बाल व पर्यटन, बाल व आत्मविश्वास चार मुख्य विषय शामिल हुए हैं। उन में ईरान के सात फ़िल्मों व अन्य देशों से आई 15 फिल्मों को प्रतिस्पर्द्धा में भाग लेने का मौका मिला। इस बार के फिल्म दिवस के अंतर्राष्ट्रीय मूल्यांकन समन्वयक बाहमन नूराई ने कहा कि इस बार फिल्म दिवस की सब से बड़ी विशेषता यह है कि फिल्म के मूल्यांकन दल में बच्चे महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। वे अपनी राय से फिल्म का अंतिम मूल्यांकन कर सकते हैं। उन्होंने कहा,हमारे फिल्म दिवस में कुल दो मूल्यांकन दलों का गठन किया गया। एक बाल मूल्यांकन दल है, जिसमें बच्चे अपनी पसंद से फिल्मों का मूल्यांकन कर सकते हैं। दूसरा वयस्क मूल्यांकन दल है। जिसमें वे फिल्म दिवस के  नियम के अनुसार फिल्मों का मूल्यांकन करते हैं। इस साल का बाल मूल्यांकन दल 20 अंतर्राष्ट्रीय बच्चों और ईरान के इस्फ़हान से आए 20 बच्चों से गठित है। वे एक साथ फ़िल्म देखते हैं, फिर विचार-विमर्श करते हैं। अंत में वे अपने दिल में सब से पसंदीदा फिल्म चुनते हैं। यह कहा जा सकता है कि इस्फ़हान अंतर्राष्ट्रीय बाल व युवा फिल्म दिवस का सब से आश्चर्यजनक भाग यह है कि बच्चे अपनी इच्छा से फिल्मों का मूल्यांकन कर सकते हैं।

इस बार के फिल्म दिवस ने भारत, जापान, सीरिया, रूस, चेक गणराज्य व जॉर्जिया आदि देशों के फिल्म निदेशकों को आकर्षित किया। अनिल कुमार  उनमें से एक हैं। वे भारत के इरिस ग्रीन फिल्म्स स्टूडियो के निदेशक हैं। इस बार के फिल्म दिवस में भाग लेने से पहले उन्होंने 41 फिल्में बनायी हैं। अनिल के अनुसार फिल्म किशान में अनाथ किशान और अकेली बूढ़ी मां के बीच की एक कहानी है। बूढ़ी मां के बेटे व बेटी यूरोप व अमेरिका में रहते हैं, जो बहुत अमीर हैं, लेकिन उन्हें भारत में वापस लौटकर अपनी मां से मिलने का वक्त बहुत कम है। इसलिये बूढ़ी मां बहुत अकेली रहती हैं। लेकिन एक दिन बूढ़ी मां को अनाथ किशान मिलता है। किशान की मासूम मुस्कुराहट से बूढ़ी मां ने फिर एक बार स्नेह व प्यार महसूस किया। अनिल ने संवाददाता से कहा कि उन्हें आशा है कि इस बार के फिल्म दिवस से वे सहयोग के ऐसे साझेदार मिल सकेंगे, जिन्हें भी बाल फिल्में बहुत पसंद हैं। उन्होंने कहा,मैंने सुना है कि इस्फ़हान अंतर्रष्ट्रीय बाल व युवा फिल्म दिवस एक बहुत लोकप्रिय व प्रसिद्ध फिल्म दिवस है। इसलिये मैं यहां आकर कुछ लोगों से मिलना चाहता हूं। मेरे ख्याल से वर्तमान में ऐसा फिल्म दिवस बहुत कम है, जिसकी स्थापना बच्चों के बीच संपर्क रखने के लिये की जाती है। पर इस्फ़हान अंतर्राष्ट्रीय बाल व युवा फिल्म दिवस बाल के विषय पर बड़ा ध्यान देता है। इस बार प्रतियोगिता में भाग लेने वाली मेरी फिल्म मेरे द्वारा 41वीं फिल्म है। लेकिन यह पहला मौका है जब मैंने बाल फिल्म बनायी। मुझे आशा है कि इस फिल्म दिवस में मैं अन्य सहयोग साझेदार ढूंढ़ सकूंगा, और हम एक साथ फिल्म बना सकेंगे।

निदेशकों के अलावा कुछ फिल्म वितरण कर्ताओं ने भी बड़े शौक के साथ इस्फ़हान के फिल्म दिवस में भाग लिया। नेरिमन बेराम जर्मनी के गैर लाभकारी फिल्म संस्थान किनो की फिल्म वितरणकर्ता हैं। यह संस्थान जर्मनी के विशाल बस्तियों में निःशुल्क से फिल्म स्क्रीनिंग गतिविधि का आयोजन करता है। नेरिमन को आशा है कि इस फिल्म दिवस में वे जर्मन बच्चों की पसंदीदा फिल्मों को ढूंढ़ सकती हैं। नेरिमन ने संवाददाता से कहा कि वे लगातार 20 वर्षों तक लोकोपकार फिल्मों को जारी करने का काम करती हैं। ईरान द्वारा फिल्म कला में प्राप्त उपल्बधियां बहुत ऊंची हैं। उन्हें आशा है कि इस बार के इस्फ़हान अंतर्राष्ट्रीय बाल व युवा फिल्म दिवस में वे कुछ अच्छी फिल्में ढूंढ़ पाएंगी। उन के अनुसार,फिल्म बनाने में ईरान की अच्छी परंपराएं हैं। वर्ष 2006 में आयोजित ईरानी अंतर्राष्ट्रीय फिल्म दिवस में मैं ईरान आयी थी। इस बार मैंने फिर एक बार गौरव के साथ इस्फ़हान में आयी हूं। हमने 40 वर्षों से पहले ईरान की फिल्मों का परिचय शुरू किया है। अगले वर्ष हम इस्फ़हान के दो कलाकारों के लिये प्रदर्शनी आयोजित करेंगे। हमारी संस्था को बस्तियों से समर्थन मिला है। हम न सिर्फ़ फिल्म स्क्रीनिंग करते हैं, बल्कि फिल्म से संबंधित चर्चा भी करते हैं, और संस्कृति पार आदान-प्रदान आयोजित करते हैं। मुझे आशा है कि इस बार के इस्फ़हान अंतर्राष्ट्रीय बाल व युवा फिल्म दिवस में मैं कुछ आश्चर्यजनक व क्रिएटिव फिल्म ढूंढ़ पाऊंगी।

इस बार के फिल्म दिवस में ईरान के छह विश्व प्रसिद्ध निदेशकों को आमंत्रित किया गया। जो वयस्क मूल्यांकन दल के सदस्य हैं। वे बाल मूल्यांकन दल के साथ प्रतिस्पर्द्धा में शामिल फिल्मों का मूल्यांकन करते हैं। वयस्क मूल्यांकन दल के सदस्य, ईरान की प्रसिद्ध निदेशक फ़ेरयल बेहज़ाद ने संवाददाता से कहा कि एक पेशेवर निदेशक के रूप में उन्हें आशा है कि ज्यादा से ज्यादा ऐसी फिल्में बनायी जा सकेंगी, जिन्हें देखकर बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सकती है। पर वे अपने विचार को बच्चों के दिमाग में विवश से नहीं डालना चाहती। वे बच्चों को अपनी इच्छा से फिल्मों का मूल्यांकन करने को प्रोत्साहन देती हैं। उन्होंने कहा,बेशक वयस्क मूल्यांकन दल के एक सदस्य के रूप में हम अपने विचार होते हैं। पर बाल मूल्यांकन दल के सदस्यों को भी अपने विचार होते हैं। कभी कभार हमने उन फिल्मों को चुन लिया, जो हमारे ख्याल से बच्चों के लिये लाभदायक हैं। लेकिन बाल मूल्यांकन कर्ताओं को इसे पसंद नहीं है। या शायद बाल मूल्यांकन कर्ताओं की पसंदीदा फिल्मों से हम भी सहमत नहीं हैं। पर कभी कभार हम दोनों पक्षों ने अच्छी फिल्म के मापदंडों पर एकमत होकर सहमति प्राप्त की। यह बहुत अच्छी बात है। मेरे ख्याल से हमें अपने विचारों को बच्चों के मन में नहीं डालना चाहिये। अगर वे कुछ फिल्मों को देखने में खूब मज़ा ले सकते हैं, तो वे अपना फैसला कर सकते हैं।

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