मारिनस्की थिएटर में पहली चीनी सोप्रानो शू मिंगहोंग

2018-08-01 16:59:52
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दोस्तों, चीन व रूस के बीच मानवीय संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग ज्यादा से ज्यादा गहन होने के साथ अधिक से अधिक युवाओं को एक दूसरे देश में पढ़ाई करने, काम करने व जीवन बिताने का मौका मिल सकता है। उन में कुछ श्रेष्ठ लोगों को भी स्थानीय लोगों का स्वागत मिला। रूस के प्रसिद्ध मारिनस्की थिएटर में प्रस्तुत करने वाली एक चीनी युवा सोप्रानो उन में से एक हैं।

200 वर्षीय रूसी मारिनस्की थिएटर विश्व प्रसिद्ध है, जिसे रूस के संगीत व नृत्य कला का एक नेमकार्ड माना जाता है। अभिनेता, जो इस थिएटर में कार्यक्रम प्रस्तुत कर सकते हैं, तो मुख्य तौर पर बहुत श्रेष्ठ रूसी अभिनेता या अभिनेत्री होते हैं। पर वर्ष 2017 में एक चीनी युवा सोप्रानो का मुंह पहली बार मारिनस्की थिएटर के मंच पर दिखाया गया। उनका नाम है शू मिंगहोंग।

शू मिंगहोंग का जन्म चीन के ल्याओनिंग प्रांत में एक सामान्य परिवार में हुआ था। बचपन से ही उन्हें संगीत बहुत पसंद था। केवल एक बार गीत सुनने के बाद वह गाना गा सकती थी। लेकिन उस समय उन के मां-बाप के विचार में गायन बेटी के लिये एक उचित व्यवसाय नहीं है। इसलिये उन्होंने इस क्षेत्र में अपनी बेटी को समर्थन भी नहीं दिया। जूनियर हाई स्कूल में पढ़ते समय शू मिंगहोंग अकसर जेब खर्च का पैसा इकट्ठा करके ऑडियो टेप खरीदा। घर में वे चुपचाप से टेप सुनकर गीत गाने का अभ्यास करती थी। मां-बाप की चिंता को दूर करने के लिये स्कूल में उन के अंक हमेशा अच्छे थे। लेकिन हाई स्कूल में प्रवेश करने के बाद जीवन योजना पर शू व मां-बाप के बीच मतभेद मौजूद हुए। मां-बाप ने यह चाहा कि वे सैन्य विश्वविद्यालय या व्यापक विश्वविद्यालय में आवेदन कर सकेंगी। पर शू संगीत के प्रेम में व्यस्त थीं। वे चाहती थी कि उन का भविष्य गीत-संगीत से जुड़ सके। अंत में बेटी की दृढ़ता से मां-बाप शू के चुनाव से सहमत हुए । हाई स्कूल के दूसरे साल में शू मिंगहोंग ने औपचारिक रूप से गायन सीखना शुरू किया। उन के अनुसार,उस समय मैं एक खाली कागज जैसी थी। फिर अध्यापक ने फ़ौरन इस खाली कागज पर चित्र बनाया। ऑडिशन कान, संगीत सिद्धांत, पियानो एकदम मेरी पीठ पर आ गये।

मेहनत व्यावसायिक पढ़ाई के बाद शू मिंगहोंग ने वर्ष 2008 में सुचारू रूप से चीन के शनयांग संगीत कॉलेज में प्रवेश लिया। आखिरकार शू संगीत के समुद्र में आराम से तैर सकती थी। उस समय वे बड़ी लगन से वोकल संगीत सीखती थीं। कोशिश के साथ प्रतिभा ने उन्हें खुशी भी दी। शू मिंगहोंग थीसिस पर पहले स्थान पर रहने और व्यावसायिक अध्ययन में दूसरे स्थान पर रहने की अच्छी उपलब्धियों से शनयांग संगीत कॉलेज से स्नातक हुईं। फिर वे कहां जाएंगी। यह फैसला दो साल पहले उन्होंने किया।

वर्ष 2010 में शू मिंगहोंग को जर्मन से एक वोकल मास्टर क्लास में मुफ्त शिक्षा लेने का निमंत्रण मिला। जब वे पहली बार जर्मनी में जाकर राइन नदी के किनारे पर घूमती थी, तो वे आश्चर्य से यह महसूस करती थी कि उनके द्वारा गाए गये ओपेरा वास्तविकता से कितने मिलते-जुलते थे। यहां तक कि हवा में भी संगीत नाच रहा था। तो उसी समय से ही उन्होंने यह फैसला किया कि वे ज़रूर यूरोप में भाषा सीखेंगी, और पश्चिमी शास्त्रीय संगीत की सुन्दरता महसूस करेंगी। वर्ष 2012 में शू ने जर्मन लुबेक संगीत कॉलेज में पढ़ाई की। वहां उन्होंने दस से अधिक वोकल प्रोफेसरों, जो विभिन्न शहरों में रहते हैं, से शिक्षा ली। जिससे उन के गीत गाने व प्रस्तुत करने का स्तर उन्नत हो गया। दो साल की पढ़ाई के बाद शू न सिर्फ़ अच्छी तरह से जर्मन भाषा बोल सकती हैं, बल्कि ओपेरा गाने में उन की तकनीक ने भी छलांग लगायी।

वर्ष 2014 में रूस के शाइकोवस्की संगीत कॉलेज की एक मास्टर कक्षा में शू मिंगहोंग के गायन ने पास में बैठी हुई रूसी प्रसिद्ध गायिका लारिसा रुदाकोवा पर गहरी छाप छोड़ी। इस की चर्चा में उन्होंने कहा,जब मैंने उनका गायन सुना, तो बहुत आश्चर्य हुआ। क्योंकि उन की आवाज़ बहुत मधुर थी। हालांकि कमी भी थी, लेकिन इसमें सुधार किया जा सकता था। बाद में शू के साथ बातचीत करते समय मैंने उन्हें पूछा कि क्यों गीत गाने के दौरान सांस का इस्तेमाल अच्छी तरह से नहीं कर सकी?

लारिसा ने शू को कमी बताने के साथ साथ उन्हें मास्को में पढ़ाई लेने का आमंत्रण भी दिया। मिंगहोंग के ख्याल से अध्यापिका की बातें बहुत सही थी। फिर वर्ष 2015 में उन्होंने रूस में जाकर लारिसा से ओपेरा गाना सीखना शुरू किया। अध्यापिका लारिसा बहुत गंभीर हैं। उन्होंने शू से कसरत करने से अपनी मांसपेशी को मजबूत करने, सांस का उचित रूप से प्रयोग करने, और वज़न को बढ़ाने का आग्रह किया। शू ने जल्द ही अध्यापिका की बातों का पालन करके अभ्यास शुरू किया। अध्यापिका की गंभीरता से मिंगहोंग का गायन स्तर जल्द ही उन्नत हो गया। उन के अलावा मिंगहोंग केवल दो सालों में अच्छी तरह से रूसी भाषा बोल सकती हैं। इस पर लारिसा बहुत प्रभावित हुई। इस की चर्चा में उन्होंने कहा,उन्हें बहुत जल्दी से रूसी आती है। और वे अच्छी तरह से रूसी बोल सकती हैं। उच्चारण की कोई समस्या नहीं है। भाषा क्या है? वह राग है, वह सुर है। वे लोग, जो जल्द ही भाषा सीख सकते हैं, आम तौर पर संगीत भी समझते हैं।

भाषा को छोड़कर हर एक नाटक में कहानी व भावना भी शामिल हुई हैं। अच्छे ओपेरा गायन में अभिनेता नाजुक भावनाएं भी दिखा सकते हैं। इसलिये शू ध्यान से हर नाटक का अध्ययन करती हैं। उदाहरण के लिये ओपेरा ला ट्रेविटा को अच्छी तरह से गाने के लिये शू ने पुस्तक ला ट्रेविटा को दस से अधिक बार पढ़ा है। ताकि वे अच्छी तरह से नायक की भावना महसूस कर सकें, फिर अपनी आवाज़ से यह भावना दिखा सकें।

जर्मनी व रूस में पढ़ाई करने से शू मिंगहोंग का गायन स्तर बहुत हद तक उन्नत हो गया। वर्ष 2016 से उन्होंने रूसी गायन प्रतियोगिता में भाग लेना शुरू किया, और अच्छी उपलब्धियां भी प्राप्त कीं। वर्ष 2017 के सितंबर में आयोजित 11वें अंतर्राष्ट्रीय युवा गायन प्रतियोगिता में हालांकि शू ने फ़ाइनल में प्रवेश नहीं किया, लेकिन उन्हें अपनी क्षमता से मारिनस्की थिएटर में काम करने का आमंत्रण मिला। जिससे वे इस रूसी पुरातन थिएटर में काम करने वाली पहली चीनी गायिका बनी।

मारिनस्की थिएटर में सुव्यवस्थित प्रतिभा प्रशिक्षण प्रणाली होती है। शू मिंगहोंग अन्य सभी अभिनेताओं के साथ प्रशिक्षण लेती हैं, आदान-प्रदान करती हैं, और प्रस्तुतियां करती हैं। सभी लोग ओपेरा के प्रेम में एक साथ विकसित हो रहे हैं। शू मिंगहोंग बहुत खुशी के साथ इस कला परिवार में रहती हैं।

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