फिलिस्तीनी बच्चों का सपना

2018-06-29 13:32:56
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दोस्तो, फिलिस्तीनी शरणार्थी बच्चों की शिक्षा स्थिति जानने के लिये हमारे संवाददाता ने जोर्डन नदी के पश्चिम तट पर स्थित संयुक्त राष्ट्र संघ के पूर्वी फिलिस्तीनी शरणार्थी राहत व कार्य एजेंसी के प्रधान के साथ बेतलहेम में स्थित आइदा शरणार्थी शिविर यानी आइदा कैम्प में लड़कों के स्कूल का दौरा किया।

आइदा शिविर की स्थापना वर्ष 1950 में हुई। जिसका कुल क्षेत्रफल 0.71 वर्ग किलोमीटर है। वह जोर्डन नदी के पश्चिमी तट पर बेतलेहेम व बेइट जाला के बीच स्थित है। अब शिविर में केवल एक स्कूल मौजूद है, यानी आइदा शरणार्थी शिविर लकड़े स्कूल है। उस के अलावा शिविर से बेइट जाला जाने के रास्ते पर और एक स्कूल है, जहां शरणार्थी बच्चे शिक्षा ले सकते हैं।

आइदा शरणार्थी शिविर के लकड़े स्कूल की स्थापना वर्ष 1951 में हुई। जिस की स्थापना संयुक्त राष्ट्र संघ के पूर्वी फिलिस्तीनी शरणार्थी राहत व कार्य एजेंसी द्वारा की गयी। स्कूल में एक दो मंजिला इमारत और एक मैदान है। इमारत में कुल मिलाकर 14 क्लास रूम व एक छोटा सा पुस्तकालय है। स्कूल के प्रमुख अहमद जावाबिर ने संवाददाता से कहा कि,आइदा शरणार्थी शिविर में लड़कों के स्कूल की स्थापना पिछले शताब्दी की 50वें दशक की शुरुआत में हुई। शुरू में स्कूल का स्थल निरंतर रूप से बदलता था। अंत में वर्तमान का स्थल निश्चित किया गया। अब स्कूल में कुल 400 विद्यार्थी पढ़ते हैं। वे चौथे ग्रेड से नौवीं ग्रेड तक के हैं। फिलिस्तीनी शिक्षा मंत्रालय के शिक्षा पाठ्यक्रम के अनुसार वे अरबी भाषा, गणित, अंग्रेजी, सामाजिक विज्ञान, पर्यावरण व स्वास्थ्य आदि शिक्षा लेते हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ के पूर्वी फिलिस्तीनी शरणार्थी राहत व कार्य एजेंसी और फिलिस्तीनी शिक्षा मंत्रालय द्वारा प्राप्त समझौते के अनुसार विद्यार्थी यहां से पास होने के बाद बेतलहेम के हाई स्कूल में अपनी शिक्षा जारी रखेंगे। इस स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थी आइदा शरणार्थी शिविर व आसपास के शरणार्थी शिविर से आए हैं। स्कूल में केवल 14 अध्यापक हैं। यहां की शिक्षा बिल्कुल निःशुल्क है। हर साल के 25 अप्रैल को स्कूल का खुला दिन है। इस दिन में विद्यार्थी बाहर के लोगों को अपनी भिन्न-भिन्न क्षमता को दिखा सकते हैं।

स्कूल के खुले दिन में संवाददाता ने यह दृश्य देखा कि विद्यार्थी स्कूल के मैदान पर खेलते हैं, फुटबाल खेलते हैं। इमारत की दीवार पर विद्यार्थियों की उपलब्धियां या चित्र लगाए गए हैं। शरणार्थी शिविर का एकमात्र खेल का मैदान स्कूल के पास स्थित है। हालांकि इसका क्षेत्रफल बहुत कम है, लेकिन बच्चे बहुत खुशी से इस में फुटबाल खेलते हैं। इजराइल से आए आंसू गैस की रोकथाम करने के लिये लोगों ने खास तौर पर मैदान के चारों ओर कांटेदार तार लगाए हैं।

आइदा शरणार्थी शिविर के लड़के स्कूल के बाहर तो इजराइल द्वारा निर्मित अलगाव दीवार है। दोनों के बीच केवल एक कार चैनल ही है। हर बार जब फिलिस्तीन व इजराइल के बीच संघर्ष हुआ, तो इजराइली सेना प्रदर्शनकारियों का नियंत्रण करने के लिये तरह तरह की गोली या बम छोड़ती है। भयंकर गोलीबारी की आवाज़ और आंसू गैस से विद्यार्थियों के शरीर व दिल में बुरा असर पड़ता है। इंटरव्यू लेने के दौरान विद्यार्थियों ने संवाददाता से बताया कि यह स्कूल के प्रति सबसे बड़ी परेशानी है। आइदा शरणार्थी शिविर के लड़के स्कूल के छात्र संघ के अध्यक्ष, 9वीं ग्रेड के विद्यार्थी खंडुम मज़न अटिये ने कहा,स्कूल की शिक्षा बहुत अच्छी है, लेकिन बाहर से आए हस्तक्षेप ज्यादा हैं। स्कूल के पास इजराइल द्वारा निर्मित अलगाव दीवार है। वे अकसर स्कूल की ओर आंसू गैस छोड़ते हैं, और विद्यार्थियों को पकड़ लेते हैं। इजराइल का कब्ज़ा सबसे बड़ी बाधा है। वे रास्ते पर बैरियर रखते हैं, और हमें निकलने से रोकते हैं।

पर क्रूर वास्तविकता से बच्चों के सपने को नष्ट नहीं किया जा सकता। वे लगातार अपने आदर्श के पीछे दौड़ते हैं। कुछ बच्चे वैज्ञानिक बनना चाहते हैं, और कुछ चित्रकार बनना चाहते हैं। उन्होंने संवाददाता से कहा कि,मेरा लक्ष्य विश्वविद्यालय में पढ़ना है। मैं अपने पसंदीदा विषय सीखना चाहता हूं। ताकि भविष्य में मैं अपने देश व जनता की सेवा कर सकूं।

मुझे विज्ञान पसंद है। मैं एक डॉक्टर बनना चाहता हूं।

मुझे कई बाल चित्र प्रतियोगिताओं में पुरस्कार मिला है। मैं एक चित्रकार बनना चाहता हूं।

मैं एक इंजीनियर बनकर अपने देश का निर्माण अच्छी तरह से करूंगा, और सुन्दर भविष्य बनाऊंगा।

आइदा शरणार्थी शिविर में रहने वाले शरणार्थी येरूशलम व हेबरोन दो शहरों के पश्चिमी गांवों से आए हैं। सब से पहले पंजीकृत शरणार्थियों की संख्या 3150 है। लेकिन जनसंख्या की निरंतर वृद्धि से अब शिविर में शरणार्थियों की संख्या 50 हजार से अधिक हो चुकी है। पूर्वी फिलिस्तीनी शरणार्थी राहत व कार्य एजेंसी की वेबसाइट पर जारी आंकड़ों के अनुसार यहां का आबादी घनत्व हर वर्ग किलोमीटर में 77464 तक पहुंच गया है। और बेरोजगारी दर 43 प्रतिशत तक पहुंच गयी। वर्तमान में  शरणार्थियों के सामने बहुत समस्याएं मौजूद हैं। जैसे:शरणार्थी शिविर में चिकित्सा केंद्र का अभाव है। अगर शरणार्थी बीमार हो, तो वे एक किमी. दूर के पूर्वी फिलिस्तीनी शरणार्थी राहत व कार्य एजेंसी के चिकित्सा केंद्र में इलाज लेंगे। उन के अलावा शिविर में बहुत भीड़भाड़ है। बुनियादी सुविधाएं भी बहुत खराब व पुरानी हैं। पेयजल व प्रदूषित जल की व्यवस्था का सुधार किये जाने की ज़रूरत है। आइदा शरणार्थी शिविर लड़के स्कूल भी ऐसी मुसीबत में है। स्कूल की शिक्षा इमारत भूकंप के झटके सहन नहीं कर सकती है। आइदा शरणार्थी शिविर संभालने वाले सरकारी अधिकारी अमजद अबू लाबन ने कहा,हम लगातार इस स्कूल का पुनर्निर्माण के लिये पूंजी इकट्ठा कर रहे हैं। वर्तमान की शिक्षा इमारत की स्थापना पिछले शताब्दी के 80वें दशक में की गयी। वास्तुकार ने हमें बताया कि इस के ऊपर किसी मंजिल का निर्माण नहीं किया जा सकता। शरणार्थी शिविर में ज्यादा बड़े स्कूल व चिकित्सा केंद्र का निर्माण करने के लिये हमने दाता देश से स्कूल का पुनर्निर्माण करने का आग्रह किया। हाल ही में हमें सऊदी अरब से चंदा मिल गया। जिससे हम स्कूल का पुनर्निर्माण कर सके, और स्कूल के पास एक चिकित्सा केंद्र की स्थापना भी करेंगे। पूर्वी फिलिस्तीनी शरणार्थी राहत व कार्य एजेंसी की योजना के अनुसार नयी शिक्षा इमारत में कुल पाँच मंजिल होंगी। इस में प्रशासनिक कार्यालय, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, बहुआयामी हॉल, और 30 क्लास रूम शामिल होंगे। यहां एक हजार विद्यार्थी पढ़ सकेंगे।

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