नेपाली महिला संवाददाता पर्वतारोही टीम

2018-06-21 08:42:54
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नेपाली महिला संवाददाता पर्वतारोही टीम

दोस्तो, माउंट एवरेस्ट, जो विश्व का तीसरा ध्रुव माना जाता है, इस पर चढ़ना विश्व में विभिन्न पर्वतारोहियों का एक सपना होता है। वर्ष 2018 के वसंत में नेपाल से आईं पाँच महिला संवाददाता भी माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने की टीम में शामिल हुईं। उन्होंने अपनी कोशिश से शिखर पहुंचने का गौरव प्राप्त किया।

नेपाली महिला संवाददाता पर्वतारोहण टीम की स्थापना जनवरी 2017 में हुई। टीम की अध्यक्ष नेपाली राष्ट्रीय टीवी स्टेशन से आई संवाददाता रोजिता बुद्धाचार्या हैं। उन्होंने परिचय देते हुए कहा कि,हम नेपाल की विभिन्न मीडिया से आईं पाँच महिला संवाददाता हैं। वर्ष 2018 के वसंत में माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने के लिये हमने एक साल की तैयारी की थी। हमारी योजना यह है कि 5 अप्रैल को काठमांडू से रवाना होकर लुकला पहुंचने के बाद हम औपचारिक रूप से यह पर्वतारोहण शुरू करेंगी। 17 से 20 अप्रैल के दौरान हम अच्छा अवसर पकड़कर लोबुछे पर्वत पर चढ़ेंगी। इस पर्वत की ऊँचाई 6119 मीटर है। फिर 12 से 29 मई के दौरान हम माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने की कोशिश करेंगी।

नेपाली महिला संवाददाता पर्वतारोही टीम ने जून 2017 से औपचारिक रूप से अभ्यास शुरू किया। सबसे पहले कुछ पर्वतारोहण से जुड़े पारिभाषिक शब्दों व संबंधित तकनीकों की पढ़ाई और शारीरिक क्षमता का अभ्यास था। टीम की पांचों सदस्यों की शारीरिक क्षमता बहुत श्रेष्ठ है। उन में एक सदस्य ने पैदल से नेपाल की 70 प्रतिशत से अधिक काऊंटियों व गांवों का दौरा किया है। एक सदस्य निरंतर रूप से अभ्यास करने वाली एक अंशकालिक नर्तकी हैं। और कई सदस्यों को आउटडोर खेल गाइड का व्यावसायिक प्रमाण पत्र मिला है। सदस्यों ने सुचारु रूप से भूमि पर अभ्यास को समाप्त किया है। फिर वे बर्फ़ीले पहाड़ी क्षेत्र में चली गयीं। 26 नवंबर 2017 की सुबह 8 बजकर 25 मिनट पर नेपाली महिला संवाददाता पर्वतारोही टीम 5925 मीटर ऊंचे रामतुंग पर्वत पर पहुंची। इस के बाद 28 नवंबर की सुबह 11 बजकर 50 मिनट पर 5630 मीटर वाले यालोंग री पर्वत पर भी पहुंची। कई दिनों में वे सफलता से दो ऊंचे पर्वतों पर पहुंच गयी। इसकी चर्चा में टीम की अध्यक्ष रोजिता ने कहा,पर्वतारोहण की प्रक्रिया हमारी कल्पना से ज्यादा आसान है। पर बहुत दिलचस्प है। अब हम काठमांडू में थी और एवेरेस्ट पर्वत चढ़ाने की तैयारी कर रही थी। तब हमने रास्ते की योजना बनायी इस बार पर्वतारोहण इतना आसान नहीं होगा।

वर्ष 1953 के 29 मई को न्यूजीलैंड के सर एडमंड हिलेरी नेपाली गाइड तेनजिंग नोरगे के साथ दक्षिण ओर से एवरेस्ट पर पहुंचे। यह मानव के रिकॉर्ड में पहली टीम ही है, जो सफलता से एवरेस्ट पर पहुंची। इस के बाद दसेक वर्षों में अनगिनत टीमों ने एवरेस्ट पर चढ़ने की चुनौती की। उनमें कुछ सफल रहे, और कुछ विफल । अपनी टीम की चर्चा में नेपाली राष्ट्रीय न्यूज़ एजेंसी से आई महिला संवाददाता रोशा बासनेट ने कहा,मौसम हमारे नियंत्रण में नहीं है। इसलिये हम अप्रैल के पहले हफ्ते में रवाना हुईं, लेकिन मई में हम अच्छे मौके पर पर्वतारोहण कर सकती हैं। क्योंकि इसी समय का मौसम एवरेस्ट के पर्वतारोहण के लिये सब से अच्छा होगा। साथ ही हमें उसी समय सदस्यों की शारीरिक स्थिति व टीम सहयोग की स्थिति पर ध्यान देना होगा। अभी तक हमारी स्थिति बहुत अच्छी है। इस से पहले आयोजित अभ्यास भी सुचारू रूप से चलता था। व्यापक स्थिति ठीक-ठाक है। लेकिन पता नहीं है भविष्य कैसा होगा। इसका अनुमान नहीं लगाया जा सकता है।

इस महिला संवाददाता पर्वतारोहण टीम में नेपाली मेघा टीवी स्टेशन से आई कल्पना महाराजन ने दूसरी बार एवरेस्ट की चुनौती की। वर्ष 2014 में वे एवरेस्ट पर चढ़ने से पहले 6476 मीटर ऊंचे पर्वत पर चढ़ने के दौरान बीमार हो गयी। वे काठमांडू के अस्पताल में भर्ती होने के बाद सात दिन बेहोश रही। जागने के बाद उन्होंने फ़ौरन यह फैसला किया कि वे फिर एक बार एवरेस्ट का पर्वतारोहण करेंगी। कल्पना ने कहा,भगवान ने मुझे दूसरी जान दी है। इसलिये मैं फिर एक बार पर्वतारोहण करूंगी। इस बार हमने अच्छी तरह से तैयारी की है। मुझे हारना नहीं है। पर प्रकृति को नियंत्रण में नहीं किया जा सकता है।

उन के अलावा नेपाली महिला संवाददाता पर्वतारोहण टीम की सदस्य डूराली चामलिंग ने यह आशा जताई कि वे अपने साहस से विश्व को यह दिखाना चाहती हैं कि महिलाएं पुरुषों से कम नहीं होती हैं। उन्होंने कहा,एवरेस्ट प्रकृति का उत्पाद है। प्रकृति सभी लोगों के लिये समान है। चाहे आप पुरुष हैं या महिला।

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