चीनी महिला स्नूकर रेफ़री ली आन की कहानी

2018-05-10 10:18:09
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दोस्तों, वर्ष 2018 स्नूकर विश्व चैंपियनशिप हाल ही में ब्रिटेन के शेफ़िल्ड में स्थित करूसिबल में उद्घाटित हुई, जहां स्नूकर का पवित्र मंदिर माना जाता है। विश्व के तीसरे स्थान पर रहे चीनी खिलाड़ी तिंग ज्वूनह्वेई और अन्य तीन चीनी खिलाड़ियों के अलावा और एक लंबी और गंभीर चीनी महिला स्नूकर रेफ़री ने भी दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। वे तो स्नूकर की विश्व चैंपियनशिप में शामिल तीसरी चीनी महिला रेफ़री ली आन हैं।

रेफ़री ली आन और चीन के थाईवानी प्रसिद्ध फ़िल्म निर्देशक ली आन, दोनों के नाम एक ही तरह के है। वे पेइचिंग से आईं वर्ष 1980 के बाद जन्मी एक लड़की हैं। वर्ष 2010 में उन्हें ऑस्ट्रेलिया में अपना रेफरी का लाइसेंस मिला। आठ वर्षों में यह लड़की एक शौकिया रेफरी से अंतर्राष्ट्रीय पेशेवर रेफरी बन गयीं। और वर्ष 2018 में वे सबसे प्रसिद्ध स्नूकर की विश्व चैंपियनशिप में शामिल हुईं। इस की चर्चा में उन्होंने कहा,जब मैं जानती हूं कि मैं विश्व चैंपियनशिप की रेफरी बन गयी, तो मुझे बहुत खुशी हुई। क्योंकि केवल सबसे श्रेष्ठ रेफ़री, जिन्हें आम स्वीकार प्राप्त है, को विश्व चैंपियनशिप जैसी औपचारिक प्रतियोगिता में काम करने का आमंत्रण मिल सकता है। मैं कई सालों से स्नूकर रेफ़री हूं, साथ ही मैं खुद भी एक स्नूकर खिलाड़ी हूं। इसलिये यहां आकर मैं बहुत उत्तेजित हूं।

35 वर्षीय ली आन को बचपन से ही स्नूकर का बड़ा शौक है। उन का स्नूकर रास्ता औपचारिक प्रशिक्षण से नहीं है, पर आराम से खेलने से शुरू हुआ है। इसके बारे में उन्होंने हमें एक कहानी बतायी कि,उसी समय मैं पढ़ने के लिये विदेश में जाऊंगी। जाने से पहले सहपाठियों का एक मिलन समारोह आयोजित हुआ। इस दौरान हमने स्नूकर भी खेला। वास्तव में पहले का मनोरंजन आइटम बहुत कम था। खेलते समय मैंने कई सहपाठियों को हराया। और अंतिम वाले ने मुझपर गहरी छाप छोड़ी। क्योंकि उन्होंने कहा कि मैं पेइचिंग शहर के पश्चिम क्षेत्र की चैंपियन हूं, आप ने कैसे मुझे हरा दिया?वे बहुत नाखुश थी। उसी समय वे जल्द ही नीदरलैंड जाएंगी, और मैं जल्द ही ऑस्ट्रेलिया जाऊंगी। तो उन्होंने कहा कि आप मेरा इंतजार कीजिये, मैं आप को हराऊंगी। फिर मैंने जवाब दिया कि ठीक है। इस वचन का पालन करने के लिये मैं ऑस्ट्रेलिया में लगातार स्नूकर खेलती थी।

उसी समय 16 वर्षीय ली आन वर्ष 1999 में अकेले से ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड स्टेट में पढ़ाई कर रही थीं। वहां उन्होंने लगातार दस से अधिक साल बिताए। इस दौरान ली आन को स्नूकर और ब्रिटिश बिली खेलने का बड़ा शौक पैदा हुआ। हालांकि कोई कोच नहीं थे, लेकिन बड़ा जोश होने के नाते और अकसर श्रेष्ठ बिलियर्ड मास्टरों के साथ खेलने से ली आन की तकनीक और मैच खेलने के अनुभव दिन-ब-दिन बढ़ते गये। उन्होंने कहा,वास्तव में अगर मैं हमेशा महिला के साथ खेलती हूं, तो मेरे मौके ज्यादा अधिक होंगे। क्योंकि मैं जानती हूं कि मैं जीत सकूंगी। और मैं अधिक से अधिक प्रगति हासिल करना चाहती हूं। इसलिये हर बार मैं बहुत मुश्किल तकनीकों का अभ्यास करती हूं, ताकि ज्यादा से ज्यादा अनुभव प्राप्त हो सकें। उनके अलावा विश्वविद्यालय में मैंने खेल मनोविज्ञान को भी सीखा। यह मेरे लिये बहुत महत्वपूर्ण है, खास तौर पर मेरी तरह अनुभव से तकनीक बढ़ाने वाले व्यक्तियों के प्रति।

बहुत कोशिशों के बाद ली आन ने अंत में क्वींसलैंड स्टेट के फ़ाइनल में प्रवेश किया। फ़ाइनल मैच से पहले ली आन ने राष्ट्रीयता व हैसियत के मामले पर वेब पर संबंधित नीति-नियम को चेक किया। वेब पर यह लिखा गया है कि ऑस्ट्रेलिया के नागरिक व ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले व्यक्ति सभी मैच में खेल सकते हैं। फिर उन्होंने इसमें भाग लिया। लेकिन जब ली आन ने फ़ाइनल में जीत दर्ज की, तो दस मिनट के बाद एक आश्चर्य की बात हुई। उन के अनुसार,मेरी याद में उसी साल जब मैंने मैच में जीता, और सभी लोगों ने मुझे बधाई दी। तो स्टेट के अध्यक्ष ने मुझ से कहा कि आप फिर वेब पर संबंधित नीति-नियम को देखिये। जब मैंने वेब पर देखा, तो पता लगा कि ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले व्यक्ति ये शब्द रद्द किये गये। उस समय से ही केवल ऑस्ट्रेलिया के नागरिक इस मैच में भाग ले सकते हैं। क्यों नीति-नियम बदले गये?केवल मैंने इस मैच को जीता था।

इस बात की चर्चा में ली आन की आंखों में आंसू बह गये। शायद स्टेट की चैंपियन प्राप्त करके ली आन और एक रास्ता चुनेंगी। लेकिन राष्ट्रीयता की वजह से उन्हें केवल रेफरी का लाइसेंस मिला। उन्होंने एक विभिन्न तरीके से स्नूकर के प्रति अपना प्रेम दिखाया। उन्होंने कहा,उन्होंने तरह-तरह के तरीकों से मेरे लिये मुश्किलें पैदा कीं और उन्हें आशा है कि मैं अपनी राष्ट्रीयता बदल सकती हूं। लेकिन मैं चीन की राष्ट्रीयता नहीं छोड़ना चाहती, क्योंकि मेरा जन्मस्थान तो पेइचिंग है, मैं कैसे अपनी मातृभूमि को भूल सकती हूं?

वर्ष 2013 में ली आन चीन में वापस लौटकर एक स्नूकर रेफ़री बन गयीं। अपने देश वापस आकर ली आन चीन में स्नूकर के विकास व भविष्य में बड़ी प्रतीक्षा में हैं। उन के अनुसार,उस समय मैं चीन में वापस आकर बहुत प्रभावित हूं। वर्ष 2013 में चीन में स्नूकर कॉलेज की स्थापना नहीं की गयी। लेकिन खेल ब्यूरो की व्यायामशाला में मुझे बीस से अधिक चीनी खिलाड़ी मिले। वे बहुत युवा थे। उन में य्वान सीचे नामक एक लड़के ने मुझपर गहरी छाप छोड़ी। वे केवल 12 या 13 वर्ष के थे। उस की लंबाई भी ऊंची नहीं थी। इसलिये स्नूकर खेलते समय उन्हें बैले नर्तकी जैसे पैर की उंगलियों से खड़ा होना पड़ा। लेकिन उन्होंने बहुत अच्छी तरह से खेल सका। इस पर मैं बहुत प्रभावित हूं।

जब ली आन रेफ़री का काम करती हैं, तो वे बहुत गंभीरता से अपना कर्तव्य संभालती हैं। इस की चर्चा में ली आन ने कहा कि,मुझे यह नहीं चाहिये कि मैच में दर्शक रेफ़री पर ज्यादा ध्यान देते हैं। खास तौर पर मैं यह नहीं चाहती कि लोग मुझे सुन्दरी रेफ़री बोलते हैं। क्योंकि  अगर लोग मुझे सुन्दरी बोलते हैं, तो मेरे रेफ़री के काम की उपेक्षा की जाएगी। पर मुझे आशा है कि लोगों को मेरी तकनीक पर ज्यादा ध्यान देना चाहिये। आशा है लोग मेरी तकनीक से मुझे पसंद करते हैं, सुन्दरता के कारण नहीं।

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