महिलाएं कैसे जी सकती हैं तनाव मुक्त जीवन

2017-11-30 09:59:36
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महिलाएं कैसे जी सकती हैं तनाव मुक्त जीवन

प्रिय महिलाओं आप अपने आप को कमजोर कभी मत समझिए, क्योंकि समाज में जितना अधिकार और महत्व पुरुषों का है उतना ही अधिकार और महत्व महिलाओं का भी है।

सही मायनों में कोई देश विकसित तभी बन सकता है, जब उस देश की महिलाओं को बराबरी के अधिकार और सम्मान प्राप्त हों।

महिलाओं को खुद अपने मानसिक तनाव को कम करने के उपाय सीखने होंगे।बिना महिलाओं के समाज अधूरा और महत्वहीन है।

एक माँ के रूप में बच्चे की बेहतर परवरिश कर योग्य नागरिक बनाने का योगदान हो या एक पत्नी के रूप में अपने पति का हर मुश्किल परिस्थिति में साथ देकर उसका मनोबल बढ़ाना, या एक बेटी और बहू के रूप में अपने माता-पिता और सास-ससुर की देखभाल करना, इन सभी भूमिकाओं में भारतीय महिलाएं समाज को अपना अमूल्य योगदान देती रही हैं।

वक्त बदलने के साथ अब अधिकांश महिलाएं व्यवसाय या नौकरी करने के लिए घर के बाहर जा रही हैं। लेकिन उनसे अभी भी यही अपेक्षा की जाती है कि वे परिवार का भी उतना ही ख्याल रखें।

ये अपेक्षाएं महिलाओं में तनाव का मुख्य कारण है। और इस तनाव से निपटना आज की महिला के लिए मुख्य चुनौती है।

कुछ सुझाव जो महिलाओं को खुश रहने में मददगार हो सकते हैं :-

  अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें। अपने स्वास्थ्य की देखभाल के लिए समय दें और इसके लिए पैसा खर्च करने में संकोच ना करें, क्योंकि आपका स्वास्थ्य आपके लिए अनमोल है।

  आत्मनिर्भर रहना सीखें। जरूरी नहीं कि आप पैसा ही कमाएं, लेकिन आत्मनिर्भर होना महत्वपूर्ण है।

  यदि आप सीख सकती हैं तो कार या बाइक चलाना सीखें, ये जरूरी नहीं है कि हमेशा आपके साथ कोई हो।

  अपनी बचत और आय के प्रबंधन करने के लिए निवेश और करों के बारे में सीखें। हमेशा इन सबके लिए किसी पर निर्भर ना रहें।

  अपनी इच्छाओं या उपहारों के लिए भी बचत करें। ये जरूरी नहीं कि हर बार आपके पति या बॉयफ्रेंड या आपके पापा ही आपके लिए आपकी पसंद के उपहार लाएं। खुद को भी गिफ्ट दीजिये।

  जब आप दोनों पति पत्नी ऑफिस में बराबर काम करते हैं तो घर की जिम्मेदारियां भी दोनों बराबर की लें। माँ या पत्नी के नाम पर वीकेंड में काम करना या देर रात तक काम करना सही नहीं है।

  अपने माता -पिता की बराबर की जिम्मेदारी लें। हमेशा आपका भाई ही उनके सारे काम करें ये सही नहीं है।

  कभी बीमार बच्चे की देखभाल पापा को करने दें। ठीक है, आपका कैरियर भी महत्वपूर्ण है और बच्चे के पापा भी तो बराबर के जिम्मेदार हैं।

  कभी घर के दूसरे सदस्यों को भी किचन संभालने का मौका दें, क्या हुआ, यदि किचन का प्लेटफॉर्म बहुत ही गंदा है या सिंक बर्तनों से भरी पड़ी है। कुछ समय इससे ब्रेक लें और आराम करें।

  दूसरी महिलाओं की मदद करें, भले ही आप उन्हें पसंद ना करती हों। आपको नहीं पता वे कितना संघर्ष कर रही हैं।

  जरूरतमंद को सशक्त बनाएं, जैसे-आपकी काम वाली। उसे स्वच्छ्ता, शिक्षा और वित्त संबंधी मूलभूत बातें सिखाइए ।

  एक सपोर्ट सिस्टम तैयार करें, इसके लिए आप अपने सास-ससुर का सहयोग ले सकती हैं। जरूरी नहीं हर परिवार में सास बहू जैसे ड्रामे होते हों।

  आपके पति से अलग कुछ दोस्त या सहेली होना गलत नहीं है, कुछ समय परिवार से अलग आप अपने ग्रुप में बिताएं।

  हमेशा दुखी होना या रोना सही नहीं है, सभी महिलाओं को हर समय भावनात्मक होना जरूरी नहीं है।

  सावधान रहें, कठिन स्थितियों को संभालने के लिए हमेशा तैयार रहें। यदि आप असफल हो जाएँ तो, निराश ना हो, निराशा से ऊबर कर समस्या को पहचानने की कोशिश करें। खुद को ‘मुसीबत की मारी’ ना समझें।

  बच्चों को स्वावलम्बी, जिम्मेदार और स्वास्थ्य के प्रति सचेत बनाएं। घर के प्रत्येक सदस्य को समान रूप से जवाबदेह और जिम्मेदार बनाएं।

  अपनी समस्या अपनी अलग-अलग हमउम्र सहेलियों को बताएं, उनकी राय लें, और अंत में अपना निर्णय लें और उस निर्णय के प्रति आश्वस्त रहें।

  कुछ समय अपना मनपसंद काम करने में लगाएं, चाहे वह खाली बैठना ही क्यों ना हो। इसके लिए खुद को दोषी ना समझें क्योंकि दूसरों को ये बेकार लग रहा है।

  खुद पर विश्वास करें, यदि आप खुद पर विश्वास नहीं रखेंगी तो कोई अन्य आप पर नहीं करेगा।

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