रूसी विशेषज्ञों की याद में शी चिनफिंग की कहानी

2017-11-03 14:42:48
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दोस्तो, वर्ष 2015 के 8 मई को चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने रूस की यात्रा की। उन्होंने मास्को में 40 से अधिक रूसी विशेषज्ञों, जिन्होंने चीन की सहायता दी है, और उनके परिजनों के प्रतिनिधियों से भेंट की। अब तक उन विशेषज्ञों व परिजनों ने अच्छी तरह से इस बात की याद की है। उनके अनुसार शी चिनफिंग ने रूस-चीन मैत्रीपूर्ण इतिहास पर बड़ा ध्यान दिया।

नयी चीन की स्थापना के शुरू में चीनी जनता की आवश्यक मांग पर सोवियत संघ के लगभग 30 हजार विशेषज्ञों ने क्रमशः चीन के निर्माण में सहायता दी। निर्माण के क्षेत्रों में उद्योग, कृषि, ऊर्जा, यातायात, शिक्षा, विज्ञान व तकनीक आदि शामिल हुए हैं। उन्होंने चीनी जनता के साथ गहन मित्रता बनायी है। शी चिनफिंग ने उन विशेषज्ञों व परिजनों के प्रतिनिधियों से भेंट करते समय खास तौर पर वूहान यांग्जी नदी पुल के जनरल डिजाइनर कोनस्टेनटिन सिलिन आदि विशेषज्ञों की प्रभावित कहानी की चर्चा की। शी चिनफिंग ने उनकी महान भावना और उन्नत व्यावसायिक क्षमता की प्रशंसा की। सिलिन की बड़ी बेटी इलेना सिलिना ने जोश भरी हुई दो साल पहले की इस बात की याद की। अब उनकी उम्र 70 वर्ष से अधिक हो चुकी है। हाथों में एक पदक और एक मोबाइल फ़ोन लेकर उन्होंने कहा कि,वर्ष 2015 में शी चिनफिंग ने मास्को में चीन की सहायता देने वाले विशेषज्ञों व परिजनों के प्रतिनिधियों से भेंट की, और हमें यह पदक दिया। जिस पर चीन-रूस मैत्री लिखा हुआ है। पदक पर और एक पुल भी है, मेरे पिता जी इस पुल के निर्माण में शामिल हुए हैं। यह मोबाइल फ़ोन शी चिनफिंग द्वारा मुझे दिया गया एक निजी उपहार है। हालांकि शी चिनफिंग की यात्रा बहुत व्यस्त थी, लेकिन उन्होंने एक घंटे तक हमारे साथ बातचीत की और फ़ोटो भी खिंची। यह मेरे लिये एक असाधारण अनुभव है।

इलेना के अनुसार उनके पिता जी ने उसी समय चीन के निर्माण में पूरी कोशिश की है। श्री सिलिन ने वर्ष 1948 से वर्ष 1957 तक तीन बार चीन की यात्रा की, और वूहान के यांग्जी नदी पुल के निर्माण में अपना योगदान दिया। वर्ष 1983 के बाद उन्होंने भी कई बार चीन की यात्रा की। इस के दौरान उन्होंने तीन बार वूहान का दौरा किया, वे हमेशा यांग्जी नदी पुल पर खास ध्यान देते थे। यांग्जी नदी पर पहले पुल के रूप में इस वर्ष के अक्तूबर में वूहान यांग्जी नदी पुल की स्थापना की 60वीं वर्षगांठ मनायी गयी। अब पुल के स्मारक पर सिलिन समेत सोवियत संघ के पुल निर्माण के 28 विशेषज्ञों के नाम लिखे हुए हैं। राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने चीन के निर्माण व विकास में योगदान देने वाले विशेषज्ञों को धन्यवाद दिया।

इलेना ने वर्ष 1951 में पिता जी के साथ पहली बार चीन की यात्रा की। फोटो गैलरी में ब्लैक एंड व्हाइट फोटो को देखती हुई इलेना ने कहा कि हालांकि बहुत समय बीत चुका है, लेकिन चीन हमेशा पुराने मित्रों की याद करता है। इस वर्ष मई में इलेना ने निमंत्रण पर पेइचिंग में आयोजित एक पट्टी एक मार्ग अंतर्राष्ट्रीय सहयोग शिखर मंच में भाग लिया। इसकी चर्चा में उन्होंने कहा,मैं फिर एक बार चीन सरकार व राष्ट्रपति शी चिनफिंग को धन्यवाद देती हूं। वे इस ऐतिहासिक स्मृति पर बड़ा ध्यान देते हैं। साथ ही हम भी ये मूल्यवान स्मृति अपने बच्चों को बताने की कोशिश कर रहे हैं।

दादा सिलिन के प्रभाव से इलेना की बेटी काटिया ने मिडिल स्कूल से चीनी भाषा सीखना शुरू किया। उन्होंने चीन में पढ़ाई की थी। वर्तमान में वे एक विश्वविद्यालय में चीन से संबंधित अध्ययन कर रही हैं।

सोवियत संघ की विमानन विशेषज्ञ इरिना स्ट्राजेवा मास्को विमानन कॉलेज से आयी हैं। वर्ष 1956 में वे चीन आकर पेइचिंग विमानन कॉलेज की एक अध्यापिका बनी। वे विमान एयरोनॉटिक्स और विमान की स्थिरता व नियंत्रण आदि शिक्षा देती थी। चीन के विमानन व अंतरिक्ष के बहुत सुयोग्य व्यक्ति उनसे शिक्षा लेते थे। स्ट्राजेवा आदि सोवियत संघ के विशेषज्ञों से उस समय के चीनी नेताओं ने भेंट की थी। स्ट्राजेवा की बहू, रूस-चीन मैत्री संघ की सदस्य लियूदमिरा यांगेल ने संवाददाता को 70 साल पहले लिखा गया एक पत्र पढ़ा।17 अप्रैल 1957 को। कल मैंने प्रधानमंत्री चो अनलाए द्वारा आयोजित सत्कार समारोह में भाग लिया। मैं कभी नहीं भूलूंगी कि राष्ट्राध्यक्ष माओ जेतुङ और प्रधानमंत्री चो अनलाए ने स्नेह के साथ मुझ से हाथ मिलाये। मेरे लिये सब से बड़ा इनाम तो राष्ट्राध्यक्ष माओ के साथ हाथ मिलाना था। वे एक महान व्यक्ति हैं।

स्ट्राजेवा ने चो अनलाए के हाथों में से चीन-सोवियत संघ मित्र पदक लिया। 60 वर्षों के बाद यानी वर्ष 2015 में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने स्ट्राजेवा की बहू व पोती से भेंट की, और उन्हें स्मृति पदक भी दिये। पोती अन्ना यांगेल की याद में उसी समय राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने चीन की सहायता देने वाले विशेषज्ञों की भावी पीढ़ी को अपने बचपन और अपने पिता व सोवियत संघ के विशेषज्ञों द्वारा दिये गये योगदान को बताया। उन्होंने कहा,हम साधारण बातचीत करते थे, जैसे पुराने दोस्तों के बीच एक मिलन समारोह है। हालांकि हम जानते हैं कि वे एक देश के नेता हैं।

अन्ना की दादी चीन व चीनी संस्कृति को बहुत पसंद करती हैं। उन के प्रभाव से अन्ना ने भी चीनी भाषा सीखी। अब तक वे अच्छी तरह से इस बात की याद करती हैं कि दादी ने घर में चीनी दोस्तों का हार्दिक स्वागत किया। संयोग की बात है कि स्ट्राजेवा की चीन की यात्रा के 50 वर्षों के बाद उन की पोती अन्ना ने भी वर्ष 2006 में चीन में आकर चीन स्थित रूसी दूतावास में काम शुरू किया। रूस-चीन गैर-सरकारी मित्रता की चर्चा में अन्ना ने कहा कि वर्ष 2013 में मैं पेइचिंग से मास्को वापस लौटी। उसी साल राष्ट्रपति शी चिनफिंग दंपति ने पहली बार रूस की यात्रा की थी। दो साल के बाद यानी वर्ष 2015 के मई में राष्ट्रपति शी ने फिर एक बार रूस की यात्रा की, और मुझसे भेंट की। उसी समय मैं रूसी विदेश मंत्रालय में काम करती थी, और शी चिनफिंग की पत्नी फंग लीय्वान के लिये काम करती थी। शी चिनफिंग ने विशेषज्ञों की भावी पीढ़ी से कहा कि चीन व रूस के बीच गैर-सरकारी मित्रता को आगे बढ़ना चाहिये।

आज चीन-रूस संबंध इतिहास में सबसे अच्छे दौर में हैं। चीन की सहायता देने वाले रूसी विशेषज्ञों के परिजनों के ख्याल से रूस व चीन के बीच गैर-सरकारी आदान-प्रदान दिन-ब-दिन घनिष्ठ हो रहे हैं। दोनों देशों की जनता के बीच मित्रता दोनों देशों की कूटनीति का आधार बन गया। और दोनों देशों के नेता संबंधों का विकास करने के रास्ते पर नेतृत्व करते हैं। इलेना सिलिना ने कहा कि,लोग उन व्यक्तियों को नहीं भूलेंगे, जिन्होंने भावी पीढ़ी के लिये आधारशिला रखी।

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