पिछले 40 वर्षों में पूरी दुनिया में मोटे बच्चों और किशोरों की संख्या 10 गुना बढ़ी :WHO

2017-10-12 16:06:23
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पिछले 40 वर्षों में पूरी दुनिया में मोटे बच्चों और किशोरों की संख्या 10 गुना बढ़ी :WHO

दोस्तो, पिछले 40 सालों में पूरी दुनिया में 5 से 19 वर्ष तक के मोटे बच्चों और किशोरों की कुल संख्या 10 गुना बढ़ी है। अगर मौजूदा स्थिति आगे जारी रहती है, तो वर्ष 2022 तक बच्चों और किशोरों-युवकों में से मोटे बच्चों की कुल संख्या मध्यम और गंभीर अल्पभार वालों की संख्या से और ज्यादा हो जाएगी। स्थानीय समय के अनुसार 11 अक्तूबर को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और इंपीरियल कॉलेज लंदन ने जिनेवा में यह अनुसंधान परिणाम संयुक्त रूप से जारी किया।

यह ताज़ा अनुसंधान परिणाम 11 अक्तूबर को विश्व मोटा दिवस के मौके पर विश्व प्रसिद्ध चिकित्सा विज्ञान पत्रिका टी लैंसेट पर जारी हुआ। इस अनुसंधान ने लगभग 13 करोड़ पाँच वर्षों से बड़े व्यक्तियों के वज़न व लंबाई का विश्लेषण किया। जिसमें भाग लेने वालों की संख्या महामारी विज्ञान अध्ययन में सबसे बड़ी है। इस अध्ययन में भाग लेने वाले शोधकर्ताओं की संख्या एक हजार से अधिक है। उन्होंने वर्ष 1975 से वर्ष 2016 तक विश्व के दायरे में बॉडी मास इंडेक्स यानी बीएमआई और मोटापा बीमारी की स्थिति का विश्लेषण किया।

अनुसंधान के अनुसार वर्ष 1975 में विश्व बालों व युवाओं में मोटापा दर 1 प्रतिशत से कम थी, यानी 50 लाख बच्चियां व 60 लाख बच्चे हैं। लेकिन वर्ष 2016 तक बच्चियों में मोटापा दर लगभग 6 प्रतिशत तक बढ़ गयी, यानी 5 करोड़ तक जा पहुंची। और बच्चों में मोटापा दर 8 प्रतिशत तक बढ़ गयी, यानी 7.4 करोड़ तक जा पहुंची। व्यापक दृष्टि से देखा जाएं, तो विश्व में 5 से 19 वर्ष तक के मोटे व्यक्तियों की कुल संख्या 10 गुना बढ़ी है। यह संख्या वर्ष 1975 के 1.1 करोड़ से वर्ष 2016 के 12.4 करोड़ तक बढ़ी। उनके अलावा वर्ष 2016 में और 21.3 करोड़ लोगों का वजन सामान्य स्तर से अधिक है, हालांकि वे मोटापा बीमारी से ग्रस्त नहीं हैं।

इस अध्ययन के मुख्य शोधकर्ता, इंपीरियल कॉलेज लंदन के प्रोफेसर माजिद एज्जाटी ने बताया कि बीते 40 वर्षों में कम व मध्य आय वाले देशों में बच्चों व युवाओं का मोटापा दर तेजी से बढ़ गया है। हालांकि उच्च आय वाले देशों में मोटापा का स्तर लगातार ऊँचा है, लेकिन इसकी वृद्धि स्थिर है।

इस अनुसंधान में भाग लेने वाली डॉक्टर फ़िओना बुल ने कहा कि मोटापा बच्चों व युवाओं के विकास में बहुत नकारात्मक भूमिका अदा करेगी। सुश्री फ़िओना विश्व स्वास्थ्य संगठन के गैर-संचारी रोग की निगरानी व रोकथाम कार्यक्रम की समन्वयक हैं। उन्होंने कहा कि,नकारात्मक भूमिका कई पक्षों में दिखती हैं। पहला, मोटापे से हृदय रोग, मधुमेह, कैंसर और मांसपेशी की समस्याएं पैदा होती है। खास तौर पर बच्चों के प्रति सामाजिक व मनोवैज्ञानिक समस्याएं भी पैदा होती है। मोटे बच्चे बड़े होकर शायद लगातार मोटे बने रहेंगे। इसलिये हमें अगली पीढ़ी के लिये कुछ काम करना होगा, पर चुनौती बहुत बड़ी है।

मोटापे से पैदा सिलसिलेवार मामलों के प्रति शोधकर्ताओं ने सुझाव पेश किये। डॉक्टर फ़िओना ने कहा,पहला, यह बहुत महत्वपूर्ण है कि स्वस्थ भोजन से जुड़े उपभोग को मजबूत करने की नीति बनाना। दूसरा, स्कूल, परिवार व स्थानीय बस्ती में बच्चों व युवाओं के खेलकूद को मजबूत करना। तीसरा, गर्भवती से पूर्व व गर्भवती के दौरान स्वास्थ्य पर ध्यान देना। चौथा, नवजातों को पहले छै महीनों यहां तक कि दो सालों तक स्तन-पान को प्रोत्साहित करना। क्योंकि स्तन-पान मोटापे को दूर रखता है। पांचवां, जब बच्चे बड़े हो गये, तो स्कूल अस्वस्थ भोजन की रोकथाम करने और स्वस्थ भोजन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती हैं। छठा, मोटापे से ग्रस्त बच्चों को वज़न का प्रबंध करना।

शोधकर्ता ने विभिन्न देशों को ज्यादा स्वस्थ व पौष्टिक भोजन पेश करने का प्रोत्साहन दिया। साथ ही नीति-नियम या कर वसूल आदि तरीकों से बच्चों को अस्वस्थ भोजन के कुप्रभाव से मुक्त होने की कोशिश की जाएगी। उनके अलावा सक्रिय रूप से खेलकूद करने की ज़रूरत भी है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कार्रवाई गाइड भी पेश करके चिकित्सकों से सक्रिय रूप से मोटे बच्चों को ढूंढ़कर प्रबंध करने की अपील की। डॉक्टर फ़िओना ने कहा कि मोटापा मामले के समाधान के लिये व्यापक कदम उठाना पड़ेगा। उन्होंने कहा,विभिन्न पक्षों को एकसाथ मिलकर एक व्यापक गाइड बनना चाहिये। और इस कार्रवाई गाइड के अनुसार सभी देशों को उच्च स्तरीय अधिक वज़न के मामले का समाधान करना चाहिये। ये आंकड़े इस अनुसंधान रिपोर्ट में जारी होंगे।

शोधकर्ता ने कहा कि अगर वर्तमान की स्थिति ऐसी बनी रही, तो वर्ष 2022 तक विश्व के बच्चों व युवाओं में मोटे वालों की संख्या मध्यम और गंभीर अल्पभार वालों की संख्या से और ज्यादा होगी।


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