मीओ गांव में किताब पढ़ने की आवाज़ निकली

2017-10-03 19:39:55
Comment
शेयर
शेयर Close
Messenger Messenger Pinterest LinkedIn
1/7

शीबातुङ गांव में सुबह का माहौल बहुत शांत है, पर किताब पढ़ने की आवाज़ बारी बारी से गांव में गूंज रही है। कई नये मकानों से गुजरकर हमारे संवाददाता एक छोटे से स्कूल के सामने आये। वह है शीबातुङ प्राइमरी स्कूल है। किताब पढ़ने की आवाज़ यहां से आ रही है।

अध्यापक वू चुंगबी चीन के हूनान प्रांत के श्यांगशी क्षेत्र की ह्वाय्वेन काऊंटी के शीबातुङ गांव की प्राइमरी स्कूल के एकमात्र अध्यापक हैं। उन के अनुसार,हमारे यहां दो कक्षाएं हैं। पहले और दूसरे साल की कक्षाएं हैं। पहले साल की कक्षा में पाँच विद्यार्थी हैं और दूसरे साल की कक्षा में नौ विद्यार्थी हैं। बाकी 14 विद्यार्थी भी उनके साथ पढ़ते हैं, जो आसपास के गांवों में रहने वाले बच्चे हैं।

हालांकि शीबातुङ प्राइमरी स्कूल का स्तर बहुत छोटा है, लेकिन इस में शिक्षा से जुड़े उपकरण कम नहीं हैं। साफ़ सुथरे क्लासरूम, नयी मेज़ और कुर्सियां, मल्टीमीडिया नेटवर्क शिक्षा उपकरण और रंगबिरंगी बाल पुस्तकें देखकर लोग बहुत मुश्किल से इस स्कूल को गरीबी से जोड़ पाते हैं।

कक्षा की समाप्त होने वाली घंटी बजाने के बाद बच्चों की हंसने और खुश होने की आवाज़ स्कूल में गूंज रही है। मेहमानों को देखकर बच्चे शर्माते नहीं हैं। वे संवाददाता के सामने आकर सवाल पूछते हैं, और इन्टरव्यू लेने के उपकरण को देखते हैं। कुछ विद्यार्थी माइक्रोफ़ोन लेकर गीत गाते हैं, और कुछ विद्यार्थी संवाददाता की तरह इन्टरव्यू मशीन लेकर अन्य विद्यार्थियों से साक्षात्कार करते हैं।

पाँच वर्षीय बच्चा लुङ सोंगशन अपने जीवन से बहुत संतुष्ट है। जब उसे पता लगा कि संवाददाता के घर में केवल एक टीवी है, तो गर्व उन के मुंह पर दिखता है।

लुङ:अरे, तुम्हारे घर में कितने टीवी हैं?

संवाददाता:मेरे घर में केवल एक है।

लुङ:केवल एक?मेरे घर में दो हैं। मैं हर दिन टीवी देख सकता हूं। और मेरे पास दो साइकिलें भी हैं।

लेकिन किसी ने यह नहीं सोचा था कि वर्ष 2013 में जब शी चिनफिंग ने इस गांव का दौरा किया, उस समय इस गांव में प्रति व्यक्ति वार्षिक आय केवल एक हजार छै सौ य्वान से कम थी। उस समय स्कूल बनाना तो बहुत दूर की बात थी। गांव में रहने वालों की खाने और कपड़ों की समस्या का तो हल नहीं हो सका। गांव के कई सौ लोग कठोर जीवन बिता रहे थे। इस गांव में स्थित गरीबी उन्मूलन कार्य दल के अध्यक्ष वू शीवन वर्ष 2014 में शीबातुङ गांव में आए हैं। उसी समय गांव की स्थिति की याद करते हुए उन्होंने कहा,शीबातुङ गांव पहुंचते ही मुझे बड़ा फ़र्क महसूस हुआ था। क्योंकि यह गांव पहले गये गांव की अपेक्षा बहुत गरीब था। यहां का पर्यावरण बहुत खराब था। क्योंकि ये शहर से बहुत दूर है, इसलिये गांव में रहने वाले लोगों का विचार बहुत पुराना था, खुले विचार नहीं थे। यहां का विकास खाद्य उद्योग पर निर्भर था। इसलिये बुनियादी सुविधाएं बहुत कमज़ोर थी।

राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने वर्ष 2015 गरीबी उन्मूलन और विकास के उच्च स्तरीय मंच में कहा था कि गरीब क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों को अच्छी शिक्षा देना गरीबी उन्मूलन और विकास का महत्वपूर्ण कर्तव्य है। वह गरीबी को दूर करने का महत्वपूर्ण तरीका भी है। इससे ज़ाहिर हुआ है कि शिक्षा देना गरीबी उन्मूलन की रणनीति में एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। वह गरीबी को दूर करने और समृद्धि प्राप्त करने की सुनिश्चितता भी है। वर्ष 2013 से विभिन्न स्तरीय सरकार ने गरीब क्षेत्रों में शिक्षा पर बड़ा ध्यान दिया। बुनियादी सुविधाओं के निर्माण, स्कूलों के सुधार और नई कक्षाओं के निर्माण के अलावा उन्होंने हर स्कूल के लिये उच्च स्तरीय मल्टीमीडिया नेटवर्क शिक्षा उपकरण भी दिये। साथ ही दूर दराज के गांवों में काम करने वाले अध्यापकों का वेतन भी बढ़ाया गया। ह्वाय्वेन काऊंटी की चीनी कम्युनिस्ट पार्टी कमेटी के उप सचिव फंग श्वेएखांग ने परिचय देते हुए कहा कि,मेरे ख्याल में शिक्षा द्वारा गरीबी दूर करना, सारे गरीबी उन्मूलन कार्य में, खास तौर पर पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वालों के प्रति अमीर बनने का बुनियादी कदम ही है। वास्तव में हमने एक व्यापक गारंटी व्यवस्था की स्थापना की है। जिससे गरीब विद्यार्थियों को एक सुव्यवस्थित गारंटी व्यवस्था मिलेगी। हमने चार तरीकों से पूंजी-निवेश नीतियों को लागू किया। यानी मुफ्त ट्यूशन फीस, रहने वाले खर्च की सहायता, गरीब विद्यार्थियों की मदद, और पढ़ाई करने का ऋण। उन के अलावा हमने शिक्षा से गरीबी उन्मूलन का फार्मूला भी बदल दिया। हमने शनचेन तकनीशियन कॉलेज, क्वांगचो विद्युत तकनीक कॉलेज और क्वांगचो तकनीशियन कॉलेज के साथ स्कूल-स्कूल सहयोग और स्कूल-उद्यम सहयोग की संयुक्त व्यवस्था स्थापित की। अध्यापकों की सहायता देने के लिये हमने वर्ष 2015 से दूर-दराज़ क्षेत्रों में काम करने वाले अध्यापकों को भत्ता देना शुरू किया। क्षेत्रों की स्थिति के आधार पर अध्यापकों को हर महीने क्रमशः 300, 500 या 700 य्वान का भत्ता मिल सकता है। ज्यादा कठोर क्षेत्रों में काम करने वालों को ज्यादा पैसे मिल सकते हैं।

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी और सरकार के नेतृत्व में विद्यार्थियों का बोझ कम हो गया और अध्यापकों की टीम भी स्थिर हो गयी। इस के साथ गांव वालों का विचार भी बदला, जीवन स्तर भी उन्नत हुआ। आय बढ़ने के साथ उन्होंने अपने बच्चों की शिक्षा पर ज्यादा ध्यान देना शुरू किया। अध्यापक वू चुंगबी के अनुसार वर्तमान के विद्यार्थी केवल अध्यापकों से शिक्षा लेने से संतुष्ट नहीं हैं, वे बाहर की रंगारंग दुनिया से ज्यादा ज्ञान प्राप्त करना चाहते हैं। उन्होंने कहा,अब अध्यापक द्वारा अपने मुंह से बाहर का दृश्य बताने के अलावा विद्यार्थी मल्टीमीडिया नेटवर्क शिक्षा उपकरण द्वारा बाहरी दुनिया को देख भी सकते हैं। इसलिये उनके मन में बहुत सारे सपने पैदा हुए हैं। हमारे यहां बहुत से विद्यार्थियों के मां-बाप बाहर काम करते हैं। वे हमारे कंप्यूटर द्वारा मां-बाप से वीडियो कॉल कर सकते हैं। बच्चे ठीक समय पर मां-बाप के साथ बातचीत कर सकते हैं। इसलिये वे ज्यादा खुश रहते हैं।

आज के शीबातुङ प्राइमरी स्कूल में बच्चे ज्ञान के सागर में तैर सकते हैं, और अपने भविष्य को रच रहे हैं। अपने सपने की चर्चा में बच्चों ने अलग अलग जवाब दिये,

मैं एक वैज्ञानिक बनना चाहता हूं, और रोबोट भी बना सकूंगा।

मैं एक पुलिस कर्मी बनना चाहता हूं, और चोर को पकड़ूंगा।

मैं एक डॉक्टर बनना चाहती हूं।

बच्चों के सपने बहुत सरल हैं। पर अध्यापक वू चुंगबी को, बच्चों के रक्षक के रूप में अपना सपना भी होता है। उन के अनुसार,अगर हो सकता है, तो मैं जिन्दगी भर बच्चों को शिक्षा देना चाहता हूं। मैं अपनी इच्छा से केंद्र स्कूल से यहां आया हूं। मेरे बहुत से रिश्तेदारों ने मुझ से पूछा कि क्यों शहर में काम नहीं किया?मैंने जवाब दिया कि क्योंकि मैं और मेरी पत्नी दोनों का जन्म गांव में हुआ। हम जानते हैं कि गांव में पढ़ाई बहुत मुश्किल है। अगर मैं जिन्दगी भर यहां काम कर सकूंगा, तो बुढ़ापे में मैं ये कह सकता हूं कि अपने जीवन में मैंने बहुत सार्थक काम किया है।

शेयर