तिब्बत में शिक्षा की बड़ी प्रगति हासिल हुई

2017-09-28 16:08:39
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दोस्तों, हाल के कई वर्षों में चीन की केंद्रीय सरकार और तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की स्थानीय सरकार ने तिब्बत की शिक्षा के लिये निरंतर रूप से पूंजी-निवेश किया है। स्कूलों की स्थिति में साफतौर पर सुधार हुआ है। अध्यापकों और शिक्षा की गुणवत्ता में भी बहुत बेहतरी आई है। सारे स्वायत्त प्रदेश में पूर्वस्कूल से हाई स्कूल तक 15 वर्षों की अनिवार्य शिक्षा लागू की गई है। हाल ही में हमारे संवाददाता ने शिकाज़े प्राइमरी स्कूल का दौरा किया। उन्होंने गहन रूप से यह महसूस किया कि वहां की शिक्षा से जुड़ा विचार और वातावरण बहुत अच्छा है। तिब्बती भाषा की शिक्षा पर बल देने के साथ साथ शिक्षा का व्यापक स्तर तेज़ी से बढ़ रहा है।

शिकाज़े प्राइमरी स्कूल शिकाज़े में स्थित सबसे बड़ा स्कूल है। स्कूल में कुल 40 कक्षाएं और दो हज़ार से अधिक विद्यार्थी हैं। वर्ष 2015 में 40 लाख युआन की पूंजी लगाकर बनाया गया खेल का मैदान बहुत बड़ा है, जहां पूरे स्कूल के विद्यार्थी खेल सकते हैं। शिक्षण इमारत और दफ्तर इमारत के अलावा नैतिक शिक्षा के लिये एक विशेष इमारत भी तैयार है। इस इमारत से बच्चे सबसे ज्यादा प्यार करते हैं। नैतिक शिक्षा की यह इमारत एक संग्रहालय जैसी है। इसमें पुस्तकालय, युवा सांस्कृतिक भवन, और दस्तकारी कमरे आदि शामिल हैं। बच्चे यहां नैतिक शिक्षा, कला शिक्षा और दिलचस्पी वाली कक्षाएं ले सकते हैं। इमारत में प्रदर्शनी का विषय बहुत विशाल है। उदाहरण के लिये चीनी भाषा का ज्ञान प्रदर्शनी, चीनी पुरातन इमारत प्रदर्शनी, पेइचिंग ओपेरा और नाटक प्रदर्शनी, पर्यावरण संरक्षण प्रदर्शनी, जातीय संस्कृति प्रदर्शनी, तिब्बती जाति के इतिहास, संगीत और पोशाक प्रदर्शनी, एयरोस्पेस प्रदर्शनी आदि। प्राकृतिक विज्ञान के साथ मानवीय विज्ञान, तिब्बती संस्कृति और चीनी राष्ट्र की परंपरागत संस्कृति भी शामिल हुई है।

स्कूल में तिब्बती विद्यार्थियों की संख्या ज्यादा है। स्कूल की 40 कक्षाओं में केवल छै कक्षाएं चीनी भाषा वाली हैं। शिकाजे प्राइमरी स्कूल के कुलपति ताशी सोरांग ने कहा कि तिब्बती भाषा वाली कक्षाओं और चीनी भाषा वाली कक्षाओं के बीच एकमात्र फ़र्क तो यह है कि कक्षा में तिब्बती भाषा की शिक्षा दी जाती है या नहीं। तिब्बती जाति के विद्यार्थियों को तिब्बती भाषा की शिक्षा लेना ज़रूरी है। उन्होंने कहा,वर्तमान में केंद्र सरकार से स्थानीय सरकार तक सभी जातीय संस्कृति और परंपरागत संस्कृति के विकास पर बड़ा ध्यान देती हैं। इसलिये हम तिब्बती भाषा, परंपराओं और गैर भौतिक सांस्कृतिक विरासतों का विकास करना चाहते हैं।

केवल तिब्बती जाति के विद्यार्थियों के लिये ही नहीं, स्कूल ने उन अन्य जातीय विद्यार्थियों को भी तिब्बती भाषा सिखने और जानने का मौका दिया जाता है, जिन्हें तिब्बती भाषा सीखने का बड़ा शौक है। ताशी सोरांग ने कहा,वे हमारे तिब्बती बड़े परिवार में शामिल हुए हैं। वे भी रोज़मर्रा से जुड़ी तिब्बती भाषा सीखना चाहते हैं। हमने अभी मौखिक तिब्बती भाषा की कक्षा खोली है। इस कक्षा में हान जाति के विद्यार्थी जीवन या आपसी मेलजोल से जुड़ी तिब्बती भाषा सीख सकते हैं। हम इस बात पर विचार कर रहे हैं कि जब वे अच्छी तरह से तिब्बती भाषा बोल सकेंगे, तो क्या तिब्बती जाति और हान जाति के विद्यार्थियों को एक साथ शिक्षा दी जा सकेगी?तिब्बत के अधिकतर क्षेत्रों में अल्पसंख्यक जाति रहती हैं। इसलिये आदान-प्रदान और मिलन जातीय एकता को मज़बूत करने का सबसे अच्छा तरीका है।

पाँचवें ग्रेड में पढ़ने वाली छात्रा चू यूबिंग का जन्म चीन के होनान प्रांत में हुआ है। तीन वर्ष की आयु में वे मां-बाप के साथ तिब्बत में आईं। वर्तमान में वे चीनी भाषा वाली कक्षा में पढ़ रही हैं। उनके अनुसार उन्हें तिब्बती भाषा सीखने का बड़ा शौक है। पर उनके लिये तिब्बती भाषा का उच्चारण बहुत मुश्किल है। वो तिब्बत से बहुत प्यार करती हैं। आशा है कि बड़ी होकर वे तिब्बत में काम करेंगी और जीवन बिताएंगी। उन्होंने कहा,मैंने ल्हासा, च्यांगज़ी और शिकाज़े का दौरा किया था। मुझे पोताला महल बहुत पसंद है। खास तौर पर रात को वह प्रकाश में बहुत शानदार दिखता है, जो अति सुन्दर है। शिकाजे भी मुझे बहुत पसंद है। बड़ी होकर मैं सबसे पहले भीतरी चीन में जाकर एक नृत्य अध्यापिका बनना चाहती हूं। काफ़ी अनुभव प्राप्त करके मैं तिब्बत में वापस लौटकर यहां नृत्य सिखाऊंगी।

चू यूबिंग ने कहा कि उन्होंने नृत्य संघ द्वारा स्कूल में बहुत तिब्बती मित्र बनाये। स्कूल में नैतिक शिक्षा के अध्यक्ष कोसांग पिनछो ने परिचय देते हुए कहा कि विभिन्न जाति के विद्यार्थी स्कूल में सामंजस्यपूर्ण रूप से रह सकते हैं। उनके अनुसार,तिब्बती जाति के विद्यार्थी और हान जाति के विद्यार्थी अच्छी तरह से मिलजुल कर रह सकते हैं। अब उनके बीच बातचीत करने में कोई बाधा नहीं है। वे चीनी भाषा में अच्छी तरह से बातचीत कर सकते हैं, और मेल मिलाप से जीवन बिता सकते हैं।

बच्चों की चीनी भाषा बहुत अच्छी है। छै ग्रेड में पढ़ने वाली छात्रा त्सरा छो के अनुसार वे बचपन से ही चीनी और तिब्बती दोनों भाषा वाले किंडर-गार्टन में पढ़ती थी। अब प्राइमरी स्कूल में उनकी सबसे पसंदीदा कक्षा तो चीनी भाषा है। उन्होंने कहा,हम स्कूल की कक्षा में कभी कभी तिब्बती भाषा बोलते हैं, या कभी कभी चीनी भाषा बोलते हैं। दोनों भाषाएं चलती हैं। लेकिन मुझे लगता है कि चीनी भाषा ज्यादा सुविधाजनक है। क्योंकि इसका प्रयोग व्यापक है। मुझे चीनी भाषा की कक्षा पसंद है। क्योंकि चीनी भाषा के अध्यापक हमें बोलने का ज्यादा अभ्यास कराते हैं। मैं एक होस्ट बनना चाहती हूं। इसलिये मुझे चीनी भाषा की कक्षा बहुत पसंद है।

स्कूल की नैतिक शिक्षा के अध्यक्ष के अलावा कोसांग पिनछो पांचवें ग्रेड के अध्यापक भी हैं। वे भीतरी चीन के तिब्बती कक्षा में पढ़ते थे। वर्ष 2003 में वे चीलिन थोंगह्वा नॉर्मल कॉलेज से स्नातक होने के बाद शिकाज़े प्राइमरी स्कूल में एक अध्यापक बने। उनके अनुसार हालांकि तिब्बती छात्रों को चीनी भाषा सीखने में कुछ मुश्किलें आएँगी। लेकिन उनकी अपेक्षा वर्तमान के बच्चे ज्यादा आरामदेह हो गये हैं। उन्होंने कहा,हमारी अपेक्षा आज के बच्चे बहुत सक्षम हैं। उसी समय जब मैं प्राइमरी स्कूल से स्नातक होने के बाद चिनान में स्थित तिब्बती मीडिल स्कूल में पढ़ता था। तो मैं केवल चीनी भाषा सुनकर समझ सकता था, लेकिन बोलने की क्षमता नहीं है। पर आजकल के बच्चे बहुत बुद्धिमान हैं, वे जल्द ही बोल सकते हैं।

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