पाईशान प्राइमरी स्कूल में राष्ट्रीय संस्कृति का विकास

2017-09-21 08:53:08
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पाईशान प्राइमरी स्कूल में राष्ट्रीय संस्कृति का विकास

यू हाएफिंग चीन के क्वांगशी ज्वांग स्वायत्त प्रदेश के होचो शहर के चाओफिंग काऊंटी के ह्वांगयाओ कस्बे के पाईशान प्राइमरी स्कूल में चीनी भाषा सिखाने वाली एक अध्यापिका हैं। वे अपनी कक्षा की मुख्य अध्यापिका भी हैं। गौरतलब है कि चाओफिंग काऊंटी एक राष्ट्रीय गरीब काऊंटी है, जो क्वेईलिंग शहर से दो सौ से अधिक किलोमीटर दूर है। पाईशान गांव की प्राइमरी स्कूल में कुल छह ग्रेड और नौ अध्यापक हैं। हर अध्यापक को कम से कम दो कोर्स सिखाने पड़ते हैं। अध्यापिका यू दूसरे ग्रेड के विद्यार्थियों को सिखाती हैं। विद्यार्थियों की कुल संख्या 34 है। उनमें अधिकतर बच्चे ज्वांग जाति के हैं।

गांव में रहने वाले विद्यार्थियों के प्रति यह असंभव है कि वे शहर में आयोजित जातीय सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग ले पाएं। इसलिये अध्यापिका यू ने कहा कि उनके पास एक इच्छा है कि वे बच्चों को लेकर शहर का दौरा करवाएंगी। ताकि बच्चे रंगारंग सांस्कृतिक को महसूस कर सकें। लेकिन पाईशान प्राइमरी स्कूल के अधिकतर बच्चों के मां-बाप बाहर काम करते हैं। इसलिये उन्हें लेकर गांव से बाहर जाना बहुत मुश्किल है। पाईशान प्राइमरी स्कूल की मदद देने और बच्चों को ज्यादा जातीय संस्कृति को सिखाने के लिये क्वांगशी जातीय संग्रहालय के स्वयंसेवक अकसर पाईशान गांव में जाकर जातीय संस्कृति की कक्षा देते हैं, और जातीय संस्कृति का विकास करते हैं। उनके अलावा वे पाईशान प्राइमरी स्कूल के बच्चों को नोटबुक व स्कूल बैग समेत पढ़ाई की चीज़ें व खेल के उपकरण देते हैं।

2 जुलाई को संग्रहालय के स्वयंसेवकों ने भारी बारिश में पाईशान प्राइमरी स्कूल जाकर विद्यार्थियों को लोक कथा बतायी, और उन्हें ज्वांग जाति की सुन्दर रंगीन पट्टी बनाना सिखाया। एक स्वयंसेवक के रूप में क्वांगशी जातीय संग्रहालय के समाज व शिक्षा विभाग की कर्मचारी मा यून ने  कहा कि दूसरे साल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की क्षमता पर ध्यान देकर हमने यह कक्षा दी। बच्चे रंगीन पट्टी पर शामिल सुन्दर चित्रों, तत्वों व रंगों को देखकर अपनी कल्पना द्वारा मन में अपनी अपनी रंगीन पट्टी भी बना सकते हैं। कक्षा का परिणाम बहुत अच्छा है। सभी बच्चों को यह कक्षा पसंद है। भविष्य में हम प्रदर्शनी का आयोजन और चित्र एल्बम का प्रकाशन करेंगे। यह बच्चों की शिक्षा के लिये हमारी योजना का एक छोटा भाग है।

स्वयंसेवकों ने बच्चों को पीठ पर शिशु लेने का तरीका दिखाया। तो बच्चे यह जानते हैं कि जब वे बहुत छोटे थे, तो मां-बाप कैसे रंगीन पट्टी द्वारा पीठ पर उन्हें ले जाते थे। गांव में रहने वाले बच्चे बहुत शर्मीले हैं। हालांकि वे बहुत दिलचस्प हैं, लेकिन इसे करने की हिम्मत नहीं है। अध्यापिका यू ने कहा,गांव के प्राइमरी स्कूल में केवल चीनी, गणित, खेल, कला व संगीत की कक्षा होती है। कला की कक्षा में कुछ सरल चित्र बनाने सिखाया जाते हैं। और संगीत कक्षा में बाल गीत सिखाए जाते हैं। इसलिये मैं इस गतिविधि को बड़ा समर्थन देती हूं। ऐसी गतिविधि ने न सिर्फ़ बच्चों को ज्यादा जानकारियां   दीं, बल्कि उनके जीवन में ज्यादा रंग भी डाल दिए हैं। अब बच्चों को उन गतिविधियों में शामिल करने का मौका मिला। उन्हें बहुत अच्छा लगा। सभी विद्यार्थी स्वयंसेवकों से ज्यादा ज्ञान सीखना चाहते हैं।

मा यून के अनुसार संग्रहालय हर साल पाईशान प्राइमरी स्कूल में किशोरों के लिये जातीय संस्कृति व शिक्षा से जुड़ी गतिविधियों का आयोजन करता है। आशा है कि बच्चे जातीय संस्कृति व परंपरा जान सकेंगे, और अपनी जाति की संस्कृति का विकास कर सकेंगे। उन्होंने कहा,संग्रहालय में आयोजित कुछ अस्थायी प्रदर्शनी नाननिंग के स्थानीय बच्चे आसानी से देख सकते हैं। लेकिन दूर-दराज के गांवों में रहने वाले बच्चों को ऐसा मौके नहीं मिलते। इसलिये इस वर्ष की शुरूआत में हमने प्रदर्शनी को पाईशान गांव में स्थानांतरित किया।

अध्यापिका यू के अनुसार उनकी कक्षा में एक बच्चा विकलांग है, जो कान की मशीन लगाकर अन्य लोगों से आदान-प्रदान कर सकता है। हर बार वे संग्रहालय के स्वयंसेवकों द्वारा दी गयी कला कक्षा की बड़ी प्रतीक्षा में रहते हैं। अध्यापिका यू ने कहा कि,हमारे अध्यापक व्यवसायिक कला अध्यापक नहीं हैं। इसलिये हर बार जब संग्रहालय के स्वयंसेवक सुन्दर चित्र लेकर आते हैं, तो बच्चे बहुत पसंद करते हैं। इस मौके पर बनाये गये चित्र उनके लिये बहुत मूल्यवान चीज़ होती हैं। अगर वर्षा होती, तो वे चित्र को भीगने से बचाने के लिए हमेशा  गोद में छिपाकर घर जाते हैं।

जब बच्चों को संग्रहालय द्वारा दिये गये पेंसिल बैग, ब्रश व स्कूल बैग मिलते हैं तो उनके चेहरे पर खुशी दिखती है। जातीय संस्कृति कक्षा नाम की गतिविधि ने न सिर्फ़ जातीय संस्कृति के प्रति बच्चों का ज्ञान बढ़ाया है, बल्कि हर बच्चे की पढ़ाई व जीवन में लाभ दिया है।

पाईशान प्राइमरी स्कूल संग्रहालय द्वारा दी गयी जातीय संस्कृति कक्षा पर बड़ा ध्यान देता है। उप कुलपति ह्वांग शिनशाओ ने कहा कि विद्यार्थी न सिर्फ अपनी जाति की संस्कृति जानते हैं, बल्कि सभ्य शिष्टाचार में भी बड़ी प्रगति हासिल हुई। यह कहा जा सकता है कि विद्यार्थियों की व्यापक क्षमता बढ़ चुकी है। उप कुलपति ह्वांग ने कहा,ऐसी गतिविधियों का आयोजन हमारे गांव में स्थित स्कूलों के प्रति बहुत लाभदायक है। पहले, हमारे बहुत ऐसे विद्यार्थी थे, जिनके मां-बाप बाहर   काम करते हैं। हर बार स्वयंसेवक उनके लिए पढ़ाई की वस्तुएं लेकर आते, तो वे बहुत धन्यवाद देते । दूसरे, स्वयंसेवक कक्षा में प्रवेश कर बच्चों को शिक्षा देते हैं। यह बच्चों के लिये बहुत सार्थक है। हर बार बच्चे स्वयंसेवकों द्वारा दी गयी कक्षा की बड़ी प्रतीक्षा करते हैं।

चीन सरकार की गरीबी उन्मूलन नीति के आह्वान से क्वांगशी जातीय संग्रहालय ने अपनी श्रेष्ठता से लाभ उठाकर पाईशान प्राइमरी स्कूल में जातीय संस्कृति कक्षा चलायी, जिसे बड़ी सफलता मिली। उनके अलावा संग्रहालय ने क्वांगशी के दस जातीय पारिस्थितिक संग्रहालयों के साथ सहयोग करके क्वांगशी की 12 जातियों के विषयों पर रंगारंग जातीय संस्कृति व्याख्यान आयोजित किया, और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों में 12 जातियों की संस्कृति व परंपराओं का प्रसार-प्रचार किया। विशेष दिवस या बड़ी गतिविधियों के दौरान संग्रहालय के स्वयंसेवक जातीय संस्कृति का प्रसार-प्रचार करने के लिये दूर दूर पहाड़ी क्षेत्रों या गांवों में सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन भी करते हैं।

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