चीन-ऑस्ट्रेलिया के बीच किंडर-गार्टनों का मैत्रीपूर्ण आदान-प्रदान

2017-08-24 19:37:24
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चीन-ऑस्ट्रेलिया के बीच किंडर-गार्टनों का मैत्रीपूर्ण आदान-प्रदान

चीन-ऑस्ट्रेलिया के बीच किंडर-गार्टनों का मैत्रीपूर्ण आदान-प्रदान

 

दोस्तो, हाल ही में चीनी युवा व बाल प्रेस और प्रकाशन कार्यालय द्वारा आयोजित चीन-ऑस्ट्रेलिया संस्कृति व प्रारंभिक शिक्षा का आदान-प्रदान सेमिनार सिडनी में उद्घाटित हुआ। चीनी किंडरगार्टन व ऑस्ट्रेलियाई किंडरगार्टन ने सिडनी में सहयोग सझौते पर हस्ताक्षर किये, शिक्षा देने के तरीके व विचार साझा किए।

इस बार के आदान-प्रदान में पेइचिंग शहर के वूई किंडरगार्टन व हेलुङच्यांग प्रांत के डाछिंग प्रारंभिक शिक्षा केंद्र ने ऑस्ट्रेलिया के ब्रेट किंडरगार्टन व काकोबो किंडरगार्टन के साथ सिडनी में सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किये। ब्रेट किंडरगार्टन की अध्यापिका टेलर रिचर्डसन ने बहुत ध्यान से चीनी किंडरगार्टन के प्रमुख द्वारा दिया गया परिचय सुना। उनके ख्याल से उनके पास बहुत अनुभव है। उन्होंने कहा,शिक्षा में चीनी किंडरगार्टन ने पुस्तकों की व्यापक भूमिका का प्रयोग किया। यह हमें बड़ा दिलचस्प लगता है। उदाहरण के लिये बच्चे पुस्तक में कहानी पढ़कर इसके आधार पर नाटक प्रस्तुत करते हैं। हमने ऐसा कभी नहीं सोचा था। यह बहुत दिलचस्प है।

चीन व ऑस्ट्रेलिया के बीच बाल शिक्षा में बहुत समानताएं हैं। वे न सिर्फ़ बच्चों द्वारा प्राप्त ज्ञान पर ध्यान देते हैं, बल्कि बच्चों के शरीर, चरित्र, सामाजिक स्वभाव व भावना आदि पक्षों के व्यापक विकास पर भी ध्यान देते हैं। आदान-प्रदान की गतिविधि के बाद पेइचिंग वूई किंडरगार्टन की प्रमुख क्वो शिन ने कहा कि चीन व ऑस्ट्रेलिया के किंडरगार्टनों में समानताएं हैं। साथ ही राष्ट्रीय स्थिति व संस्कृति आदि कारणों से स्पष्ट भिन्नता भी मौजूद हैं। उनके अनुसार,मेरा सबसे बड़ा अनुभव यह है कि उनका किंडरगार्टन एक परिवार जैसा है। बहुत छोटा है, बहुत स्नेहपूर्ण है। लेकिन हर अध्यापिका की व्यवसायिकता बहुत अच्छी है। वे बच्चों का बड़ा सम्मान करती हैं। सभी काम बच्चों के लिये किये जाते हैं। यह चीन की तरह है। वे वास्तविक कार्रवाई कर हर बच्चे के विकास पर ध्यान देती हैं। साथ ही मैंने उनकी सामूहिक कक्षा को नहीं देखा। ऑस्ट्रेलियाई किंडरगार्टन के प्रमुख से पूछने के बाद मैं जानती हूं कि उनके किंडरगार्टन में कोई संपूर्ण योजना नहीं है। एक दिन के कार्यक्रम भी गंभीर रूप से निश्चित नहीं किये गये। पर अध्यापिका के दिल में लक्ष्य होता है। उनकी व्यवसायिकता पर सख्त मांग की जाती है।

चीन-ऑस्ट्रेलिया के बीच किंडर-गार्टनों का मैत्रीपूर्ण आदान-प्रदान

चीन-ऑस्ट्रेलिया के बीच किंडर-गार्टनों का मैत्रीपूर्ण आदान-प्रदान

ऑस्ट्रेलिया के अधिकतर किंडरगार्टन निज़ी हैं। इसलिये किंडरगार्टन का पैमाना बड़ा नहीं है। हर किंडरगार्टन में दसेक बच्चे होते हैं। यह एक परिवार जैसा है। लेकिन चीन के किंडरगार्टन चाहे सरकारी है या निज़ी है, सभी का पैमाना बहुत बड़ा है। इसमें पढ़ने वाले बच्चों की संख्या सौ से अधिक है। इसलिये चीन व ऑस्ट्रेलिया में शिक्षा देने व प्रबंध करने का तरीका अलग-अलग है। चीनी व विदेशी किंडरगार्टनों के बीच अंतर की चर्चा में सिडनी की बाल कला कर्मचारी ट्रिश अमिची चीन के नानचिन शहर के कई किंडरगार्टन व प्राइमरी स्कूलों में काम कर चुकी हैं। उन्हें आशा है कि चीन के किंडरगार्टनों को बच्चों को ज्यादा आज़ादी देनी चाहिए। ताकि वे अपने आप से कुछ नयी चीज़ें ढूंढ़ सकें। उन्होंने कहा,चीन के किंडरगार्टन में कक्षा का इंतज़ाम ज्यादा गंभीर होता है। क्योंकि एक बार मैंने कक्षा में बारूद का विषय शामिल किया। इस पर अधिकतर लोगों को लगा कि यह असंभव है। लोग कहने लगे कैसे करेंगे?क्या करेंगे?लेकिन मेरे अनुभव से बच्चे तो बच्चे हैं, उन्हें उन्मुक्त ढंग से बड़े होना चाहिये।

उधर चीनी किंडरगार्टन के प्रमुख के ख्याल से बच्चों की 3 से 6 वर्ष की आयु में शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण है, ताकि उन्हें जीवन बिताने व शिक्षा लेने की अच्छी आदत प्राप्त हो सकें। वूई किंडरगार्टन की प्रमुख क्वो शिन ने कहा,अच्छी आदतें बच्चों के जीवन पर महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती हैं। चीन के किंडरगार्टन में अच्छी आदतों पर बड़ा ध्यान दिया जाता है। जैसे हमारे किंडरगार्टन में अच्छी आदतों को प्राप्त करने को सभी कक्षाओं का एक केंद्रीय लक्ष्य माना जाता है।

चीनी युवा व बाल प्रेस व प्रकाशन कार्यालय की जनरल संपादक च्यांग नान ने इन्टरव्यू देते समय कहा कि चीनी शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी पूर्वस्कूली बच्चों की रूपरेखा व 3 से 6 साल तक बच्चों के विकास निर्देशन के आधार पर चीनी किंडरगार्टन बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता पर ज्यादा ध्यान देते हैं। बच्चों को खुद सीखने के बारे में बताया जाता है। और पढ़ाई के दौरान बच्चे अपनी भाषा, गणित, कला, स्वास्थ्य व समाज आदि क्षेत्रों की व्यापक गुणवत्ता को बढ़ावा दे सकेंगे। वर्तमान में चीन में किंडरगार्टन की शिक्षा सुधार व विकास में एक उल्लेखनीय मामला है, यानी अध्यापिका व बच्चों का अनुपात। उनके अनुसार,क्योंकि ऑस्ट्रेलिया की जनसंख्या 2.4 करोड़ है। लेकिन चीन में केवल किंडरगार्टन में बच्चों की संख्या तो 3 करोड़ से अधिक है। इसलिये यह चीन व विदेश के बीच एक बड़ा फ़र्क है, यानी अध्यापिका व बच्चों का अनुपात। क्योंकि चीन में बच्चों की संख्या इतनी अधिक है। अध्यापिका व बच्चों के कम अनुपात से शिक्षा की गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ता है। इस पक्ष में चीन लगातार अध्ययन कर रहा है। अध्यापिका के स्तर पर हमारी संयुक्त रूपरेखा होती है, ताकि अध्यापिकाओं की क्षमता को उन्नत किया जा सके।

इस बार चीनी युवा व बाल प्रेस व प्रकाशन अखिल कार्यालय ने सिडनी के किंडरगार्टन के लिये मेरा नाम ह्वामूलैन जैसे श्रेष्ठ पुस्तकें व ई-पुस्तकें, चित्र बनाने की पीडीएफ़, शिक्षा संसाधन आदि सामग्री भेंट की। जिसे स्थानीय बच्चों का स्वागत मिला। साथ ही कार्यालय को आशा है कि ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले प्रवासी चीनी बच्चे चीनी पुस्तकों को पढ़ने और चीनी भाषा सीखने के दौरान चीन की परंपरागत संस्कृति को महसूस कर सकेंगे। उनके अलावा पेइचिंग नार्मल विश्वविद्यलय की प्रोफेसर, प्रसिद्ध बाल शिक्षा विशेषज्ञ सुश्री हो लीयेन बाल अध्यापिका की क्षमता का विकास अध्ययन नामक कार्यक्रम भी शुरू करेंगी। ताकि दोनों पक्षों के बीच बाल शिक्षा कर्मचारियों का गहन रूप से आदान-प्रदान किया जा सके।

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