अपने दूसरे जन्म स्थान वापस लौटी वांग यामेई

2017-08-18 13:50:10
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दोस्तो, 16वीं चीनी ब्रिज नामक विश्व यूनिवर्सिटी विद्यार्थियों की चीनी भाषा प्रतियोगिता 13 जुलाई को चीन के हूनान प्रांत के छांगशा शहर में औपचारिक रूप से शुरू हुई। विश्व के 112 देशों से आए 145 छात्रों ने अपनी अपनी श्रेष्ठता दिखाकर तीव्र प्रतिस्पर्द्धा की। उनमें बांग्लादेश से आई एक ऐसी छोटी लड़की हैं, जिसे चीन के बारे में तमाम जानकारी है। उन का चीनी नाम है वांग यामेई।

वांग यामेई के मां-बाप बिजनेस करते हैं। बचपन में ही वह अपने मां-बाप के साथ चीन आयी थी। हालांकि उसी समय से अभी तक बहुत साल बीत चुके हैं। लेकिन चीन में फिर वापस लौटकर उन्हें कुछ अपरिचित नहीं लगता। चीनी भाषा तो वांग यामेई की भारी श्रेष्ठता है। पर चीन में कई सालों तक रहने के अनुभव से उन्हें चीनी ब्रिज में जीत हासिल करने में खूब मदद मिली। चीन में प्रतियोगिता में भाग लेने के दौरान वांग यामेई ने हमेशा से गौरव के साथ लोगों से कहा कि चीन उन का दूसरा जन्म स्थान है। वे घर वापस लौटी। चीन में रहने वाला जीवन वांग यामेई को खूब याद आता है। उन्होंने कहा,वर्ष 2010 में मैंने पहली बार चीन की यात्रा की। उस समय मेरी मां चीन में बीमारी का इलाज करवा रही थीं। तो मैं भी उनके साथ चीन में आई। उस समय मैंने तुङक्वान में प्राइमरी स्कूल की पांचवें साल की शिक्षा ली। जब मैं अभी अभी चीन में आयी थी, तो चीनी भाषा मेरे लिये इतनी मुश्किल थी। क्योंकि आसपास के सहपाठियों को अंग्रेजी नहीं आती। तो मैं केवल हाथों के इशारे से धीरे धीरे चीनी भाषा सीखती थी। वर्ष 2013 में मां की बीमार ठीक हो गयी। तो मैं उन के साथ बांग्लादेश में वापस लौटी। बाद में मैंने बांग्लादेश में मिडिल स्कूल की चीनी ब्रिज प्रतियोगिता में भाग लिया, और छात्रवृत्ति भी हासिल की। तो मुझे चीन में सीखने का मौका फिर मिल गया। वर्ष 2014 के सितंबर में मैंने फिर एक बार चीन में आकर युन्नान नॉर्मल विश्वविद्यालय में छह महीनों तक पढ़ाई की। उस बार मैंने पहली बार व्यवस्थित रूप से चीनी भाषा सीखी। मेरी चीनी भाषा का स्तर बड़े हद तक उन्नत हो गया। अब मैंने अपने दूसरे जन्मस्थान वापस जाकर प्रतियोगिता में भाग लिया। मुझे बहुत खुशी व सौभाग्य लगता है। पिछली बार मैंने पेइचिंग का दौरा किया। इस बार मैंने फिर पेइचिंग की यात्रा की। लगता है कि पेइचिंग में बड़ा बदलाव हुआ है। पेइचिंग में मेट्रो लाइन और ज्यादा हैं, और यातायात भी ज्यादा सुविधाजनक बन गयी। पेइचिंग के बदलाव से मैंने यह देखा है कि चीन के आधुनिकीकरण का स्तर दिन-ब-दिन बढ़ रहा है। 

पेइचिंग की यात्रा के बाद वांग यामेई अन्य विदेशी विद्यार्थियों के साथ छांगशा पहुंची। वहां उन्होंने औपचारिक रूप से चीनी ब्रिज की प्रतियोगिता में भाग लिया। चीनी ब्रिज की मंच पर उन्होंने टीवी व इन्टरनेट द्वारा विश्व को बांग्लादेश के विद्यार्थियों की चीनी भाषा का स्तर दिखाया। केवल प्रवासी चीनी ही नहीं, वे भी एक शुद्ध विदेशी लोग के रूप में अच्छी तरह से चीनी बोल सकती हैं, और इस प्रतियोगिता में पहले तीन स्थानों पर रह सकती हैं। यह पहला मौका नहीं जब वांग यामेई ने चीनी ब्रिज की प्रतियोगिता में उल्लेखनीय उपलब्धि प्राप्त की। इस से पहले वर्ष 2013 में उन्होंने बांग्लादेश में चीनी ब्रिज की चैंपियन की हैसियत से चीन में आयोजित विश्व मिडिल स्कूल विद्यार्थियों की चीनी ब्रिज प्रतियोगिता के फ़ाइनल में प्रवेश किया और बेस्ट वाग्मिता पुरस्कार हासिल किया। इस बार उन्होंने फिर एक बार चीन में आकर चीनी ब्रिज की प्रतियोगिता में भाग लिया। उन के पास अलग तरह का अनुभव है। उनके अनुसार,पहली बार के मिडिल स्कूल में विद्यार्थियों की चीनी ब्रिज प्रतियोगिता और इस बार के यूनिवर्सिटी विद्यार्थियों की चीनी ब्रिज प्रतियोगिता में भाग लेने के दौरान मैंने विश्व से आए बहुत नये दोस्त बनाये। वे भी मेरी तरह चीन और चीनी भाषा को प्यार करते हैं। मैंने उनसे खूब नयी जानकारियां प्राप्त कीं। और दो बार की प्रतियोगिताओं से मुझे बहुत अविस्मरणीय अनुभव प्राप्त हुए। दो बार की प्रतियोगिताओं की विभिन्नता यह है कि मिडिल स्कूल की चीनी ब्रिज में पढ़ाई के साथ खेल पर ज्यादा महत्व दिया गया। मैंने खेलते हुए मैच को पूरा किया है। लेकिन विश्वविद्यालय विद्यार्थियों की चीनी ब्रिज में मैच ज्यादा कठोर व मुश्किल है। इसलिये मुझे मैच में जीतने के लिये पूरी कोशिश करनी पड़ती है। मैच में मेरा प्रदर्शन ठीक ठाक है। आशा है कि इस बार मैं ज्यादा अच्छी उपलब्धियां प्राप्त कर सकूंगी, और बांग्लादेश के लिये गौरव हासिल कर सकूंगी।

चीनी ब्रिज की प्रतियोगिता लगातार 16 वर्षों तक आयोजित हो रही है। उन लोगों, जो चीनी ब्रिज की मंच पर चढ़ाते थे, में कुछ लोग अभी तक चीनी सीख रहे हैं, कुछ लोग चीन से जुड़े काम कर रहे हैं। और कुछ लोग सुयोग्य व्यक्ति बनकर चीन से प्राप्त अनुभवों से अपने देश के निर्माण में अपना योगदान दे रहे हैं। हालांकि उनके रंग भिन्न-भिन्न हैं, आंखें भिन्न-भिन्न हैं। लेकिन चीनी भाषा के प्रति चीनी संस्कृति के प्रति उन का प्रेम एक ही है। और उनका समान चीनी सपना होता है। वांग यामेई का चीनी सपना अन्य लोगों से अलग है। उन के ख्याल से चीनी भाषा उन के भविष्य में एक कामकाज नहीं होगा। उनका अपना विचार व आदर्श होता है। उन्होंने कहा,बचपन से ही मेरा एक सपना है कि बड़े होकर मैं एक डॉक्टर बनना चाहती हूं। अब मैं अपने सपने से ज्यादा नजदीक हो गयी। इस वर्ष में मैंने चीन सरकार से छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया, और सफलता से शांगहाई के फूडान यूनिवर्सिटी से स्वीकृति पत्र प्राप्त किया है। इस वर्ष सितंबर में मैं फूडान यूनिवर्सिटी में प्रवेश करके चिकित्सा विज्ञान का बीए पढ़ूंगी। मैं चीन को बहुत प्यार करती हूं। चीन के चिकित्सा का स्तर विश्व में अग्रिम पंक्ति में है। इसलिये मैं चीन में पढ़ने का चुनाव लिया। मुझे आशा है कि मैं एक श्रेष्ठ डॉक्टर बन सकूंगी, और चीन में प्राप्त ज्ञान से ज्यादा लोगों को मदद दे सकूंगी।

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