अध्यापिका फान और उन के दो हजार बच्चे

2017-08-18 13:49:30
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दोस्तो, चीन के शिनच्यांग स्वायत्त प्रदेश के शूले काऊंटी में एक बुजुर्ग महिला रहती हैं। जिन का नाम फान यूल्येन है। स्थानीय लोग उन्हें अध्यापिका फान कहकर बुलाते हैं। 20 वर्षों से अध्यापिका फान स्थानीय बच्चों को लगातार मुफ्त शिक्षा देती रही हैं। उन बच्चों की जिन्दगी ज्ञान प्राप्त करने से बदल गयी।

हर रात शिनच्यांग स्वायत्त प्रदेश के शूले काऊंटी की एक छोटी गली में स्थित प्यार कक्षा में किताब पढ़ने की आवाज़ आती है। इस 20 वर्ग मीटर वाले मकान में दसेक बच्चों में कुछ लोग पाठयपुस्तक दोहरा रहे हैं, और कुछ लोग नया ज्ञान सीख रहे हैं। हर दिन वे बच्चे स्कूल से जाने के बाद यहां आते हैं। क्योंकि वे जानते हैं कि एक अध्यापिका हर दिन कक्षा के गेट पर उन का इंतजार करती हैं। यह इस अध्यापिका की 25 वर्ष की एक आदत है। शूले काऊंटी की जनथाई प्राइमरी स्कूल के पांचवें साल पढ़ने वाले छात्र मुज़ाफ़र अदेल ने कहा,वे सब से पहले ब्लैकबोर्ड पर नये शब्द लिखती हैं, फिर गणित पढ़ाती हैं। इस के बाद अध्यापिका फान हमें चीनी पुरातन कविता सिखाती हैं। वे अंग्रेजी भी पढ़ा सकती हैं। 

अदेल के मुंह में वह अध्यापिका फान तो फान यूल्येन हैं। इस वर्ष उन की उम्र 75 वर्ष हो चुकी है। कक्षा के अवकाश में बच्चे स्नेह के साथ उन्हें दादी फान बोलते हैं।

25 साल पहले फान यूल्येन बाहर से अपने जन्म स्थान शिनच्यांग के शूले काऊंटी में वापस लौटी। लेकिन स्थानीय बच्चों की शिक्षा पर उन्हें चिंता लगती है। उन के अनुसार,उस समय मैंने देखा कि रास्ते पर बच्चे इधर-उधर दौड़ते थे, और खिड़कियों में पत्थर फेंकते थे। मैं उनकी शैतानी को नहीं देख सकती। तो अंत में मैंने उनसे कहा कि मेरे घर में आओ, और हम एक साथ खेलें, ठीक है न? वे हां कहते थे। शुरू में केवल दो बच्चे थे। मैं उन्हें घर में बुलाकर उन के साथ खेलती थी। और खेलने के दौरान मैं उन्हें शब्द सिखाती थी। धीरे धीरे ज्यादा बच्चे यहां आने लगे। 

इस तरह से प्यार कक्षा की स्थापना की गयी। सब से पहले कक्षा फान यूल्येन के घर में एक छोटे कमरे में चलती थी। इस कमरे का क्षेत्रफल केवल दस वर्ग मीटर है। इस में एक छोटी मेज़ व एक छोटी ब्लैकबोर्ड रखा जाता था। हालांकि कमरा बहुत सरल था, लेकिन बच्चे यहां आना बहुत पसंद करते थे। अन्य ट्यूशन कक्षाओं की अपेक्षा फान यूल्येन की कक्षा बिल्कुल मुफ्त है। साथ ही वे बच्चों के लिये भोजन भी तैयार करती हैं, और स्टेशनरी भी देती हैं। यहां केवल एक अध्यापिका हैं। वे स्कूल के पहले साल से पांचवें साल तक के दसेक बच्चों को चीनी, गणित, अंग्रेजी की शिक्षा देती हैं। इस प्यार कक्षा का सभी खर्च फान यूल्येन खुद देती हैं। फान आर्थिक रूप से बहुत मजबूत नहीं है। इसलिये इतना खर्च करके उन का जीवन और कठोर हो गया। इस वजह से उन के परिवार जनों ने अकसर उन के सामने शिकायत की। खास तौर पर उनके बेटे फान सानहू ने । फान सानहू ने कहा कि,सब से कठोर समय में हम भोजन भी नहीं कर सकते थे। उस समय न सिर्फ़ मैं इस कक्षा का विरोध करता था, बल्कि मेरी पत्नी भी इस का विरोध करती थी। क्योंकि उसी समय हमारा बच्चा बहुत छोटा था, इसलिये हम बाहर काम नहीं कर सकते थे, और पैसा कमाने का मौका भी बहुत कम है। 

फान यूल्येन के पिता जी हान जाति के हैं, और मां वेवूर जाति की हैं। इसलिये उन्हें बचपन से ही हान व वेवूर दोनों भाषाएं आती हैं। लंबे समय तक बाहर में काम करने के अनुभव से वे गहन रूप से यह जानती हैं कि जीवन बिताने में भाषा इतना महत्वपूर्ण है।

समय के चलते ज्यादा से ज्यादा लोग प्यार कक्षा को जानते हैं, और फान यूल्येन पर ज्यादा से ज्यादा विश्वास करते हैं। बहुत मां-बाप अपने बच्चे को फान के यहां लाते हैं। रयहानगुल यासन तो उन में से एक है। जब उन का बेटा किन्डर्गार्टन में था, तो वे अपने बेटे को इस प्यार कक्षा में लाये। उन्होंने कहा,अब मेरा बेटा अच्छी तरह से बातचीत कर सकता है। थांग राजवंश की कविताएं भी सुना सकता है। अध्यापिका ने बहुत ध्यान से उसे सिखाया, तो उसे चीनी में बड़ी प्रगति प्राप्त है। वह होमवर्क भी अच्छी तरह से लिख सकता है। और घर वापस करके मेरे साथ बातचीत करना पसंद करता है। यह प्यार कक्षा बहुत अच्छी है। 

ज्यादा से ज्यादा बच्चों को स्वीकार करने के लिये फान यूल्येन ने अपने घर में सब से बड़ा कमरा निकालकर कक्षा चलाती हैं। लेकिन वे छोटे कमरे में रहती हैं।

पढ़ाई के अंक की अपेक्षा फान यूल्येन बच्चों की अच्छी चरित्र पर ज्यादा ध्यान देती हैं। उन्होंने कहा कि,मैं सब से पहले उन्हें सिखाती हूं कि अच्छा चरित्र कैसे बनती है। बचपन से ही अच्छी आदतों की स्थापना करना पड़ता है। दूसरों के प्रति शिष्टाचार होना चाहिये। अब अगर मेरे बच्चे दुकान में जाएं, तो वे द्वार पर चाचा या चाची से नमस्कार बोलते हैं। दुकान के लोग हमेशा उन की शिष्टाचार की प्रशंसा करते हैं। यह देखकर मुझे बहुत खुशी हुई। 

अब प्यार कक्षा में विद्यार्थियों की संख्या 70 तक पहुंच चुकी है। स्थानीय सरकार ने इस छोटे प्यार कक्षा का समर्थन देने के लिये विशेष तौर पर एक बड़ा रोशनीदार नया क्लास रूम पेश किया। साथ ही खेल व पुस्तक पढ़ने का रूम भी तैयार हैं। 25 वर्षों में दो हजार से अधिक वेवूर, हान, ह्वेई, उज़्बेकिस्तान जातियों के बच्चों ने इस प्यार कक्षा में अविस्मरणीय समय बिताया है।

हालांकि अध्यापिका फान 75 साल की हो चुकी हैं। लेकिन फान यूल्येन अभी तक बच्चों को कुछ करना चाहती हैं। ताकि वे एक सुन्दर व उज्जवल भविष्य प्राप्त कर सकें।

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