महिला शांति रक्षक सैन्य अधिकारियों का प्रशिक्षण पेइचिंग में समाप्त

2017-08-18 13:47:40
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दोस्तो, चीनी रक्षा मंत्रालय के शांति रक्षा मामला कार्यालय, शांति रक्षा केंद्र, और संयुक्त राष्ट्र के महिला विभाग द्वारा एक साथ आयोजित संयुक्त राष्ट्र महिला शांति रक्षक सैन्य अधिकारियों का अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण हाल ही में पेइचिंग में समाप्त हुआ है। पर महिला शांति रक्षक शांति की स्थापना की कार्यवाही में कौन सी भूमिका अदा कर सकती हैं?और उन के सामने कौन सी चुनौतियां पैदा होंगी?अब पढ़िये इस के बारे में एक रिपोर्ट। 

इस बार के संयुक्त राष्ट्र महिला शांति रक्षक सैन्य अधिकारियों का अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण दो हफ्ते चला। 26 देशों से आयी 40 महिला सैन्य अधिकारियों ने इस में भाग लिया। प्रशिक्षण का लक्ष्य था महिला व बाल के अधिकारों व हितों की रक्षा, संघर्ष में यौन हिंसा के शिकार की सहायता आदि पक्षों में महिला शांति रक्षक सैन्य अधिकारियों की क्षमता को उन्नत करना। चीनी रक्षा मंत्रालय के शांति रक्षा मामला कार्यालय के उपाध्यक्ष कर्नल नान निंग ने कहा कि,इस तरह के प्रशिक्षण का आयोजन राष्ट्रपति शी चिनफिंग द्वारा संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षा के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद प्राप्त उपलब्धि है। जो संयुक्त राष्ट्र संघ व अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की मांग से मेल खाता है। साथ ही वह शांति रक्षा के क्षेत्र में लैंगिक समानता को मजबूत करने और शांति रक्षा के प्रशिक्षण कार्य के लिये ज्यादा योगदान देने वाला एक ठोस कदम है। 

इस बार के प्रशिक्षण में संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षा कार्रवाई का सारांश, मानवतावादी कार्रवाई संस्थाओं की नीति-नियम, संघर्ष में आम लोगों की रक्षा समेत 32 कक्षाएं शामिल हुई हैं। साथ ही शांति रक्षा विशेष दल में समन्वय, समय से पहले चेतावनी व सूचनाओं का संग्रह, और सशस्त्र संघर्ष में मृतकों की सूचनाओं का प्रबंध आदि सात अभ्यास आयोजित किये गये। इस में भाग लेने वाली महिलाएं संयुक्त राष्ट्र के महिला विभाग द्वारा विभिन्न देशों की महिला सैन्य अधिकारियों में से चुनी गयीं। स्वीडन की वायु सेना से आई मेजर यल्वा ओलस्सोन तो उन में से एक हैं। उन के ख्याल से विभिन्न सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से आई महिला शांति रक्षकों के साथ प्रशिक्षण लेना भविष्य में शांति रक्षा कार्रवाई के लिये एक अच्छा आधार तैयार करेगा। उन्होंने कहा,मैं स्वीडन से आई हूं। कुछ स्थितियों में मेरा विचार व मेरा व्यवहार तो कोलंबिया और केन्या से आयी महिलाओं से अलग है। यह प्रशिक्षण भविष्य के लिये एक तैयारी है। क्योंकि शायद भविष्य में हम शांति रक्षा कार्रवाई में एक साथ काम करेंगी। 

दक्षिण अफ़्रीकी वायु सेना की मेजर कारोलीन कोमसाना के विचार में,उदाहरण के लिये हमें यौन उत्पीड़न से ग्रस्त महिलाएं मिलेंगी। ऐसी स्थिति में अगर शांति रक्षक भी महिला हैं, तो उन पीड़ितों के साथ आदान-प्रदान में ज़रूर पुरुष शांति रक्षक से ज्यादा अच्छा होगा। महिला शांति रक्षक यौन उत्पीड़न से ग्रस्त महिलाओं को ज्यादा शांत दे सकती हैं। इसलिये मेरे ख्याल से ज्यादा महिला शांति रक्षकों को शांति रक्षा कार्रवाई में शामिल करना बहुत ज़रूरी है। 

कोमसाना ने बिल्कुल ठीक कहा है कि शांति रक्षा कर्तव्य में महिला शांति रक्षक हमेशा विशेष भूमिका अदा कर सकती हैं। लेकिन संयुक्त राष्ट्र संघ के उप महासचिव लाकरोइक्स ने संवाददाता को इन्टरव्यू देते समय कहा कि वर्तमान में वास्तविक स्थिति ऐसी है कि संयुक्त राष्ट्र संघ की शांति रक्षा कार्रवाई में महिला शांति रक्षकों की संख्या बहुत कम है। उन्होंने कहा,अब शांति रक्षा सैनिकों में महिलाओं का अनुपात केवल 3 प्रतिशत है। जो हमारी प्रतीक्षा में 10 प्रतिशत से बहुत दूर है। महिला शांति रक्षकों की संख्या को बढ़ावा देने का लक्ष्य है काम दक्षता में सुधार करना। और इस तरह का प्रशिक्षण तो महिला शांति रक्षकों की संख्या को बढ़ाने का एक अच्छा उपाय है। 

चीनी रक्षा मंत्रालय के शांति रक्षा मामला कार्यालय के उपाध्यक्ष कर्नल नान निंग के विचार में अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा स्थिति के विकास के साथ साथ शांति रक्षा कार्रवाई के सामने गंभीर चुनौतियां पैदा होंगी। आशा है कि हम इस प्रशिक्षण से लाभ उठाकर संसाधन व सूचना, मौके व उपलब्धियों का साझा कर सकेंगे, विभिन्न देशों के लिये ज्यादा से ज्यादा शांति रक्षकों को प्रशिक्षण दे सकेंगे, और भविष्य के सहयोग के लिये सुदृढ़ आधार तैयार कर सकेंगे।

उन्होंने कहा,अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा स्थिति के बदलने व विकास के साथ साथ शांति रक्षा कार्रवाई में गंभीर चुनौतियां पैदा होंगी। हमारी जिम्मेदारी व कर्तव्य ज्यादा भारी होंगे। आशा है कि हम एक साथ कोशिश करके लगातार अपनी व्यावसायिक गुणवत्ता व क्षमता को उन्नत कर सकेंगे, सक्रिय रूप से संयुक्त राष्ट्र संघ की शांति रक्षा कार्रवाई में भाग लेंगे, और विश्व शांति की रक्षा में अपने अपने योगदान दे सकेंगे।

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