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हिमाचल के वृषांक ने किक बॉक्सिंग में भारत को दिलाया गोल्ड

2019-07-24 10:11:28
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सबसे पहले सुर्खियां

1.दिग्गज क्रिकेटर युवराज सिंह ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से लिया संन्यास

2. एशले बार्टी ने 46 साल बाद ऑस्ट्रेलिया को दिलाया टेनिस का खिताब

3. सबसे कम मैचों में 150 विकेट लेने वाले गेंदबाज़ बने मिचेल स्टार्क

4. हिमाचल के वृषांक ने किक बॉक्सिंग में भारत को दिलाया गोल्ड

अब खबरें विस्तार से।

वर्ल्डकप 2011 में भारतीय जीत में अहम भूमिका निभाने वाले क्रिकेटर युवराज सिंह ने संन्यास का ऐलान कर दिया है। अपने रिटायरमेंट के दौरान युवराज सिंह ने कहा, अब आगे बढ़ने का समय आ गया है। युवराज को वनडे व टी-20 के शानदार बल्लेबाज़ों में शुमार किया जाता था। उन्‍होंने भारत की ओर से 40 टेस्‍ट, 304 वनडे और 58 टी20 इंटरनेशनल मैच खेले। भारतीय टीम को 28 साल बाद वर्ल्‍डकप 2011 में चैंपियन बनाने में युवराज का अहम रोल रहा। गेंद और बल्‍ले से शानदार प्रदर्शन करते हुए युवराज ने वर्ल्‍डकप 2011 के सर्वश्रेष्‍ठ खिलाड़ी होने का सम्मान हासिल किया था। 2011 वर्ल्‍डकप के बाद कैंसर की बीमारी से जूझने के बाद उन्होंने न केवल भारतीय क्रिकेट टीम में वापसी की बल्कि अपने प्रदर्शन से हर किसी को प्रभावित किया।

12 दिसंबर 1981 को चंडीगढ़ शहर में जन्‍मे युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह भी भारतीय टीम के लिए खेल चुके हैं. योगराज ने तेज गेंदबाज की हैसियत से भारतीय टीम के लिए एक टेस्‍ट मैच खेला. वे भारत के लिए छह वनडे मैच भी खेले थे.

क्रिकेट संबंधी खबर के बाद टेनिस की जानकारी। आठवीं वरीयता प्राप्त एशले बार्टी ने फ्रेंच ओपन के महिला एकल फाइनल में पिछले दिनों चेक गणराज्य की 19 वर्षीय मार्केटा वोंद्रोयूसोवा को आसानी से शिकस्त देकर अपना पहला ग्रैंडस्लैम खिताब हासिल किया। इस जीत के साथ ही बार्टी 46 साल बाद फ्रेंच ओपन का खिताब जीतने वाली पहली ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी बन गयी। इससे पहले 1973 में मार्गेट कोर्ट पेरिस में चैम्पियन बनने वाली आस्ट्रेलियाई खिलाड़ी थीं। तेईस वर्षीय बार्टी ने महज 70 मिनट में एकतरफा खिताबी मुकाबले को 6-1, 6-3 से अपने नाम किया।


बार्टी को इस जीत का फायदा उनकी रैंकिग में भी मिलेगा। वह अगले सप्ताह जारी होने वाली रैंकिंग में जापान की नाओमी ओसाका के बाद दूसरे स्थान पर पहुंच जाएंगी। वह 1976 में इवोन गुलागोंग कावली के बाद सर्वश्रेष्ठ रैंकिग हासिल करने वाली ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी बन जायेंगी। चैम्पियन बनने के बाद बार्टी ने कहा कि यह अविश्वसनीय है, इसे बयां करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं है।। मैंने आज अच्छा खेल दिखाया। मुझे खुद पर और अपनी टीम पर बहुत गर्व है, पिछले दो सप्ताह अविश्वसनीय रहे हैं।

बार्टी ने 2015 में पेशेवर क्रिकेट खेलने के लिए टेनिस छोड़ दिया था लेकिन उन्होंने फिर इस खेल में वापसी की। बार्टी ने 19 साल की वोंद्रोयूसोवा के खिलाफ 27 विनर लगाये जबकि विश्व रैंकिंग में 38वें स्थान पर काबिज खिलाड़ी ने 22 सहज गलतियों के मुकाबले सिर्फ 10 विनर लगाये। मैच गंवाने के बाद उन्होंने कहा कि आपको और आपकी टीम को बधाई, आपने मुझे सबक दिया। भले ही मुझे आज जीत नहीं मिली, लेकिन मैं वास्तव में खुश हूं।

टेनिस के बाद अब आज की आखिरी खबर।

आस्ट्रेलिया की तेज गेंदबाजी के अगुआ मिशेल स्टार्क एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे कम मैचों में 150 विकेट लेने वाले गेंदबाज बन गये हैं। स्टार्क ने आस्ट्रेलिया की गुरुवार को ब्रिस्टल में वेस्टइंडीज पर 15 रन की जीत की दौरान यह उपलब्धि हासिल की। उन्होंने 44 रन देकर पांच विकेट लिये।

स्टार्क का यह 77वां वनडे मैच था और उन्होंने सबसे तेज 150 विकेट हासिल करने के मामले में पाकिस्तान के सकलैन मुश्ताक का रिकार्ड तोड़ा जिन्होंने 78 मैचों में यह उपलब्धि हासिल की थी। न्यूजीलैंड के ट्रेंट बोल्ट (81 मैच) इस सूची में तीसरे, आस्ट्रेलिया के ब्रेट ली (82) चौथे और श्रीलंका के अजंता मेंडिस (84) पांचवें स्थान पर हैं।

अब आज के प्रोग्राम की अंतिम खबर।

इटली के मिलान शहर में हुई किक बॉक्सिंग वर्ल्ड कप में हिमाचल के नन्हें बच्चे वृशांक ने भारत को स्वर्ण पदक दिलाया। प्रतियोगिता के दौरान 24 किलो भारवर्ग के फाइनल में हिमाचल के नन्हें वृशांक शर्मा ने इटली के मार्को को हराकर देश को पहला अंतरराष्ट्रीय पदक दिलाया।

इससे पूरी दुनिया में हिमाचल का नाम रोशन हुआ है। इससे पहले सेमीफाइनल में उन्होंने रूस के एंड्रयू को हराकर फाइनल में जगह बनाई थी। देश का प्रतिनिधित्व कर रहे 19 सदस्य दल में यह पहला मेडल नन्हें वृशांक ने जीता है।

वर्ल्ड कप में भाग लेने से पहले वृशांक ने राष्ट्रीय किक बॉक्सिंग फेडरेशन के 24 किलो भार वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर नेशनल चैंपियन बनकर अपनी पहचान बनाई थी।
उनके पिता किक बॉक्सिंग के राष्ट्रीय खिलाड़ी रहे हैं, लेकिन खुद वह अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में कभी भाग नहीं ले सके। वृशांक ने पदक अपने दादा के लिए समर्पित किया है।

इसी जानकारी के साथ संपन्न होता है आज का प्रोग्राम। आपको खेल जगत का नया अंक कैसा लगा, हमें जरूर बताइएगा। इसी उम्मीद के साथ अगले हफ्ते इसी वक्त आपसे फिर होगी मुलाकात, कुछ नई नई खबरों और जानकारियों के साथ। तब तक के लिए दीजिए इजाजत। नमस्कार, बाय-बाय, चाई-च्यान...



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